'दिल्ली में गिरफ्तार हुए Al Qaeda के आतंकी को कट्टर बनाने का काम लंदन में शुरू हुआ'

'दिल्ली में गिरफ्तार हुए Al Qaeda के आतंकी को कट्टर बनाने का काम लंदन में शुरू हुआ'

By: | Updated: 19 Sep 2017 08:44 AM

नयी दिल्ली: अलकायदा के साथ कथित तौर संबंधों को लेकर गिरफ्तार समीउन रहमान को कट्टर बनाने की प्रक्रिया लंदन में एक जेल में हुयी जहां पर उसे लापरवाही से गाड़ी चलाने के आरोप में बंद किया गया था. जांच करने वाले अधिकारियों ने यह बात बताई. बांग्लादेशी मूल के ब्रिटिश नागरिक रहमान उर्फ राजू भाई को कल दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने विकास मार्ग, शकरपुर (आईटीओ के नजदीक) गिरफ्तार किया.


रहमान अत्याधुनिक हथियार के इस्तेमाल में ट्रेन्ड है और सीरिया में अलकायदा से जुड़े संगठन जबहत अल नुसरा की ओर से सीरियाई सुरक्षाबलों के खिलाफ लड़ा था. एक अधिकारी ने बताया, ‘‘जब वे वहां करीब आठ महीने रहा उस समय वे कुछ लोगों के संपर्क में आया और उसके दिमाग को भरने का काम शुरू हो गया.’’


बीते सोमवार को दिल्ली के शकरपुर से हुई थी गिरफ्तारी


दिल्ली पुलिस ने बीते सोमवारो को अलक़ायदा के एक आतंकवादी को गिरफ़्तार किया है. शुमोन हक़ नाम का ये आतंकी रोहिंग्या मुसलमानों को ट्रेनिंग देने के मक़सद से आया था. शुमोन हक़ ब्रिटिश नागरिक है और मूल रूप से बांग्लादेश का रहने वाला है.


सीरिया में लड़ चुके शुमोन हक़ को भारत में रोहिंग्या मुसलमानों को आतंक की ट्रेनिंग देने का जिम्मा दिया गया था. इस काम के लिए शुमोन मिज़ोरम और मणिपुर में बेस बनाना चाह रहा था. अपनी साजिश में कामयाब होने से पहले ही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इससे शकरपुर इलाके से गिरफ्तार कर लिया.


पुलिस के मुताबिक पहले तो इसने अपने आप को बिहार के किशनगंज का रहने वाला बताया लेकिन पुलिस की सख्ती पर इसने सब कुछ कबूल कर लिया. पुलिस ने गिरफ्तार आतंकी के पास से एक पिस्टल, 4 कारतूस, लैपटॉप और विदेशी करेंसी बरामद की है. पुलिस के मुताबिक इसके लैपटॉप से उन्हें कई महत्वपूर्ण जानकारी मिली है.


पुलिस के मुताबिक शमी उर रहमान 2013 में साउथ अफ्रीका गया था जहां इसने अल कायदा मगरीब को जॉइन किया. इसके बाद 2013- 14 में वह सीरिया चला गया. सीरिया में उसने आतंक की ट्रेनिंग ली. इसके बाद फिर अलनुसरा फ्रंट जॉइन किया और अल कायदा के लिए लड़ा.


पुलिस ने बताया कि ये बांग्लादेश भी गया जहां इसकी गिरफ्तारी हो गयी. बांग्लादेश में जेल से छूटने के बाद इसने अल कायदा लीडर्स के कहने पर हिंदुस्तान का रुख किया. भारत में रहकर म्यांमार सेना से लड़ने के लिए बेस बनाने लगा.

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