ध्वनि प्रदूषण से मुक्ति का अधिकार मौलिक: हाई कोर्ट

By: | Last Updated: Saturday, 26 July 2014 3:30 PM

इलाहाबाद: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि ध्वनि प्रदूषण से मुक्ति का अधिकार एक मौलिक अधिकार है.

 

जस्टिस दिलीप गुप्ता और एम सी त्रिपाठी ने 22 जुलाई को एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए यह व्यवस्था दी. यह जनहित याचिका कांठ के नया गांव के चुन्नू सिंह नामक व्यक्ति तथा 10 अन्य निवासियों ने दाखिल की थी.

 

इस माह के शुरू में गांव के एक मंदिर से लाउड स्पीकर हटाए जाने के बाद वहां न सिर्फ तनाव पैदा हुआ बल्कि राजनीतिक उथलपुथल भी हुई.

 

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से आग्रह किया था कि उन्हें भगवान शिव के मंदिर में हर दिन सुबह और शाम को कम से कम एक घंटे लाउड स्पीकर पर भक्ति गीत बजाने की अनुमति दी जाए.

 

उन्होंने आग्रह किया था कि उनके गांव में पूजा का एकमात्र स्थान वह मंदिर है और वे लोग वहां पिछले 40 साल से भी अधिक समय से पूजा करते आ रहे हैं.

 

बहरहाल, अदालत की राय थी कि जिला प्रशासन और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति के बिना लाउड स्पीकर का उपयोग करने की अनुमति देना जायज नहीं है.

 

अदालत ने हालांकि कहा कि लोग अपनी मांग को लेकर संबद्ध प्राधिकारी से संपर्क कर सकते हैं और जो भी निर्णय किया जाए वह ‘‘ध्वनि प्रदूषण नियमन एवं नियंत्रण नियमावली, 2000’’ के प्रावधानों के अनुरूप हो.

 

साथ ही अदालत ने कहा कि पुलिस थानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके अधिकार क्षेत्रों में लाउड स्पीकर या ध्वनि उत्पन्न करने वाली अन्य गतिविधियां न हों, और अगर ऐसा होता है तो तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए.

 

जनहित याचिका का निपटारा करते हुए अदालत ने कहा ‘‘ध्वनि प्रदूषण से मुक्ति का अधिकार एक मौलिक अधिकार है जिसके उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जा सकती.’’

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Web Title: allahabad high court
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