मौत के बाद ही लागू हो सकती है वसीयत : सुप्रीम कोर्ट

By: | Last Updated: Tuesday, 15 July 2014 4:52 PM

नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि किसी व्यक्ति की वसीयत केवल तभी लागू हो सकती है जब उसकी मौत हो जाए. यहां तक कि वसीयत करने वाला/वाली यदि निष्क्रियावस्था में भी हो तब भी वसीयत लागू नहीं हो सकती है.

 

प्रधान न्यायाधीश आर. एम. लोढ़ा, न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर, न्यायमूर्ति जे. चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी और न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरिमन ने कहा, “वसीयत किसी के जिंदा रहते लागू नहीं हो सकती, भले ही वह निष्क्रिय क्यों न हो.”

 

अदालत का यह नजरिया गंभीर बीमार व्यक्ति जिसकी हालत में सुधार की कोई उम्मीद नहीं हो उसके लिए इच्छामृत्यु के पक्ष में दिए गए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की दलीलों से असहमत होने के बाद आया.

 

इच्छामृत्यु के पक्ष में एनजीओ कॉमन काज दलील रख रहा है. इसमें पूरी तरह बीमार व्यक्ति से जीवन रक्षक प्रणाली हटाने और औषधि रोकना शामिल है.

 

तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश पी. सतशिवम, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह ने 25 फरवरी को सामाजिक, वैधानिक, चिकित्सकीय और संवैधानिक प्ररिप्रेक्ष्य में संपूर्ण मानवता के हितों को ध्यान में रखते हुए इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानूनी व्याख्या की वकालत की थी.

 

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी.

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Web Title: AFTER_DEATH_ANY_CLAIM_ON_PROPERITY
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