प्रेस कॉन्फ्रेंस: ओवैसी के खुला चैलेंज का अखिलेश ने दिया यूं जवाब

By: | Last Updated: Saturday, 10 October 2015 1:45 PM

दिबांग- आप की  सरकार के बहुत महत्वपूर्ण मंत्री हैं, जिम्मेदार मंत्री हैं, कहते हैं कि हम यूएन में जाएंगे. विरोधी कह रहे हैं कि देश की बात है और आप यूएन में जाना चाह रहे हैं. पाकिस्तान जाना चाहे यूएन में तो बात ठीक है. क्या समाजवादी पार्टी के एक मंत्री को इस तरीके की बात करनी चाहिए?

 

अखिलेश यादव- मैं ये बात यहां रखना चाहता हूं कि बदांयू में जो मामला हुआ, किसी भी पॉलिटिकल पार्टी का नेता नहीं बचा जो बदांयू में ना पहुंचा हो. जिन्होंने बदांयू नहीं देखा था वो बदांयू गए थे क्योंकि घटना चैनलों के माध्यम से ऐसी दिखाई गई जो कि बाद में कुछ और ही निकली. और मैं समझता हूं कि उस घटना के बाद यूपी की और समाजवादी सरकार की बदनामी कराने में कितने लोग शामिल हो गए. उस समय भी यूएन ने उस बात को नोटिस लिया और तमाम संस्थाओं ने नोटिस में लिया, लेकिन सच्चाई दूसरी निकली. जहां तक सवाल हमारी पार्टी के नेता के कहने का है, यूएन तक जाने की बात तो उन्होंने भारत सरकार का भी नाम लिया तो मैं समझता हूं कि आज के समय में कोई खबर है, खबर केवल यूपी तक सीमित नहीं रहती है.

 

अगर कोई खाने पर और केवल ये कहने पर कि ये खाना क्या है, उसपर हत्या हो जाए, पूरे घर-बार को बर्बाद कर दिया जाए तो क्या हम ये नहीं कह सकते कि कहीं हम और भी आवाज उठाएंगे. और मैंने इस बात को इसलिए कहा कि जो बात उत्तर प्रदेश में हुई वो देश में गई होगी, दुनिया में गई है. मैंने वाशिंगटन पोस्ट पढ़ा, मैंने इंटरनेशनल जर्नलिस्टों के स्टेटमेंट देखे, कईयों के ट्विट पढ़े हैं मैंने.

 

आखिरकार क्या घटना थी इतना बुरा किसी देश में, किसी धरती पर हो सकता है. सवाल ये है कि जब दुनिया देख रही है, दुनिया जान रही है, कोई भी घटना हो, कहीं भी हो दुनिया में जानी जाती है तो क्या हम अपना पक्ष नहीं रख सकते?

 

दिबांग- क्या आप इस बयान का समर्थन कर रहे हैं?

अखिलेश यादव- मैं समर्थन नहीं कर रहा हूं, मैं ये कह रहा हूं कि कोई बात आज सीमित नहीं रह सकती है. आज के जमाने में जो घटना हो रही है वो दुनिया की नजर में नोटिस होगी. और आप वाशिंगटन पोस्ट को नहीं रोक पाए, उन्होंने क्या लिखा  है अपनी न्यूज में और इंटरनेशनल मीडिया को नहीं रोक पाए उन्होंने क्या लिखा है देश के बारे में. क्या ये देश के लिए शर्मनाक बात नहीं है.

 

दिबांग- क्या ये भी शर्मनाक बात नहीं है कि आप के राज्य का मुद्दा है और राजनीति के लिए ये कहें कि हम यूएन में जाएंगे.

 

अखिलेश यादव- केवल इतनी सी बात है कि हम प्रधानमंत्री जी को या देश के लोगों चिट्ठी लिखें, केवल इतनी ही सी बात है. अगर आप ये चाहते हैं कि हम यूएन में ना जाकर देश की सरकार से गुहार करें तो मैं ये स्वीकार करता हूं कि हम यूएन में नहीं जाएंगे. हम गृहमंत्री और प्रधानमंत्री से गुहार करेंगे कि ये क्या हो रहा है? आखिर ये कर कौन लोग रहे हैं, क्या आप ने उनकी पार्टी के सदस्यों के स्टेटमेंट नहीं सुने. उन्होंने क्या स्टेटमेंट दिए हैं वहां जाकर के, वो क्या कह रहे हैं सरकार को कि  हमारी सरकार को कि हम गाय को मारने वाले लोग हैं. ये हमें तो नहीं पता है कि गाय को मारने वाले कौन लोग हैं या गाय पर राजनीति करने वाले कौन लोग हैं. क्या आज के समय में जहां लैपटॉप, कंम्यूटर, दुनिया एक हो रही है, वहां पर आप गाय पर सवाल उठाएंगे.

 

दिबांग- आप मान रहे हैं कि ऐसे बयान नहीं देने चाहिए तो क्या आप मानते हैं कि ऐसे नेता, ऐसे मंत्री के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. कि आप ऐसे बयान कैसे दे सकते हैं?

 

अखिलेश यादव- मैं ये कह रहा हूं कि मैं प्रॉसिजर फॉलो करने के लिए तैयार हूं. मैं यूएन न जाकर, मैं कहूंगा कि हमारी बात गृहमंत्री और प्रधानमंत्री तक पहुंचे, वो शायद यूएन तक ले जा सकें, यही तो प्रॉसिजर है. 

 

दिबांग- पर क्या आप सीएम के तौर पर ऐसे मंत्री से बात करेंगे, उनको सजा देंगे, आप कहेंगे कि आप को ऐसा नहीं कहना चाहिए.

 

अखिलेश यादव- ये अलग बात है. अगर मुझे कहना होगा तो मैं मंत्री जी को अलग से बुलाकर कह सकता हूं.

 

दिबांग- क्या आप के भी स्टेट इंटेलिजेंस की फेलियर रही, राज्य पुलिस की फेलियर रही. इतनी बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे हो गए, लाउडस्पीकर पर बात हो गई, एक हत्या हो गई.

 

अखिलेश यादव- ये जो लाउडस्पीकर पर बात हुई. ये मैं कह सकता हूं कि जांच में सब बातें आएंगी और अगर इंटेलिजेंस फेलियर है तो उस पर कार्रवाई होगी. वहीं मैं समझता हूं कि जिस समय गांव से सूचना पहुंची थी पुलिस को, पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस को ये अंदाजा नहीं था कि कितनी बड़ी घटना है और किस रूप में है तो पुलिस जरूर कम गई थी लेकिन उसके बावजूद पुलिस पहुंची वहां पर. पुलिस ने ही उन्हें निकाला हालांकि उनके पिता नहीं बच पाए लेकिन बेटे को पुलिस ने ही एडमिट किया अस्पताल में. कल को ये भी सवाल हो सकता है जिस अस्पताल में वो बच्चा एडमिट है, मैंने डॉक्टर से बात की थी. मैं डॉक्टर से ये भी कहा कि ये अस्पताल हो सकता है कि बीजेपी या दूसरी पार्टी के नेता का हो लेकिन आप की जिम्मेदारी है इस बच्चे की जान बचाने की. खैर डॉक्टर ने अपनी जिम्मेदारी निभाई है. लेकिन कल बिल की बात आ जाए तो हमने ये भी कहा है कि सरकार इस पर पूरा का पूरा खर्च करेगी. लेकिन ये तमाम सवाल है जो कभी उठ सकते हैं.

 

दिबांग- क्या कहेंगे आप ऐसे बयानों के लिए और ये कह रहे हैं कि राहुल यादव वाला जो मुद्दा था वो इन्होंने उठाया तब आप ने 5 लाख देने की घोषणा की.

 

अखिलेश यादव- मैं समझता हूं कि दुनिया देख रही है. जब आप दुनिया में अपने देश को खड़ा करना चाहते हैं. तो ऐसे दल के उन्हीं के लोगों के बयान क्या हैं? क्या बहस इस बात पर ना हो कि रोजगार मिलेगा कि नहीं मिलेगा? क्या बहस इस बात पर नहीं होनी चाहिए कि जब प्रदेश ने सबसे ज्यादा एमपी जिताए हैं तो यूपी कि सरकार जो एक्सप्रेस वे बना रही है उससे बड़ा एक्सप्रेस वे बनाएं. बहस इस बात पर होनी चाहिए कि अगर हम गृहमंत्री के संसदीय क्षेत्र में अगर हम मेट्रो बना सकते हैं तो प्रधानमंत्री के भी संसदीय क्षेत्र में भी मेट्रो बननी चाहिए. जब इतने बड़ी संख्या में सांसद दिए हैं इस प्रदेश की जनता ने तो सवाल कुछ और होने चाहिए, तरक्की और खुशहाली के. ये वो लोग हैं जो हर 6 महीने में मुद्दा बदल देते हैं. ये वही लोग हैं जो घर वापसी पर सवाल उठाया था, ये वही लोग हैं जो देश को धर्म परिवर्तन के नाम पर दूसरी दिशा में ले जाने का काम किया था, ये वो लोग हैं जिन्होंने लव जिहाद के नाम पर ना जाने कितना खून बहा दिया था उत्तर प्रदेश में तो आज वही लोग गाय की बात कर रहे हैं. सवाल तो उनके दल के नेताओं को सोचना चाहिए.

 

दिबांग- इसमें आप लोग भी खेल करते हैं, आप लोग भी इसमें दिखाई देते हैं!

 

अखिलेश यादव- हमारा कोई खेल नहीं है. मैं ये कह सकता हूं कि हमारी पार्टी की इसमें कोई राजनीति नहीं है. अगर मैं उसके परिवार को बुला कर मिलता हूं, क्या ये ठीक है कि सब लोग जा-जाकर सब लोग मिलते हैं गांव में अगर सीएम किसी के परिवार को बुला लें और मिलते हैं. मैंने नाव वाले को बुलाया जिसने बच्चों को बचाया, कल को ये सवाल खड़े कर सकते हैं कि नाव पर जिसने 15 बच्चों को बचाया वो यादव था. यादव को मुख्यमंत्री ने क्यों बुला लिया? कल को ये भी सवाल उठ सकता है कि लखनऊ में टाइपराइटर था जिसको मारा गया उसको तो सीएम आवास के बाहर रहना था. हां मैं ये मानता हूं कि कालीदास की ये संस्कृति थी कि बड़ा से बड़ा आदमी आए तो जूते उतार कर अंदर जाता था. तो खैर हम समाजवादी लोग हैं, दूसरे तरीके के लोग हैं. अगर हमें किसी से मिलना है और किसी को बुलाना है तो मुख्यमंत्री आवास उसके लिए खुला है. इसलिए हमने कहा कि इससे डेमोक्रेटिक लिब्रल सरकार कहीं नहीं मिलेगी, जिस तरीके से हम लोग काम कर रहे हैं.

 

शीला रावल- अभी आप ने कहा कि आप किसी को भी लखनऊ बुला सकते हैं लेकिन जब नोएडा जाने की बारी आती है तो  प्रदेश का कोई मुख्यमंत्री नोएडा नहीं जाता है. एक मान्यता रही है कि नोएडा जाने वाले की कुर्सी जाती है. आप से तो उम्मीद है कि आप इस अंधविश्वास को बदल दें आप पहल करें.

 

अखिलेश यादव- देखिए नोएडा जाने का जो अंधविश्वास है, मैं 2017 में तोड़ दूंगा, मैं दर्जनों बार जाऊंगा वहां पर.

 

शीला- उसको थोड़ा एक्सप्लेन कीजिए क्या चुनाव प्रचार करने जाएंगे या चुनाव के बाद जब आप मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे.

 

अखिलेश यादव- अंधविश्वास यही है कि कोई सीएम नोएडा नहीं जाता है तो इसीलिए मैंने कहा कि मैं 2017 में जरूर जाऊंगा और मार्च के बाद. सवाल ये पूछा जा रहा है कि मुख्यमंत्री नोएडा जाते हैं कि नहीं जाते हैं तो मैं ये कह रहा हूं कि 2017 में सरकार बनाने के बाद जरूर जाऊंगा.

 

दिबांग- अभी तो 2 साल पड़े हैं, आप क्यों नहीं चले जाते. क्यों नहीं साबित करते कि ये सब अंधविश्वास है. मैं नोएडा गया और जीत कर आया. क्यों नहीं इसको साबित करते?

 

शीला- समाजवादी की वैज्ञानिक सोच भी तो आगे आनी चाहिए.

अखिलेश यादव- समाजवादी लोग पुरानी पंरपराओं को निभाते हैं. जो तमाम हमारे मुख्यमंत्री पूर्व में नहीं गए. उनका मानना था कि वहां जाने के बाद नुकसान होता है. इसलिए हम भी उनका कहना मान रहे हैं, अगर किसी का कहना मान रहे हैं तो क्या गलत है?

 

दिबांग- अभी तो आप कह रहे थे कि आप पुरानी पंरपराओं को तोड़ते हैं. जो आप का घर है वहां लोग पहले जूते उतार कर जाते थे.

 

अखिलेश यादव- ये तो व्यवहार है, शिष्टाचार है.

 

दिबांग- अगर दादरी वाले मुद्दे पर ही रहें, वहां जाने वाले मुद्दे पर ही रहें. मुलायम सिंह जी चले जाते या उसमें भी ये अंधविश्वास है कि परिवार से कोई नहीं जाना चाहिए.

 

अखिलेश यादव- मैं पॉलिटिकल जवाब दे सकता हूं और दूसरा सच्चाई वाला जवाब मैं दे सकता हूं. आप को जानकारी होगी कि जब कभी प्रदेश में कोई शहीद होता था तो प्रदेश में मुख्यमंत्री या कोई ना कोई मंत्री जाता था. वो परंपरा हम लोगों ने निभाई, हम लोग जाते थे. लेकिन एक स्टेज ऐसी आ गई कि लोग धरने पर बैठने लगे, तो हमने व्यवहारिक ये बनाया कि मुख्यमंत्री आवास पर उनको बुलाकर के रास्ता निकाला जाए. तो केवल इस मौके पर नहीं, इससे पहले भी कई शहीदों के परिवारों को मैंने बुलाया है. और जो सहयोग कर सकता था मैंने किया.

 

दिबांग- ये मुद्दा इतना ज्यादा उछला कि बिहार चुनाव तक जा पहुंचा है. वहां ये कह रहे हैं कि आप की ढिलाई रही, आप की राजनीति रही. वहां ये कह रहे हैं कि आप ने जानबूझ कर एक समुदाय का साथ दिया. आप को इसका आभास है.

 

अखिलेश यादव- जो राजनीतिक दल विकास पर बहस नहीं करना चाहता, काम पर बहस नहीं करना चाहता, तरक्की और खुशहाली पर बहस नहीं करना चाहता. वो जरूर लोगतंत्र में राजनैतिक दलों को ले जाने का प्रयास कर रहे हैं.

 

अशोक वानखेड़े- मुज्जफरनगर के दंगे हुए, दंगों की एक रिपोर्ट आई जो अभी आप टेबल पर रखना चाहते हैं. जो रिपोर्ट लीक हुई उसमें आरोप है कि समाजवादी पार्टी और बीजेपी ने मिलजुल के ये कांड किया. आप के पास भारी बहुमत है, इसके बावजूद ये कहां ढिलाई हो जाती है कि ये फिर से एक दादरी कांड हो जाता है. इसके तीन महीने बाद फिर कोई और कांड होगा. कहीं ना कहीं आप को नहीं लगता कि आप की जो प्रशासन पर पकड़ है वो ढीली हो गई है कि ये लोग इसका फायदा उठाते हैं. एक ही विधायक है जिस पर पहले आरोप लगे हैं, वो दूसरी जगह जाकर इतनी कड़ी भाषा में बोलता है. उसकी हिम्मत इसलिए है कि उसको मालूम है कि ये प्रदेश मुझ को कुछ नहीं करेगा. ये मिलीजुली कुश्ती है या आप की ढिलाई है या केंद्र से किसी और कारण को लेकर ब्लैकमेलिंग है.

 

अखिलेश यादव- मुज्जफरनगर में जो सरकार कर सकती थी, उस वक्त सरकार ने वो फैसला लिया. अगर सेना को बुलाना तो इकदम सेना को बुलाया शहर को बचाने के लिए. मुज्जफरनगर की रिपोर्ट आ गयी है तो उसमें तमाम बातें सामने आएंगी. बहुत सारे और भी बिंदु हैं, मैं टेबल करने जा रहा हूं. इसी तरह मैं कह सकता हूं कि इन्हीं ताकतों ने मुरादाबाद में केवल लाउडस्पीकर को लेकर बवाल किया. इनके विधायक, मंत्री, कार्यकर्ता कोई नहीं बचा जिसने कांठ में लाउडस्पीकर को लेकर झगड़ा ना लगाया हो. सरकार ने सख्ती की और उस समय जो दोषी लोग थे वो जेल भेजे गए.

 

उसका परिणाम ये हुआ कि आज कांठ और मुरादाबाद बिलकुल शांत है. हाल ही में बनारस में आप जानते हैं कि क्या हुआ, अगर सुप्रीम कोर्ट का कोई फैसला है कि आप गंगा में विसर्जन नहीं कर सकते मूर्ती को तो उसको अगर हम पालन करते हैं तो तमाम ताकतें आकर के पीछे खड़ी हो जाती हैं, तमाम ताकतें आकर माहौल खराब करती हैं. कार्रवाई की है, कुछ लोग बड़े हैं, विधायक स्तर के हैं वो भी गए हैं, मैं समझता हूं कि प्रशासन और सख्ती से काम करेंगा.

 

अशोक वानखेड़े- एक ही विधायाक जो वहां आरोपी था वही यहां आकर उलूल-जूलूल बयान देता है.

 

अखिलेश यादव- वही दादरी के जिनके आप नाम ले रहे हैं, सरकार ने पूरी जिम्मेदारी के साथ क्योंकि केवल भाषण नहीं दिया था मुज्जफरनगर वाले मामले में, एक एमएमएस बना कर फैलाया था जो दुनिया के दूसरे कोने का था. हम जो कार्रवाई कर सकते थे वो की थी. हमने एनएसए लगाने का फैसला किया लेकिन कोर्ट ने उसकी अनुमति नहीं दी. वहीं मैं कहता हूं कि आज जो धारा 144 तोड़ी गई है, उस पर कार्रवाई होगी. मंत्री हों या किसी भी स्तर के लोग हों जो कानून के भीतर कार्रवाई हो सकती है वो होगी.

 

दिबांग- आप को मालूम है कि जो रिपोर्ट आप ने केंद्र को भेजी है, उससे केंद्र संतुष्ट नहीं है.

अखिलेश यादव- जो रिपोर्ट मांगी गई थी, वो रिपोर्ट भेजी है प्रदेश सरकार ने और मैं समझता हूं अगर केंद्र समझता है कि उस रिपोर्ट में कुछ कमी है तो हम दोबारा रिपोर्ट भेज देंगे और जब तक फारेंसिक रिपोर्ट ना आए तब तक कुछ कह पाना मुश्किल है.

 

दिबांग- अखिलेश जी जो हल्ला हुआ कि आप जांच कर रहे हैं कि बीफ है कि नहीं.

 

अखिलेश यादव- इस प्रदेश में तो ऐसे लोग हैं वाट्सएप कर के झगड़ा करा रहे हैं. मैं अपने क्षेत्र का बता सकता हूं कि बीजेपी के लोगों ने वाट्सएप चला दिया. सख्ती की और उस व्यक्ति को पकड़ कर जेल भेजना पड़ा. यूपी में तमाम ऐसी ताकतें हैं जो विकास पर चर्चा नहीं करना चाहती. मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि कोई ऐसा राज्य है जिसने 16 लाख लैपटॉप बांटे हो. कोई राज्य मुझे बता दे जिसमें इतने बड़े पैमाने पर सड़कें बन रही हो. कोई मुझे बता दे कि इतने बड़े पैमाने पर सबस्टेशन बने हों, कोई बता दे मुझे कि इतना विकास हुआ हो.

 

दिबांग- ये जो आप ने बात की मुज्जफरनगर की उसमें हमने देखा कि किस तरह से तालिबान का एमएमएस यहां पर घूमा और हमने देखा कि किस तरह से सचिन और गौरव की निर्मम हत्या का ये चित्र है. ये जो तकनीकि आ गई है, उससे आप कैसे लड़ेंगे, क्या कोई तैयारी है आप की?

 

अखिलेश यादव- मैं देश का सबसे अच्छा डायल 100 सिस्टम क्रिएट करने जा रहा हूं यूपी में. आने वाले समय में आप देखेंगे कि जिस तरह से एंबुलेंस 10-15 मिनट में पहुंच जाती है, मैं घटना स्थल पर 10 मिनट पुलिस पहुंचाने का काम मैं करूंगा.

दिबांग- कितने दिनों में?

अखिलेश यादव- ये अगले साल से शुरु हो जाएगा डायल 100.

 

रशीद किदवई- समाजवादी पार्टी मुसलमानों को लेकर जुबानी जमाखर्च करती है लेकिन व्यवहारिक रूप से सिर्फ असुरक्षा की भावना है बल्कि उसके साथ-साथ जो पॉलिटिकल इंपावरमेंट होता है वहां पर बहुत से मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में, जैसे पंचायत चेयरमैन वगैरह की पोस्ट होती है वो आरक्षित हो जाती है, जैसे रामपुर में हुआ तो क्या समाजवादी पार्टी, समाजवादी पार्टी ना होकर के एक अवसरवादी पार्टी बनती जा रही है.

 

अखिलेश यादव- देखिए आरक्षण और पंचायत के चुनाव के बारे में ये बात कह सकता हूं कि इसबार बिलकुल पारदर्शी चीजें की गई है. ये इसलिए हुआ है कि आज हर चीज ऑनलाइन है, अगर किसी का वोट नहीं बना है, वो कंप्यूटर में जाकर दे सकता है, चुनाव आयोग उसकी मदद कर सकता है, अपना वोट बनवा सकता है. किस क्षेत्र में, क्योंकि क्षेत्र नए बने हैं, कुछ पंचायतें बड़ी हैं तो जाकर के देख सकता है कि उसकी पंचायत में किसकी आबादी ज्यादा है. अगर आबादी के आधार पर रिजर्वेशन हुआ है तो मैं समझता हूं कि रिजर्वेशन पर पहली बार ऐसा हुआ है कि उंगली नहीं उठी. दूसरा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कई मौकों पर यहां के लोग गए भी हैं. हमने अपनी बात रखी है. मैं समझता हूं कि बहुत ट्रांसपैरेंट, बेहतर और एक ऐसी तैयारी कि जिसमें उंगली ना उठे पंचायत चुनाव में.

 

दिबांग- एक सवाल ये है जो हर कोई सोच रहा हे कि आप ने महागठबंधन का साथ छोड़ा, उसकी असली वजह क्या रही. क्यों किया ऐसा समाजवादी पार्टी ने?

 

अखिलेश यादव- देखिए राजनीति में और राष्ट्रीय अध्यक्ष जी आज से समाजवादी पार्टी बिहार में चुनाव नहीं लड़ रही है. मैं खुद ही कई विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ा चुका हूं. मैं खुद प्रचार में गया हूं, हमारी पार्टी का संगठन है, हमारी पार्टी के नेतृत्व ने कहा कि हम नहीं चाहते कि गठबंधन में जाएं क्योंकि संख्या हमारी, हम ज्यादा चुनाव लड़ना चाहते हैं. इसलिए गठबंधंन टूटा और राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने जो फैसला लिया उस पर पार्टी आगे काम कर रही है.

 

दिबांग- दो बड़े फैसले राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने लिए जिस तरह से सपोर्ट किया सरकार को पार्लियामेंट में, समाजवादी पार्टी अलग खड़ी हुई, यहां अलग खड़ी हुई लोग ये कह रहे हैं कि जो जांच चल रही है यादव सिंह की उस की वजह से आप अपने पैंतरे बदल रहे हैं.

 

अखिलेश यादव- जांच सीबीआई के पास है और जो चीज होगी वो सच्चाई सामने आएगी. लेकिन सीबीआई का दबाव कोई पार्टी के फैसले पर नहीं पड़ता.

 

दिबांग- पर क्या ये बात सही है कि जो मुलायम सिंह जी की पत्नी हैं, उनका नाम स्वयं आ रहा है जांच में. क्या इसलिए पार्टी पर दबाव है, नेताओं पर दबाव है?

 

अखिलेश यादव– देखिए जांच जब चल रही है तो सीबीआई सब बातें साफ कर देगी. सीबीआई, हम भी जांच में हैं, हमारी तो पहले भी जांच हो चुकी है, मेरी पत्नी की भी जांच हो चुकी है और पत्नी तो हमारे घर में नई आई थीं, दूसरी जाति की आई थी, आर्मी बैकग्राउंड से आईं थीं तब भी सीबीआई जांच करा दी थी. तो सीबीआई के सामने सब सच्चाई सामने आ जाएगी.

 

दिबांग- अखिलेश जी सीबीआई को तो समाजवादी पार्टी ने झेला है. इस पर मैंने भी कई रिपोर्ट्स किए हैं कि किस तरह से सीबीआई कभी चालू हो जाती थी और किस तरह से बंद हो जाती थी, आप के केस के बारे में बात कर रहा हूं. और किस तरह से केंद्र में बैठी सरकारें सीबीआई का इस्तेमाल करती हैं और किस तरह का दबाव क्षेत्रिय दलों पर पड़ता है. क्या ये उसी दबाव का हिस्सा है ये जानना चाह रहे हैं?

 

अखिलेश यादव- देखिए मैं प्रदेश सरकार के बारे में बता सकता हूं, कोई संस्था केंद्र सरकार की हो तो मैं उसपर कैसे जवाब दे सकता हूं. जो केंद्र सरकार की संस्था है उसपर मैं क्या बोल सकता है?

 

दिबांग- क्या ये जो आप के चचेरे भाई हैं और उनकी पत्नी 6 साल के उनके जो इनकम का असेसमेंट होगा. क्या ये सब एक तरीके से दबाव बनाने की कोशिश है?

 

अखिलेश यादव- देखिए आज के जमाने में किसकी कंपनी है, कौन मेंबर है, क्या नहीं है आज आप ऑनलाइन देख सकते हैं और जब जांच कोई चल रही है तो पहले मैं क्या कह सकता हूं. जब तक जांच चल रही है उससे पहले कोई जवाब नहीं दे सकता.

 

दिबांग- आप एक अच्छा जवाब दे रहे हैं कि जांच चल रही है पर आप ये नहीं कह रहे हैं कि ये बात सही है या गलत है.

अखिलेश यादव- कोई चीज मेरी जानकारी में ना हो, उसके बारे में मैं गलत या सही कैसे कह सकता हूं?

दिबांग- पर ये तो आप के परिवार की बात हो रही है.

 

अखिलेश यादव- लेकिन सवाल ये है कि बैलेंस सीट में कोई चीज है, कोई अगर कंपनी चीज है, कोई जांच में चल रही है तो मैं उसके बारे में क्या जवाब दे सकता हूं?

 

दिबांग- आप को लगता है या लोग आप को कहते हैं कि आप बहुत ज्यादा मुलायम हैं.

अखिलेश यादव- मैं जैसा हूं बहुत ठीक हूं.

दिबांग- ठीक और गलत मैं नहीं कह रहा हूं. मैं कह रहा हूं कि आप बहुत ज्यादा मुलायम हैं.

अखिलेश यादव- मैं नहीं हूं लेकिन राजनीति का टेढ़ा-मेढ़ा, ऊंचा-नीचा रास्ता है तो रास्ते पर चल रहा हूं मैं. अब लोग चाहे जैसे समझें.

 

दिबांग- तो आप उसमें ये भी कहते हैं कि ये परिवार पर आरोप लग रहे हैं तो भी मैं कुछ नहीं कहूंगा, जांच चलने दीजिए परिवार पर. परिवार का तो सबको मालूम होता है.

 

अखिलेश यादव- मुझे कैसे पता होगा. कोई चीज कंपनी में है, किसी के बैलेंस सीट में है, कहीं जांच चली तो मुझे क्या जानकारी होगी. मेरे बारे में अगर जानना चाहे तो मैं बता सकता हूं. मैं अपने बारे में तो सच बता सकता हूं.

दिबांग- इसीलिए लोग कहते हैं कि आप बहुत मुलायम हैं.

 

सवाल- अखिलेश जी पिछले विधानसभा चुनाव में आप ने डीपी यादव को पार्टी में लेने से मना कर दिया था. कहा जाता है कि अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी का जो टेकऑफ था वो वहां था. आप बिहार में पप्पू यादव के साथ हैं. इसका को नया पॉलिटिकल एक्पेनेशन है या अखिलेश यादव का यू-टर्न.

 

अखिलेश यादव- ये फैसला कौन-कौन सा दल गठबंधन में जाएगा ये फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का फैसला होता है, पार्लियामेंट बोर्ड का फैसला होता है. वो लोकसभा चुनाव में जीते हैं, उनकी पत्नी जीती हैं, उनकी अपनी पार्टी है, पार्टी से मिलकर गठबंधन हुआ है. तो मैं समझता हूं कि एक सेकुलर फोर्स और सोशलिस्ट फोर्स का गठबंधंन हुआ है तो इसमें तो पार्टी का फैसला है और उसका समर्थन करना है.

 

सवाल- व्यक्तिगत तौर पर राजनीति में अपराधिकरण को किस नजरिये से आप देखते हैं?

अखिलेश यादव- जहां तक मेरा व्यक्तिगत है, मैं ये कह सकता हूं कि अपराधियों से हम भी दूर रहते हैं और राजनीति को भी दूर रहना चाहिए.

 

सवाल शेषनरायण- जिला लेवल पर, तहसील लेवल पर पार्टी के कार्यकर्ताओं का जो आतंक है, हर जगह इसकी वजह से जो गवर्नेंस का जो सर्वनाश हो रहा है. इसका क्या अफसरों के प्रति कुछ सहानुभूति आप दिखाएंगे?

 

अखिलेश यादव- स्वभाविक है, हर एक सरकार के साथ काम करने का, गवर्नेंस का ये भी है एक मामला. मैं समझता हूं कि अगर सड़क ना बनी तो गलत है बात है, सड़क बननी चाहिए, जहां तक ठेका लेना-देना इंजिनियरों का काम है, हम लोगों के स्तर तक वो बातें नहीं पहुंचती हैं. लेकिन जब कभी भी जानकारी मिलती है कि इस तरह की कोई बात है तो उसपर कार्रवाई करते हैं और काम भी होता है. जहां तक कार्यकर्ताओं के सवाल है तो कोशिश की है कि कार्यकर्ता अनुशासन में रहें और ये फासला कम से कम पार्टी में रहे कि कार्यकर्ता कौन है और ठेकेदार कौन है. उसपर तो कोशिश की है कि पार्टी स्तर पर और सरकार स्तर पर भी हम लोग काम कर रहे हैं. क्योंकि अगर ये बुराई दूर नहीं हुई तो जनता में हमें ही जवाब देना पड़ेगा.

 

दिबांग- इस पर आप ने कोई भी कार्रवाई की है किसी भी कार्यकर्ता के खिलाफ?

अखिलेश यादव- कई बार हुई है, कार्रवाई. मैं कई जगहों की बता सकता हूं जहां कार्रवाईयां हुई हैं.

 

सवाल– आजम साहब जब ये कहते हैं कि वो यूएन में मसला ले जाएंगे तो आप को नहीं लगता कि वो उत्तर प्रदेश की पुलिस और पूरे प्रशासनिक तंत्र पर अविश्वास करते हैं. सवाल खड़ा करते हैं?

 

अखिलेश यादव- देखिए जहां तक यूएन, मैंने आप से कहा कि बदांयू वाला जब मामला आया तो यूएन को किसने बताया. यहां सीधा पत्र मुख्यमंत्री को लिखा गया. मैं आप से सवाल पूछना चाहता हूं कि बदांयू का मामला गलत था. देश की कोई राजनीतिक पार्टी का नेता बताओ गया था या नहीं गया था. और मामला केवल मोहब्बत का था, लड़के और लड़की में केवल मोहब्बत थी.

 

और उसको किसने मारा वो सीवाई ने साफ किया है. क्या किसी ने मुझे पत्र लिख कर कहा कि मुख्यमंत्री जी मैंने आप की बहुत बदनामी करा दी. किसी ने कहा कि मुख्यमंत्री जी आप ठीक थे. अगर एक भी नेता ने कहा हो, आप तो मौत पर राजनीति करना चाहते हैं, आप हर चीज पर राजनीति करना चाहते हैं. क्या हमने राजनीति की किसी बात पर, क्या गाय पर राजनीति हम कर रहे हैं. हालांकि वो बात और शब्द नहीं करनी चाहिए इस चैनल पर.

 

अगर गाय के सबसे करीब हकदार कोई है तो हम हैं हकदार खुद. भई हम तो नहीं कहते कि ये गाय हमारी है, आज भी हमारे घर में देख लो गायें मिलेंगी. और जो चिल्ला-चिल्ला कर गाय को बचाने की बात कर रहे हैं बताओ एक के यहां भी गाय मिल जाए तो. आज भी हमारे यहां पहली रोटी गाय को खिलाई जाती है. उत्तर प्रदेश में कानून है कि अगर को गाय के साथ करेगा तो उसपर कार्रवाई होगी, एनएसए तक लगेगा. मुझे खुशी है कि रामदेव जी ने पढ़ा और उन्होंने तारीफ भी की इस बात की.

 

सवाल पंकज झा- अखिलेश जी एक सवाल ये था कि कई बार आप खुद बैठे रहे मंच पर और मंच से ही मुलायम सिंह यादव ने कहा कि आप के कई मंत्री ठेके-पट्टी में लगे हुए हैं. आप के विधायक एसी कमरों से बाहर नहीं जाते हैं. अब आप उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष माने या पिता माने, क्या आप उनकी राय से इत्तेफाक रखते हैं, सहमत हैं?

 

अखिलेश यादव- देखिए वो राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और पिता जी भी हैं. उनको हक है बताने का भी और नाराज होने का भी. ऐसे कम ही बेटे होंगे जो पिता से नहीं डांट खाए होंगे. और जो बेटे डांट नहीं खाते वो बिगड़ैल होते हैं.

 

दिबांग- पर अखिलेश जी ये जो बातचीत है जो मंच पर करते हैं आप के पिता जी वो तो घर में बैठ कर भी करते हैं, घर में तो कान भी खींच सकते हैं.

 

अखिलेश यादव- कम से कम कोई पार्टी ऐसी भी तो है जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष, पिता और पुत्र का व्यवहार सबको पता है. हम कोई छिप कर दूसरी बात नहीं करते. अब उन्हें लगता है कि कोई बात गलत है तो सामने मंच पर कहते हैं, कार्यकर्ताओं को कम से कम ये भरोसा तो है कि कम से कम कोई बात नेता जी से कह दी जाएगी, मुख्यमंत्री जी से कह दी जाएगी तो वो बात साफ होगी.

 

सवाल- इतने केस हो रहे हैं, रेप, इवटीसिंग, उसको लेकर आप की सरकार कहीं पर रोकने की कोशिश कर रही है.

अखिलेश यादव- स्वाभाविक है कि महिलाओं या लड़कियों के साथ इस तरह की घटनाएं हों वो नहीं होनी चाहिए. दुखद बात है लेकिन जहां तक सरकार के स्तर पर हमारी कोशिश हुई है कि हमारी पुलिस, प्रशासन, पार्टी कम से कम उनके अंदर ये हो कि अगर इस तरह की घटना हो तो उस पर तुरंत कार्रवाई हो. और इसीलिए सरकार बनने के बाद 1090 पावर वुमेनलाइन शुरू की थी, हमने उसमें कई लड़कियां अगर कोई परेशान कर रहा है किसी भी रूप में तो वो शिकायत कर सकती थीं.

 

और बिना उनकी पहचान बताए उनकी मदद करने का काम सरकार ने किया है. जहां तक कुछ घटनाएं अगर हो गई हैं तो उसपर कार्रवाई करते हैं तो वहीं कम से कम समाज के लोगों में भी बदलाव लाना भी जरूरी है. क्योंकि जो घटनाएं हो रही हैं और कई बार देखने को मिला है, कई बार देखने को मिला है कि परिचय होता है, एक-दूसरे को जानते हैं. कहीं कोई बात आ जाए तो उसका रूप बदल जाता है.

 

इसलिए हम समझते हैं कि समाज के स्तर पर भी काम होना जरूरी है. और अगर कहीं कोई जानकारी मिले तो सरकार को भी तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाकर न्याय दिलाने का काम भी सरकार को करना चाहिेए और उस पर काम कर रहे हैं हम.

 

दिबांग- आप ने कहा समाज में बदलाव की भी जरूरत है, इसपर आप कुछ कर रहे हैं क्या. राज्य सरकार एक्टिवली सोच कर कोई योजनाबद्ध काम कर रही है कि लोगों में ये जागरूकता आए, युवाओं में जागरूकता आए.

 

अखिलेश यादव- ऐसा कोई प्रोग्राम नहीं चल रहा है लेकिन जब कभी-कभी मौका मिलता है कार्यक्रमों के स्तर पर या हमसे व्यक्तिगत रूप से जब लोग मिलते हैं तो ये मैसेज देने की कोशिश होती है कि एक-दूसरे का सम्मान करने की बहुत आवश्यकता है.

 

दिबांग- इस कार्यक्रम के माध्यम से अगर हम कहें कि आप को इस पर कुछ सोचना चाहिए तो आप कुछ सोचेंगे.

अखिलेश यादव- बिलकुल विचार करूंगा, इसीलिए मैंने 1090 बनाई है और जब कभी भी महिला के साथ ऐसी घटना होती है तो महिला अधिकारी को जिम्मेदार बनाकर के इन्वेस्टिगेशन कराते हैं.

 

सवाल- पिछले साढ़े तीन साल ज्यादा चैलेंजिंग रहे जब आप ने बसपा से शासनकाल लिया, आप के मंत्री ज्यादातर आप से सीनियर थे, ब्यूरोकेसी से बहुत इंटरेक्शन नहीं था, वो ज्यादा चैलेंजिंग था या जो अगले ढेढ़ साल जब आप के ऊपर जिम्मेदारी है कि आप अपनी पार्टी को वापस सत्ता में लाएं.

 

अखिलेश यादव- मैं इस बात को लेकर खुश हूं कि जो मेनिफेस्टो लेकर जनता के बीच में गया था, उसको कम से कम मैंने पूरा किया है तो आने वाले समय में ये भरोसा और बढ़ा सकते हैं. मैं समझता हूं कि भरोसा बढ़ेगा तो समर्थन भी उनका समाजवादी पार्टी के पक्ष में आएगा.

 

दिबांग- एक जो आरोप आप पर, समाजवादी पार्टी पर लगता रहता है कि हर बार समाजवादी पार्टी की सरकार आती है तो ये आरोप लगता ही लगता है कि एबीपी न्यूज ने जब जांच करवाई तो पाया कि जितने भी थाने हैं, खासतौर पर मलाईदार थाने हैं, मलाईदार थानों में यादवों की भरमार है. यादव प्रमुख बहुत ज्यादा हैं. क्या ये बात सही है, क्या इसमें आप को मदद मिलती है प्रशासन में लोगों को बात समझाने में, अपना काम करवाने में, कहां तक सही है ये आरोप?

 

अखिलेश यादव- देखिए अपने स्वार्थ में लोग कहते हैं. मैं ये कहता हूं कि जिले का कप्तान और जिले का डीएम बड़ी चीज है या एसओ और सिपाही बड़ी चीज है. कप्तान कहां हैं, डीएम कहां हैं, कौन है डीएम? अगर एकआध जगह कोई है भी तो विपक्ष के लोग तो जरूर जानबूझ कर ये कहेंगे, हम तो किसी पर आरोप नहीं लगाते हैं. हम तो कभी आरोप नहीं लगाते इस बात पर. मलाईदार की परिभाषा क्या होगी, अगर वो नीचे के कर्मचारी पर मलाईदार डेफिनेशन हो सकती है. तो मलाईदार बड़े सीट पर भी हो सकती है. तमाम राजनीतिक दल ये बहस बेवजह उठाते हैं. जो जिम्मेदार है, जो काम कर रहा है, उसका आंकलन काम से होना चाहिए. मलाईदार है या किस जाति या धर्म का है इस पर बहस नहीं होना चाहिए. काम कितना अच्छा किया है, सवाल ये होना चाहिए?

 

रशीद किदवई- अखिलेश जी 2017 के जो चुनाव हैं उसमे आप किसको अपना बड़ा चैलेंज मानते हैं, असद्दुदीन ओवैसी को या राहुल गांधी को?

 

अखिलेश यादव- देखिए जहां तक उत्तर प्रदेश का सवाल है, मैं समझता हूं कि अपना काम लेकर जाएंगे तो जनता अपना समर्थन दोबारा समाजवादी पार्टी को देगी.

 

सवाल- सांप्रदायिक हिंसा के आंकड़े जो पेश किए गए उसका इंडिया स्पेंड संस्था ने विश्लेषण किया है. उसमें कहा गया है कि 2010 से 2014 तक प्रदेश में जो सर्वाधिक मजहबी हिंसा कि घटनाएं हुई हैं यूपी में हुई हैं, कुल 703 घटनाएं हुई हैं उसमें 176 लोग मारे गए हैं, 50 हजार लोग बेघर हुए हैं और इन मौतों में 59 वो मौतें भी शामिल है जो मुज्जफर नगर दंगों में हुई. एक तो इनकी वजह क्या रही और यूपी सरकार रोकने में नाकाम क्यों रही?

 

अखिलेश यादव- मैं जहां तक यूपी की बात है तो मैंने कोशिश की है कि इस तरह के मामले न बढ़ें. कभी-कभी आरोप लगता है समाजवादियों पर लेकिन अगर दंगा होगा तो सबसे ज्यादा नुकसान समाजवादी पार्टी का होगा. मैं ये कह सकता हूं कि दंगे से लाभ किसको मिलेगा? दंगे से नुकसान समाजवादियों का होगा. इसमें वो ताकतें हैं जिन्हें दंगे से लाभ होगा तो ऐसी ताकतें काम कर रही हैं तो इसीलिए मैंने कहा ये वो ताकतें है जो हर 6 महीने में अपना मुद्दा बदल देती हैं.

 

दिबांग- आप को नहीं लगता कि जब दंगा भड़कता है तो आप को भी एक फायदा होता है, आप मुस्लिम को पोलराइज करते हैं और आप उन्हें पूरी तरह अपनी तरफ कर लेते हैं. उनको इधर-उधर नहीं जाने देते, चाहे वो बीएसपी हो या कांग्रेस हो.

 

अखिलेश यादव- लोग दंगें से लाभ उठाना चाहते हैं. आज कम्यूनल होना आसान हैं, सेकुलर होना कठीन है. जो ये ताकतें हैं वो देश के लिए खतरा हैं, सिर्फ प्रदेश के लिए नहीं. दुनिया हमें किस रूप में देखेगी. हम क्या खाना खाते हैं, हम क्या कपड़े पहनते हैं, हमारी भाषा क्या है. अगर दुनिया तरक्की की है तो इन सब चीजों से हटकर के बड़े लेवल दिल से चीजों को अपनाया है. हमें एक-दूसरे का सम्मान करना पड़ेगा. हमारी जो संस्कृति है, जो परंपरा है, हमने अपने पड़ोसी का भी सम्मान किया है.

 

दिबांग- इसका आप सीधा जवाब नहीं दे रहे हैं, क्या आप मुस्लिम को एक तरीके से एक?

अखिलेश यादव- देखिए समाजवादी पार्टी सेकुलर पार्टी है, सेकुलर समझ के लोगों की एक बड़ी पार्टी है. मैंने आप से कहा कि कम्यूनल होना आसान है, सेकुलर होना मुश्किल है. हमारा रास्ता सेकुलर रास्ता है.

 

दिबांग- तो इसमें आप ऐसी पहल क्यों नहीं करते कि आप उनको बुआ कहते हैं, बुआ की पार्टी की हालत भी खराब है, उनके साथ मिलकर अगला जो बड़ा चुनाव होने वाला है.

 

अखिलेश यादव- इसका फैसला मैं अकेले नहीं ले सकता. बुआ तो इसलिए बोलता हूं कि सबसे बुजुर्ग हैं, हमारे जितने लोग उनको बहन जी बोलते हैं तो मुझे स्वभाविक है कि मुझे बुआ ही बोलना पड़ेगा. अब ये फैसला हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जी लेंगे. हमारे विचारों में कोई तालमेल नहीं है, क्योंकि प्रदेश की जनता ने देखा था कि कैसे पैसे की बर्बादी हुई. कई ऐसे स्मारक बना दिए जिसमें हाथी बने हुए हैं, जब से लगे हैं खड़े के खड़े हैं और जो बैठा है वो बैठा ही है.

 

अभी बैठा वाला खड़ा नहीं हो पाया और खड़ा वाला बैठ नहीं पाया. हजारों करोड़ रूपया बर्बाद कर दिया, वो जमाना देखा था लोगों ने. इन्वेस्टमेंट कैसे आता, इसके लिए कोई पॉलिसी बनाई हो. इसीलिए मैं कह रहा हूं कि जनता को मौका मिलेगा तुलना करने का. एक वो सरकार जिसको हटाया है, एक वो जो केंद्र सरकार का क्योंकि अच्छे दिन का मामला था, किसी कंपनी ने नारा दिया था, किसी पॉलिटिकल पार्टी का नारा नहीं था, कंपनी बदल गई, नारा बदल गया. इसलिए जनता देखिगी. तो तीनों पार्टियों में किसने जनता के लिए काम किया.

 

दिबांग- प्रधानमंत्री जी कहते हैं अपने संसदीय क्षेत्र में कि मैं कोशिश करता हूं लेकिन राज्य सरकार हमें जमीन नहीं देती है, जमीन बड़ी मंहगी है और शहर.

 

अखिलेश यादव- मैं आज भी कहता हूं कि प्रधानमंत्री जी को जो जगह चाहिए हो विकास के लिए मैं तैयार हूं. जो मंत्री जिस विभाग का और मेरे पास अगर आया है तो मैंने उससे कहा है कि जो जगह चाहिए मदद के लिए मैं सहयोग करने के लिए तैयार हूं. पाले में हमारे नहीं है कुछ भी, पाले में उनके है.

 

शीला रावल- आप के राज्य में कभी दुर्गाशक्ति होता है, कभी अमिताभ ठाकुर होता है. जब ब्यूरोक्रेट्स और शासन के बीच में टकराव होते हैं तो ओवरऑल एक परसेप्शन बनता है कि इंप्रेशन खराब होती है. आप को नहीं लगता कि ऐसी घटनाएं अप्रिय है, ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए.

 

अखिलेश यादव- देखिए मैंने अभी प्रशासन की जो लास्ट मीटिंग हुई थी, मैंने उनसे कहा कि देखिए ऐसी सरकार कभी नहीं आएगी जिसने पूरी आजादी आप को दी हो. और अगर आज परफॉर्म नहीं कर पाओगे तो कभी नहीं कर पाओगे. एकआध जो मामले आए हैं दुर्गाशक्ति नागपाल के तरह के कुछ. कभी लोग कहते हैं कि आप सख्त नहीं हैं और सख्त हो जाओ तो आप कार्रवाई क्यों करते हो? कोई भी नोएडा नहीं जा सकता पहली पोस्टिंग में. अगर पति और पत्नी दोनों को साथ रहने के लिए अगर मैंने दिल्ली के किनारे भेज दिया हो तो ये गलती मेरी है.

 

अब तो हमारे प्रदेश में भी नहीं हैं, प्रदेश से बाहर चली गईं. मैंने इसीलिए कहा कि अधिकारियों को जितना मौका दे सकता हूं, हम लोगों ने मौका दिया है, बिना दबाव के मौका दिया है. और कहा है कि आप परफॉर्म करिए. और मुझे खुशी है कि कुछ अधिकारियों ने बहुत अच्छा काम किया है. ये जमाना मार्केटिंग और ब्राडिंग का है, काम में हम लोग ज्यादा हैं लेकिन प्रचार में हम लोग पीछे हैं.

 

सवाल- इसी चैनल पर ओवैसी ने आरोप लगाया है कि वो लगातार उत्तर प्रदेश आना चाहते हैं लेकिन आप आने नहीं दे रहे हैं, उनकी रैलियों को परमीशन नहीं दे रहे हैं. और उन्होंने ललकारा है कि आने वाले चुनाव में मैं वहां चुनाव लडू़ंगा और देखता हूं कि ये सरकार मुझे कैसे रोकेगी. इसकी सच्चाई क्या है?

 

अखिलेश यादव- यूपी में कोई सदभावना के लिए, प्यार, मोहब्बत के लिए हमने नहीं रोका किसी को. किसी का दुख बांटने आए तो नहीं रोकना चाहते हम. ये प्रशासन का काम है, मेरा काम नहीं है. प्रशासन को डीसिजन लेना है, एडमिनिस्ट्रेशन को फैसला लेना है ये सरकार फैसला नहीं लेती है. यूपी का चुनाव होने जा रहा है, जिसको आना है सब आईए, जिसको आना है सब आएंगे. कोई किसी को नहीं रोक पाएगा. ये अलग बात है कुछ लोग लगता है बिहार में बैन हो गए हैं, कुछ कार्रवाई हुई है सुनने में आया है. ये बात है कि हम यूपी में किसी को नहीं रोक रहे हैं, जो आना चाहे आएगा. और लोकतंत्र में सबको मौका मिलना चाहिए.

 

पंकज झा- नेता जी ने कहा कि आडवानी कभी झूठ नहीं बोलते हैं, तो एकबार मोदी जी ने उनकी तारीफ की तो यहीं पार्टी ऑफिस में कहा कि मेरी तारीफ पीएम मोदी ने की तो बहुत बड़ी बात हुई. आप कहते हैं कि सावधान रहना चाहिए और बचे रहो, मतलब माजरा क्या है?

 

अखिलेश यादव- ये मेरा पर्सनल जवाब है, क्योंकि राजनीति करने वाली बात है कि अगर कोई विरोधी पार्टी का आपकी तारीफ करे तो बहुत सावधान रहना चाहिए. बस इतना ही मैंने कहा मैंने किसी की बुराई नहीं की. किसी को गलत नहीं कहा.

 

दिबांग- सावधान रहना चाहिए तो इससे आप का क्या मतलब है कि वो सार्वजनिक रूप से हो सकता है कि वो बड़ाई कर रहा हो, पीछे-पीछे कुछ और भी हो सकता है?

 

अखिलेश यादव- राजनीति है ये. सत्ता के लिए गाय हमारी छीन ली. गाय हमारी होनी चाहिए. यूपी में डेरी कितने बड़े पैमाने पर हैं, उन्हें पता ही नहीं है. उन्हीं का अमूल का मैनेजिंग डायरेक्टर कह रहा है कि गुजरात से आकर दूध हो गया यूपी का. तो बिना जानवर के इतना दूध कैसे हो जाएगा. अमूल के दो कारखाने लग रहे हैं यूपी में. कारोबार की बात है ये कन्फ्यूज कर रहे हैं एक स्लॉटर हाउस है जो कारोबार के लिए है, ये हमने नहीं खुलवाए, आजादी से पहले के खुले हुए हैं. अंग्रेजों ने बनवाए थे. आज टेन्नरी अगर यूपी में है और एक्सपोर्ट शूज का आगरा से है. 10 हजार करोड़ का एक्सपोर्ट है शूज का आगरा से. कानपूर में बड़े पैमाने पर टेन्नरी का एक्सपोर्ट है. आप कहते हो मेक इन इंडिया, आप मेक इन इंडिया कैसे करोगे. क्या आप इटली के लैदर से मुकाबला कर लोगे, क्या चेन्नई में जो लैदर बन रहा है उससे मुकाबला कर लेगें ये. आप अपनी बात को नहीं समझा रहे हैं, आप कारोबार को, धर्म को किस दिशा में ले जा रहे हो आप.

 

सवाल नं.1 – आप बेहतर प्रधानमंत्री किसको मानते हैं, नरेंद्र मोदी को या मनमोहन सिंह को?

जवाब अखिलेश यादव- मनमोहन सिंह

 

सवाल नं 2- आप को ज्यादा तंग कौन करते हैं. शिवपाल जी या आजम खान जी?

जवाब अखिलेश यादव- कोई नहीं.

 

सवाल नं 3- आप किसके ज्यादा करीब हैं. मुलायम सिंह जी के या रामगोपाल जी के?

जवाब अखिलेश यादव- दोनों के

दिबांग- दोनों में से आप को एक चुनना है. ज्यादा करीब आप किसको पाते हैं?

अखिलेश यादव- नेता जी के.

 

सवाल नं 4- आप अपना बड़ा विरोधी किसको मानते हैं. बीजेपी को या बीएसपी को?

जवाब अखिलेश यादव- बीजेपी को

 

सवाल नं 5- आप 10 साल बाद खुद को कहां देखते हैं. यूपी का सफल मुख्यमंत्री या देश का प्रधानमंत्री

जवाब अखिलेश यादव- मुख्यमंत्री वाला

 

दिबांग- तो यूपी में ही रहना चाहते हैं या यूपी से बाहर जाना चाहते हैं.

अखिलेश- यूपी में ही रहना चाहते हैं. लोग यूपी आते हैं प्रधानमंत्री बनने के लिए मैं यूपी क्यों छोडू़गा?

दिबांग- आप अगर यूपी में ही हैं तो आप पीएम बनने का रास्ता क्यों नहीं ढूढ़ते?

अखिलेश यादव- तो फिर दोनों ही मान लीजिए फिर

दिबांग– दोनों में से एक चुनना है

अखिलेश यादव– यूपी

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Web Title: akhilesh yadav reply on press conference
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