समय पर घर नहीं मिलने से परेशान लोगों के हक में बड़ा फैसला

After Unitech, home buyers take legal route against builder frauds, delays

नई दिल्ली: समय पर घर नहीं मिलने से परेशान लोगों के हक में बड़ा फैसला आया है. देश के बड़े बिल्डर यूनिटेक के मालिकों को जेल की हवा खिलाने के बाद दिल्ली की अदालत ने कहा है कि जब तक गला ना दबाया जाए बिल्डर कार्रवाई नहीं करते हैं. अदालत के डंडे के बाद यूनिटेक बिल्डर्स ने ग्राहक का पैसा ब्याज के साथ लौटाया है.

कोर्ट ने कहा है, ”जब तक गला न दबाया जाये तब तक कार्रवाई नहीं करते. और भी बिल्डर्स होंगे और भी ग्राहक होंगे जिनका पेमेंट नहीं किया होगा उसका क्या ? बार बार शिकायत आएंगी तो हर बार राहत नहीं मिल पाएगी.”

ये टिप्पणी है दिल्ली की साकेत कोर्ट की. मामला था यूनिटेक बिल्डर का फ्लैट के मालिकों को सालों बीत जाने के बाद भी पजेशन ना देने और ना ही पैसा वापस करने का. कोर्ट के आदेश के बाद बिल्डर ने शिकायतकर्ता को पैसे वापस कर दिए जिसके बाद शिकायत भी वापस ले ली गई.

दिल्ली एनसीआर में बिल्डर्स की मनमानी और फ्लैट में देरी को लेकर अक्सर ही धरना प्रदर्शन होते हैं. लेकिन ऐसा कम ही होता है जब किसी बड़े बिल्डर को जेल जाने की नौबत आ जाए.

यूनिटेक बिल्डर्स के खिलाफ संजय कालरा और देवेश वाधवा नाम के दो लोगों ने शिकायत की थी. आरोप था कि ग्रेटर नोएडा में यूनिटेक के प्रोजेक्ट हैबिटाट अपार्टमेंट में बुक कराए गए फ्लैट का पजेशन कई साल बाद भी नहीं मिला है. 11 जनवरी को दिल्ली की साकेत कोर्ट ने यूनिटेक के एमडी संजय चंद्रा समेत 4 लोगों को 14 दिन के लिए जेल भेजा था.

हालांकि जिला जज की कोर्ट से चारों को तीन दिन की अंतरिम जमानत मिल गई थी. लेकिन चूंकि सभी आरोपी जेल जा चुके थे इसलिए सभी को एक रात तिहाड़ जेल में गुजारनी पड़ी. आज जब यूनिटेक के अधिकारी जमानत मियाद खत्म होने पर फिर से कोर्ट पहुंचे तो अदालत ने उन पर कड़ी टिप्पणी की. कोर्ट ने ये भी कहा कि जो मीडिया रिपोर्ट्स में आ रहा है वो चिंताजनक है कि लाखों लोगों के पैसे फंसे हैं उनका क्या?

एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली एनसीआर में 3 लाख घरों को सौंपने में आठ साल तक की देरी कर दी गई. एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल गाजियाबाद में घर देने में औसतन 29 महीने की देरी की गई. नोएडा में घर देने में 30 महीने की देरी हुई जबकि गुड़गांव में औसतन 34 महीने की देरी फ्लैट देने में की गई.

यूनिटेक केस में अदालत के फैसले ने एक नजीर भी पेश की है कि जो भी ग्राहक बिल्डर से परेशान हैं तो वो अदालत से बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर सकते हैं. वैसे केंद्र सरकार भी बिल्डरों के ऊपर लगाम कसने के लिए रियल स्टेट रेगुलेटरी बिल ला रही है.

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Web Title: After Unitech, home buyers take legal route against builder frauds, delays
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