अदालत ने सीबीआई से पूछा- बिड़ला के खिलाफ क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल करने की क्या जल्दी थी?

By: | Last Updated: Friday, 12 September 2014 8:48 AM

नई दिल्ली: एक विशेष अदालत ने आज सीबीआई से सवाल किया कि कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल करने की क्या जल्दी थी जिसमें उसने पूर्व में शीर्ष उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी.

 

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश भरत पाराशर ने एजेंसी के जांच अधिकारी से सवाल किया ‘‘इस मामले को बंद करने की क्या जल्दी थी ?’’ सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि स्क्रीनिंग कमेटी की जिस बैठक में बिड़ला के स्वामित्व वाली हिंडाल्को कंपनी के कोयला ब्लॉक आवंटन की मांग करने वाले आवेदन पर विचार किया गया था, उस बैठक के मूल मिनट्स ‘‘लापता हैं.’’ इस पर अदालत ने जांच अधिकारी से यह बताने को कहा कि क्या कोई ऐसा बयान है जिसमें कहा गया है कि जांच समिति की बैठक के मूल मिनट्स ‘‘गुम हो गए हैं.’’ न्यायाधीश ने कहा ‘‘किसी का भी ऐसा कोई बयान नहीं है कि मूल मिनट्स गुम हो गए हैं.’’ जांच अधिकारी जब अदालत के सवालों पर स्पष्टीकरण नहीं दे पाए तब न्यायाधीश ने उन्हें उनके निरीक्षण अधिकारी को अदालत में बुलाने का आदेश दिया.

 

साथ ही अदालत ने केस डायरी नहीं लाने के लिए भी सीबीआई की खिंचाई की.

 

न्यायाधीश ने जांच अधिकारी से कहा ‘‘किस आधार पर आपने (सीबीआई ने) यह (मामले को बंद करने का) निष्कर्ष निकाला है ? किस तरह की जांच आपने की है ? निरीक्षण अधिकारी क्या कर रहे थे. पुलिस फाइल ले कर आइये और अपने निरीक्षण अधिकारी को भी अदालत में बुलाइये.’’

 

कोयला उत्पादक संघ, स्पंज आयरन उत्पादक संघ और भारतीय स्वतंत्र बिजली उत्पादक संघ के साथ कुछ निजी निकायों ने शीर्ष अदालत के 25 अगस्त के निर्णय के परिणामों पर विचार के लिए एक समिति के गठन का पक्ष नहीं लेने के सरकार के रूख का विरोध किया था. इन्होंने सरकार के इस रूख की आलोचना की थी कि कोयला ब्लाक आवंटन को रद्द करना, फैसले का नैसर्गिक परिणाम है. इनका कहना है कि ऐसा कहना (सरकार का) आपदा की स्थिति पैदा करेगी और इससे लोगों एवं ग्रामीण आबादी प्रभावित होगी जो पहले से बिजली संकट का सामना कर रही है. पीठ ने हालांकि कहा कि सरकार ने केवल अपनी स्थिति स्पष्ट की है और यह मामले से निपटने के लिए उचित मार्ग नहीं होगा क्योंकि स्क्रीनिंग समिति कह चुकी है कि किसी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.

 

जांच एजेंसी ने बिड़ला, पारख और अन्य के खिलाफ पिछले साल अक्तूबर में प्राथमिकी दर्ज की थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि पारख ने हिंडाल्को को कोयला ब्लॉक आवंटन ठुकराने का अपना फैसला कुछ ही माह में बिना किसी जायज़ आधार या बिना परिस्थितियों में परिवर्तन के, पलट दिया था और ‘‘अनुचित तरीके से उसका पक्ष’’ लिया था. प्राथमिकी वर्ष 2005 में हुए तालाबीरा द्वितीय और तृतीय कोयला ब्लॉक आवंटन से संबंधित थी और सीबीआई ने बिड़ला, पारख तथा हिंडाल्को के अन्य अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और सरकारी अधिकारियों की ओर से आपराधिक कदाचार सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था.

 

बहरहाल, सीबीआई ने जांच के दौरान पाया कि पारख की ओर से कोई बदलाव वाली बात नहीं हुई और हिंडाल्को को कोयला ब्लॉक आवंटन में कुछ भी गलत नहीं हुआ था.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: acort_cbi_coalscam
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: CBI coal scam court
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017