सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष लीला सैमसन के समर्थन में सभी नौ सदस्यों का इस्तीफा

By: | Last Updated: Saturday, 17 January 2015 4:29 AM
All 9 members of the Censor Board resign in support of Censor Board chief Leela Samson

नई दिल्ली: सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष लीला सैमसन के समर्थन में सेंसर बोर्ड के सभी सद्स्यों ने इस्तीफा दे दिया है. लीला के समर्थन में एक ही चिट्ठी पर नौ सदस्यों ने दस्तखत किये हैं और सूचना प्रसारण मंत्रालय को भेजा है.

 

एबीपी न्यूज़ से बातचीत में इरा भास्कर ने बताया, ‘हम दो साल से इस मुद्दे को उठा रहे थे. लीला सैमसन कोशिश कर रही थीं कि वे कुछ बदलाव ला सकें. हम उनकी बात से सहमति रखते हैं इसलिए इस्तीफा दे दिया.’

 

सूचना प्रसारण मंत्रालय की दखलअंदाजी पर इरा भास्कर ने कहा, ‘दखलअंदाजी की जगह ये कहूंगी कि हमें नजरअंदाज किया जा रहा है. हमें पूरा साइड में रखकर अपने आप ही मिनिस्ट्री चलाई  जा रही है. फिर तो यही बात हो गई कि वे अकेले ही मिनिस्ट्री चलाएं.’

 

सरकारी हस्तक्षेप के मसले पर सेंसर बोर्ड के दो सदस्यों एम के रैना और अंजुम राजाबली करीब एक महीने पहले इस्तीफा दे चुके हैं. अध्यक्ष के अलावा कुल 23 सदस्य थे, जिसमें 11 इस्तीफा दे चुके हैं.

 

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सेंसर बोर्ड के जिन सदस्यों ने इस्तीफा भेजा है उनमें केसी शेखर बाबू, कांग्रेस कार्यसमिति में सचिव पंकज शर्मा, शाजी करुण, ममंग दई, ईरा भास्कर, टीवी पत्रकार राजीव मसंद, शुभ्रा गुप्ता, फिल्म ऐक्ट्रेस अरुंधती नाग, एम के रैना, निखिल अल्वा और लोरा के प्रभु शामिल हैं.
 

लीला ने उन कयासों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया है कि एफसीएटी द्वारा डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम की फिल्म ‘एमएसजी-द मैसेंजर ऑफ गॉड’ को हरी झंडी देने की वजह से उन्होंने इस्तीफा दिया. एफसीएटी ने सेंसर बोर्ड के आदेश पर असंतुष्ट आवेदन के मामले पर सुनवाई की थी.

 

लीला सैमसन ने इस्तीफे के लिए जो कारण बताया है उसमें सबसे बड़ा आरोप है कि उनके काम में दखल दिया जा रहा था. उन्होंने ये नहीं बताया है कि दखल कौन दे रहा था. हालांकि उन्होंने इशारा किया है मंत्रालय की ओर से बोर्ड में नियुक्त अफसरों पर किया है. लीला ने सेंसर बोर्ड में भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया है. गंभीर आरोप ये भी है कि जिस फिल्म ने एमएसजी को क्लियर किया है उसकी पिछले 9 महीने से बैठक नहीं हुई और इसके लिए मंत्रालय ने ये दलील दी है कि बैठक के लिए पैसे नहीं हैं. बोर्ड अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो चुका है लेकिन नई सरकार ने नया बोर्ड नहीं बनाया.

 

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