पर्यावरण दिवस स्पेशल: दिल्ली में वायु प्रदूषण खतरनाक, बरतें एहतियात

By: | Last Updated: Friday, 5 June 2015 3:45 PM
air pollution

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी की हवा में प्रदूषण कणों की मात्रा तय मानक से ज्यादा हो चुकी है, जो लोगों को कई बीमारियों का शिकार बना रही है. प्रदूषण के इस खतरे से बचने के लिए लोगों को एहतियात बरतने की आवश्यकता है.

राष्ट्रीय राजधानी के शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक, डॉ. जेसी मोहन ने विश्व पर्यावरण दिवस पर कहा, “दिल्ली में धुंध भरा धुआं और प्रदूषण दिन के समय सबसे ज्यादा होता है और लोग इस समय बाहर निकलने से परहेज करें.

 

इसके साथ ही बच्चों और बजुर्गो के बाहर जाने का समय सुबह जल्दी या शाम को तय किया जाना चाहिए. अगर दिन में बाहर जाना पड़े तो मुंह और नाक पर रुमाल बांध लेने से हानिकारक कणों से बचा जा सकता है.”

 

उन्होंने कहा कि एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे कि फल और सब्जियों का सेवन उचित मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि यह शरीर को प्रदूषण से पैदा होने वाले हानिकारक कणों से सुरक्षित रखते हैं.

 

जेसी मोहन ने कहा, “अच्छी गुणवत्ता के तरल पदार्थ, जिसमें शराब शामिल नहीं है, शरीर के अंदरूनी हिस्सों में नमी बनाए रखते हैं. अधिक प्रदूषण वाली जगहों पर व्यायाम नहीं करना चाहिए. अगर ऐसे हालात हों तो घर पर ही व्यायाम करना ज्यादा बेहतर है या फिर प्रदूषण मुक्त वातावरण का चुनाव करें.”

 

वायू प्रदूषण अब दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरण आधारित स्वास्थ्य समस्या मानी जा रही है, जो विश्व भर में 70 लाख से ज्यादा कम उम्र में मौतों का कारण बन रही है. इसलिए प्रदूषण से होने वाली गंभीर बीमारियों को दूर रखने के लिए सावधानियां बरतना और भी जरूरी हो जाता है.

 

हवा में मौजूद बारीक कण इसके लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं. ढाई माईक्रोन से भी छोटे ये कण आसानी से देखे भी नहीं जा सकते हैं और बहुत आसानी से हमारे शरीर में दाखिल हो जाते हैं. फिर वे फेफड़ों और दिल के पास वाली लहू शिराओं पर अपना असर डालना शुरू कर देते हैं. इससे दिल से जुड़ी समस्याएं पैदा होती हैं.

 

मध्यप्रदेश: पर्यावरण की सुरक्षा में जुटे गुमनाम नायक

 

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो समाज के लिए ही बने होते हैं, उनका लक्ष्य अपने लिए किसी नफा-नुकसान का आकलन किए बगैर सिर्फ समाज के लिए काम करते जाना होता है. मध्य प्रदेश में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो पर्यावरण की शुद्धि के लिए वर्षो से खुद को झोंके हुए हैं, मगर उन्हें जानता कोई नहीं है.

 

पर्यावरण सुरक्षा के इन गुमनाम नायकों ने अपने अपने क्षेत्र में हालांकि बड़ा काम किया है. बुरहानपुर जिले के मनोज तिवारी पेशे से शिक्षक हैं और गायत्री परिवार से जुड़े हुए हैं. वह अपने क्षेत्र में पहाड़ियों को हरा-भरा करने के साथ ताप्ती नदी को प्रदूषण मुक्त करने की मुहिम में जुटे हुए हैं.

 

तिवारी ने आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा कि बुरहानपुर जिले में गायत्री परिवार की श्रीराम शर्मा उपवन योजना के तहत चार पहाड़ियों- देव्हरी, सारोला, फोपनार और देडतलाय को हरा-भरा किया जा चुका है. इसके अलावा ताप्ती नदी के किनारों पर पौधे लगाने का अभियान चल रहा है.

 

ताप्ती नदी के बुरे हाल की चर्चा करते हुए तिवारी कहते हैं कि इस नदी का सफाई अभियान चल रहा है. प्रति रविवार आमजन श्रमदान कर नदी से कचरा निकालते हैं. इस नदी में प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाएं विसर्जित की जाती थीं. लेकिन अब जनसामान्य की मांग पर जिलाधिकारी ने नगर में प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां बनाने पर ही रोक लगा दी है.

 

ताप्ती नदी के शुद्धिकरण के अभियान में अहम भूमिका निभाने वाले मनोज ने आगे कहा कि वर्ष 2009 में शुरु हुए इस अभियान के तीन लक्ष्य- जलशुद्धि, तटशुद्धि और ग्रामशुद्धि है. बैतूल के मुलताई से लेकर सूरत तक नदी के दोनों ओर हरियाली चूनर ओढ़ाने के लिए पौधे रोपे जा रहे हैं.

 

इसी तरह देवतालाब के सगड़ोद में माखन लाल मकवाना पर्यावरण के लिए अपने को समर्पित कर चुके हैं. वे विभिन्न क्षेत्रों में जाकर पौधरोपण तो करते ही हैं, साथ ही अब तक अपने स्तर पर 10 हजार से ज्यादा पौधे विकसित कर वितरित भी कर चुके हैं.

 

मकवाना बताते हैं कि वे प्रतिवर्ष अक्टूबर-नवंबर के माह में नीम, बरगद आदि पौधे विकसित कर उन्हें पॉलीथिन की थैलियों में रखते हैं. इस काम में उनके मित्र भी मदद करते हैं. वे पिछले कई वर्षो से यह काम करते आ रहे हैं.

 

पर्यावरण की सुरक्षा के लिए काम कर रहे ये वे नायक हैं, जो बगैर किसी सरकारी मदद के अपने अभियान को अंजाम दिए जा रहे हैं. उनकी यह कोशिश न केवल कारगर हो रही है, बल्कि औरों को सीख भी दे रही है.

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