बजट सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक आज

By: | Last Updated: Sunday, 22 February 2015 2:21 AM

नई दिल्ली: सरकार संसद के बजट सत्र के दौरान दोनों सदनों में विचार किए जाने वाले वित्तीय, विधायी और अन्य कामकाज पर विभिन्न दलों के नेताओं के साथ आज चर्चा करेगी. संसदीय कार्य मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने रविवार को बजट सत्र से पहले आपसी परामर्श के लिए दोनों सदनों में दलों के नेताओं के साथ बैठक आयोजित की है.

 

संसद का बजट सत्र सोमवार से शुरू होगा और आठ मई को संपन्न होगा, बशर्ते कि सरकारी कामकाज की कोई अन्य तात्कालिक आवश्यकता न हो. बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है. पहला चरण 23 फरवरी से शुरू होकर 20 मार्च, 2015 तक चलेगा और दूसरा चरण 20 अप्रैल से शुरू होकर आठ मई, 2015 तक चलेगा. पहले चरण में 20 कार्यदिवस और दूसरे चरण में 13 कार्यदिवस होंगे.

 

दोनों चरणों के बीच के उन दिनों में जब संसद की बैठक नहीं होगी, स्थायी समितियां विभिन्न विभागों और मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर विस्तृत जांच करेंगी.  संसद के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण के साथ बजट सत्र प्रारंभ होगा. बजट सत्र के प्रस्तावित 44 विषयों की सरकारी कार्यसूची में वित्तीय, विधायी और गैर-विधायी विषय शामिल हैं.

 

वित्तीय कामकाज (11 विषयों) में 2015-16 के आम और रेल बजट को प्रस्तुत किया जाना और उन पर चर्चा, 2015-16 के रेल और आम बजट दोनों के लिए अनुदान मांगों पर चर्चा और मत विभाजन, 2014-15 के लिए पूरक अनुदान मांगों और यदि 2013-14 के लिए कोई अतिरिक्त मांग हो तो संबंधित विषय शामिल हैं.

 

सरकार का 26 फरवरी को रेल बजट, 27 फरवरी को आर्थिक सर्वेक्षण और 28 फरवरी, 2015 को आम बजट पेश करने का प्रस्ताव है. विधायी कार्यसूची में दोनों सदनों में सात नए विधेयक पेश करना, उन पर विचार करना और उन्हें पारित कराना शामिल है.  इन विधेयकों में वित्त विधेयक 2015, छह अध्यादेशों के स्थान पर विधेयक, लोकसभा में लंबित तीन और राज्यसभा में लंबित सात विधेयकों पर विचार करना और उन्हें पारित कराना तथा दस नए विधेयक पेश करना शामिल है. 

 

लोकसभा में लंबित विधेयकों में शामिल हैं- वस्तु एवं सेवा कर लागू करने से संबंधित संविधान (122वां संशोधन) विधेयक 2014, लोकपाल और लोकायुक्त और अन्य संबंधित कानून (संशोधन) विधेयक 2014 तथा निरस्त करना और संशोधन करना विधेयक 2014. लोकसभा द्वारा इन्हें पारित करने के बाद इन पर राज्यसभा द्वारा विचार किया जाना आवश्यक है. राज्यसभा में लंबित चार विधेयक पहले ही लोकसभा ने पारित कर दिए हैं.

 

ये हैं- कंपनी (संशोधन) विधेयक 2014, सार्वजनिक भवन (अनधिकृत रूप से रह रहे लोगों की बेदखली) संशोधन विधेयक 2014, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (संशोधन) विधेयक 2014, निरस्त करना और संशोधन (दूसरा) करना विधेयक 2014 तथा भुगतान और निपटान प्रणालियां (संशोधन) विधेयक 2014.  अन्य लंबित विधेयक हैं- भ्रष्टाचार निरोधक (संशोधन) विधेयक 2013 और संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश (संशोधन) विधेयक 2014.

 

पेश किए जाने वाले नए विधेयकों में शामिल हैं- राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, भंडारण निगम, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन, मध्यस्थता और सुलह-सफाई, विनियोजन अधिनियमों के निरस्त करने, जन्म और मृत्यु पंजीकरण, व्हिसल ब्लोअर संरक्षण, भारतीय प्रबंधन संस्थानों, राष्ट्रीय शैक्षणिक कोष और अनुसूचित जातियों की पहचान से संबंधित विधेयक. गैर-विधायी कामकाज में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और रेलवे संविद समिति के गठन पर चर्चा शामिल है.

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