खास रिपोर्ट: क्या है व्यापम भर्ती घोटाला?

By: | Last Updated: Saturday, 21 June 2014 6:17 AM
All you want to know about Vyapam Scam

नई दिल्ली: व्यापम भर्ती घोटाला यानी मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा भर्ती घोटाला. इस घोटाले में कई बड़े नाम सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं. 100 से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी कोशिश में जुटी है एसटीएफ. खुद हाईकोर्ट इस मामले की जांच पुलिस की स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम से करवा रही है और हर खुलासा चौंका रहा है.

 

  • सरकारी नौकरी में 1000 फर्जी भर्तियां

  • मेडिकल कॉलेज में 514 फर्जी भर्तियों का शक

  • भर्ती घोटाले में पूर्व मंत्री गिरफ्तार

  • पूर्व मंत्री के ओएसडी भी गिरफ्तार

  • मुख्यमंत्री का पूर्व ओएसडी जांच के घेरे में

  • 100 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया गया

 

कितना बड़ा है मध्य प्रदेश का भर्ती घोटाला. अंदाजा लगाइए महज 11 महीने में एसटीएफ ने 100 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया है और जांच जारी है. मंत्री से लेकर अधिकारियों तक, प्रिंसिपल, छात्र और दलाल–एक के बाद एक गिरफ्तारियां हो रही हैं लेकिन ये एक ऐसा नेटवर्क जिसका ओर-छोर अब भी नहीं मिल पा रहा है. ये मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा घोटाला साबित हो सकता है. आखिर कौन है इस भर्ती घोटाले का मास्टरमाइंड और कैसे हुआ भर्तियों का फर्जीवाड़ा?

 

16 जून को मध्य प्रदेश के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया. लक्ष्मीकांत शर्मा बतौर उच्च शिक्षा मंत्री मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल के भी मुखिया थे और आरोप ये था कि उनके ही आशीर्वाद से मध्य प्रदेश में बरसों से फर्जी भर्तियों का धंधा चल रहा है.

लक्ष्मीकांत शर्मा की गिरफ्तारी तो सिर्फ शिक्षकों की भर्ती के मामले में हुई है और बाकी मामलों की जांच चल रही है. लेकिन भर्ती घोटाला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है. भर्ती घोटाले के दो अहम हिस्से हैं.

 

  1. मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले का फर्जीवाड़ा

  2. सरकारी नौकरियों में भर्ती का फर्जीवाड़ा

 

अब तक मिली जानकारी में मुताबिक मेडिकल कॉलेजों में ही भर्ती के 514 मामले शक के घेरे में हैं. वहीं सरकारी नौकरियों में 1000 भर्ती की बात खुद शिवराज सिंह चौहान विधानसभा में मान चुके हैं. 2008 से 2010 के बीच सरकारी नौकरियों के 10 इम्तिहानों में धांधली का भी आरोप है.

 

मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों के एडमिशन का सीधा जिम्मा उच्च शिक्षा मंत्रालय के पास था लेकिन सरकारी नौकरियों में भर्ती की परीक्षाएं भी इसी विभाग के जरिए करवाई जाती थीं. ऐसे में पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा की भूमिका पर उठ रहे हैं सवाल. आरोप ये भी है कि लक्ष्मीकांत शर्मा ने अपने रसूख का इस्तेमाल करके दूसरी भर्तियों में भी दखल देते थे.

 

तो क्या सब कुछ लक्ष्मीकांत शर्मा के इशारे पर ही हो रहा था? इसका जवाब पाने के लिए हमें जरा पीछे चलना होगा. भर्ती घोटाले का पर्दा करीब साल भर पहले उठा था जब 7 जुलाई, 2013 को मध्य प्रदेश के इंदौर में पीएमटी की प्रवेश परीक्षा में कुछ छात्र फर्जी नाम पर परीक्षा देते पकड़े गए. इनसे पूछताछ में सामने आया डॉ जगदीश सागर का नाम.

 

छापेमारी के दौरान तस्वीरों में दिख रहा यही शख्स है डॉक्टर जगदीश सागर. ग्वालियर के रहने वाले जगदीश सागर ने पत्नी का मंगलसूत्र बेचकर डॉक्टरी की पढ़ाई की थी. 12 वीं में ही शादी करने लेने वाले जगदीश ने देखते ही देखते जो साम्राज्य खड़ा किया उसके पीछे मेडिकल इंट्रेस में फर्जीवाड़े का बड़ा हाथ था. जगदीश सागर के घर पर छापेमारी में गद्दों के भीतर 13 लाख की नगदी मिली. इतना ही नहीं 20 प्रॉपर्टी और करीब 4 किलो सोने के गहने भी मिले. ये बड़ी मछली थी.

 

जगदीश सागर से पूछताछ में हुआ भर्ती घोटाले का पहला बड़ा खुलासा जिसके मुताबिक-

  1. परिवहन विभाग में कंडक्टर पद के लिए 5 से 7 लाख

  2. फूड इंस्पेक्टर के लिए 25 से 30 लाख

  3. और सब इंसपेक्टर की भर्ती के लिए 15 से 22 लाख रुपये लेकर फर्जी तरीके से नौकरियां बांटी जा रही थीं

 

पहले शिकार बने और अब गिरफ्तार हो रहे हैं ऐसे छात्र और नौकरी पाने की ख्वाहिश रखने वाले आम लोग. शिवराज सिंह चौहान के चहेते मंत्री और आरएसएस के करीबी लक्ष्मीकांत शर्मा तक पहुंचने में जगदीश सागर की ये गवाही ने अहम साबित हुई.

 

जगदीश सागर से पूछताछ के बाद एसटीएफ की जांच को पर लग गए और खुलासा हुआ एक ऐसे रैकेट का जिसमें मंत्री से लेकर अधिकारी और दलालों का नेटवर्क काम कर रहा था. पता चला कि मध्य प्रदेश का व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापम का दफ्तर इस धंधे का अहम अड्डा है.

 

खुलासा हुआ है कि व्यापम के परीक्षा विभाग के कंप्यूटर पर जो रोलनंबर मिले थे वो खुद लक्ष्मीकांत शर्मा ने ही भेजे थे– ये सब कुछ एक नेटवर्क के जरिए हो रहा था.

 

कैसे तैयार हुआ नेटवर्क?

लक्ष्मीकांत शर्मा से पहले इस मामले में गिरफ्तार हो चुके इन अहम चेहरों को पहचान लीजिए – ये है पंकज त्रिवेदी, व्यासायिक परीक्षा मंडल के नियंत्रक, ये दूसरा चेहरा है नितिन महिंद्रा का व्यापम के परीक्षा विभाग के सिस्टम एनालिस्ट यानी ऑनलाइन विभाग के सर्वेसर्वा, ये तीसरा चेहरा है पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत के ओएसडी ओ पी शुक्ला का . चौथा अहम चेहरा है लक्ष्मीकांत शर्मा के करीबी खनन कारोबारी सुधीर शर्मा का जो अब तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं.

 

व्यापम में भर्ती घोटाले का नेटवर्क

मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा मंत्री बनते ही व्यासायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापम लक्ष्मीकांत शर्मा के पास आ गया.  लक्ष्मीकांत शर्मा ने ओ पी शुक्ला को अपना ओएसडी तैनात किया जबकि उनके खिलाफ लोकायुक्त में भ्रष्टाटचार की शिकायत दर्ज थी. खनन मंत्री रहते हुए जिस सुधीर शर्मा को लक्ष्मीकांत शर्मा ने अपना ओएसडी बनाया था वो सक्रिय हो गए.  सुधीर शर्मा के कहने पर उच्च शिक्षा विभाग में तैनात पंकज त्रिवेदी को व्यापम का कंट्रोलर बना दिया गया. पंकज त्रिवेदी ने अपने करीबी नितिन महिंद्रा को व्यापम के ऑनलाइन विभाग का हेड यानी सिस्टम एनालिस्ट बनाया.

 

इस तरह बना फर्जीवाड़े का सबसे अहम नेटवर्क जिसमें कई स्तरों पर और भी चेहरे शामिल थे.

 

व्यापम के नेटवर्क का गोरखधंधा

अब तक हुई जांच में जो खुलासे हुए हैं उसके मुताबिक पंकज सीधे लक्ष्मीकांत शर्मा के बंगले पर आता जाता था और वहां से उसे फर्जीवाड़े के कैंडीडेट की लिस्ट और रोल नंबर मिलते थे.

 

पूर्व मंत्री ओ पी शुक्ला के ओएसडी भी पंकज त्रिवेदी के संपर्क में रहते थे और बाद में उन्हें भर्ती घोटाले के पैसों के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था.

 

इन दोनों के कहने के मुताबिक पंकज त्रिवेदी फर्जी भर्ती के लिए कैंडीडेट के नाम और रोलनंबर नितिन महिंद्रा को सौंप देता था. नितिन ने ही पूछताछ में खुलासा किया था कि उसके कंप्यूटर मिले संदिग्ध रोल नंबर उसे मंत्री के जरिए मिले थे.

 

जाहिर है व्यापम के आला अधिकारी और मंत्री तक इस घोटाले में शामिल थे. लेकिन आखिर गड़बड़ होती कैसे थी. आरोप है कि इसके लिए सबसे पहले कदम खुद पंकज त्रिवेदी की ओर से उठाए गए थे. छात्रों की पहचान के लिए थंब इंप्रेशन मशीन और ऑनलाइन फॉर्म की व्यवस्था ही खत्म कर दी गई थी. 

 

  • अब तक इस मामले में गिरफ्तार हुए छात्रों से हुई पूछताछ के मुताबिक ये धंधा इम्तिहान से लेकर नतीजों में हेरफेर के जरिए चल रहा था.

  • कैंडीडेट को फर्जी परीक्षार्थी के करीब बिठाया जाता था ताकि वो नकल कर सके

  • कैंडीडेट की जगह फर्जी छात्र बिठा दिए जाते थे

  • कैंडीडेट आंसरशीट खाली छोड़ देता था जिसे बाद में भरा जाता था

  • रिजल्ट के अंकों को बाद में बढ़ा दिया जाता था

 

फर्जीवाडा करने वाले फॉर्म पर छात्र की धुंधली फोटो लगवाते तो कभी छात्रों की जगह डॉक्टरों से पर्चे दिलवाए जाते. कॉलेजों के प्रिंसिपल और दलाल भी इस खेल में शामिल थे. कई पुलिस अधिकारी, आईएएस और उनके रिश्तेदारों के नाम भी सामने आ रहे हैं. शिवराज सिंह की सरकार लगातार दबाव में हैं – सवाल ये है कि आखिर ये मामला अब तक छिपा रहा तो क्यों?

 

माना जा रहा है कि जल्द ही आरोपियों की तादाद 100 से बढ़कर 400 तक पहुंच सकती है. सीबीआई जांच की बात शिवराज सरकार नहीं मान रही है. हाईकोर्ट ने खुद ही एसटीएफ को जांच में लगाया है और देरी के लिए फटकार भी लगा चुकी है. उम्मीद की जा सकती है कि जल्द ही इस बड़े घोटाले के कुछ और बड़े खिलाड़ियों के चेहरे से नकाब उठ जाएगा.

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