सभी आरोप झूठे, मैंने किसी को बंधक नहीं बनाया: रामपाल

By: | Last Updated: Thursday, 20 November 2014 6:06 AM

नई दिल्ली: बुधवार रात नाटकीय अंदाज में गिरफ्तार हुए रामपाल की जमानत को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है. रामपाल 2008 से जमानत  पर थे. आज दो बजे पुलिस रामपाल को कोर्ट में पेश करेगी.

 

पुलिस रामपाल को पंचकुला के अस्पताल से थाने लेकर गई है. इस दौरान रामपाल ने मीडिया से कहा, ‘मुझ पर लगे आरोप झूठे, हिंसा और हंगामे में मेरा हाथ नहीं.’ रामपाल ने कहा, ‘मैंने किसी को बंधक नहीं बनाया.’

 

कल रात करीब सवा नौ बजे हिसार के सतलोक आश्रम से गिरफ्तारी के बाद देर रात रामपाल को पंचकूला लाया गया. पंचकूला में सरकारी अस्पताल में उनकी मेडिकल जांच कराई गई. जांच करने वाले डॉक्टर के मुताबिक रामपाल की हालत स्थिर है.

 

सतलोक आश्रम के अंदर की तस्वीरें-

 

सतलोक आश्रम के भीतर पुलिस का सर्च ऑपरेशन चल रहा है. एबीपी न्यूज की टीम सतलोक आश्रम पहुंची है. आश्रम के अंदर से एबीपी न्यूज की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट देखिये.

 

यहां पर आश्रम में ईंटे पत्थर भारी मात्रा में रखे हुए हैं. यही ईंट  पत्थर पुलिस पर बरसाए गए थे. यहां पर ट्रॉली में ईंट-पत्थर जमा दिख रहा है.

 

आंसू गैस के गोले से बचने के लिए आश्रम में बोरे भींगो कर रखे गए थे ताकि बचा जा सके. यहां पर कई ऐसे सामान देखने को मिले हैं जिनसे पुलिस पर रामपाल के समर्थक हमला कर रहे थे.

 

14 दिनों के  ड्रामे के बाद गिरफ्त में आए-

14 दिन चले ड्रामे के बाद आखिरकार कल रात करीब सवा नौ बजे पुलिस रामपाल को उसी के सतलोक आश्रम से पकड़कर ले गई. रामपाल की गिरफ्तारी की खबर जंगल की आग की तरह आसपास के इलाके में फैल गई. इस खबर पर इलाके के आसपास के लोग खुशियां मनाते नजर आए.

 

हिसार रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अनिल के राव ने बताया कि रामपाल को कल (गुरूवार) एक अदालत में पेश किया जाएगा. पुलिस महानिदेशक एस एन वशिष्ठ ने कहा कि विवादास्पद ‘स्वयंभू संत’ को एक अभियान के बाद हिरासत में ले लिया गया है. अभियान ‘बहुत मुश्किल’ था क्योंकि सुरक्षा बलों को रामपाल के कमांडों के विरोध का सामना करना पड़ा.

 

हरियाणा के सीएम के OSD जवाहर यादव ने भी मीडिया के सामने आकर रामपाल की गिरफ्तारी की पुष्टि की और इसे हरियाणा पुलिस की बड़ी कामयाबी बताया.

 

आपको बता दें कि रामपाल को गिरफ्तार करने में पुलिस का खासी मशक्कत करनी पड़ी. पुलिस और रामपाल के समर्थकों के बीच झड़पें भी हुईं जिसमें कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई. हरियाणा के डीजीपी ने बताया कि जिन महिलाओं की मौत हुई है उनके नाम सविता, संतोष, मलकीत और राजबाला हैं. डीजीपी के मुताबिक आश्रम में हुई दो मौत नेचुरल हैं जबकि चार मौतों की जांच जारी है. जिन लोगों की मौत हुई है उनमें डेढ़ साल का एक बच्चा भी शामिल है.

 

मंगलवार को पुलिस से झड़प के मामले में रामपाल के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है. पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट से दो गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद संत रामपाल अदालत में पेश नहीं हुए. 10 नवंबर को ही हरियाणा पुलिस को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट ने 17 नवंबर की सुबह 10 बजे तक संत रामपाल को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया था. अब पेशी की तारीख 21 नवंबर हो चुकी है.

 

रामपाल की साजिश नाकाम

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के ओएसडी जवाहर यादव का कहना है कि पूरी प्लानिंग के तहत रामपाल को गिरफ्तार किया गया है. उन्हें कहां ले जाया गया है इसके बारे में फिलहाल मीडिया से बताना सही नहीं है.

 

जवाहर यादव का कहना है कि रामपाल की कोशिश थी कि पुलिस की कार्रवाई बिना प्लानिंग हो, वहां भगदड़ मचे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की मौत हो और इस तरह वे गिरफ्तारी से बच जाएं, लेकिन पुलिस बेहतरीन प्लानिंग के तहत उन्हें गिरफ्तार किया है. इससे पहले पुलिस ने रामपाल के 425 समर्थकों को गिरफ्तार किया था जिसमें आश्रम के कुछ बड़े अधिकारी भी शामिल थे. मंगलवाल को पुलिस ने सतलोक आश्रम से लगभग 15000 लोगों को बाहर निकाला था.

 

संत रामपाल जी महाराज है कौन?

 

संत रामपाल जी महाराज किसी भगवान को नहीं मानते, किसी भी देवी देवता की पूजा के सख्त खिलाफ हैं संत रामपाल, लेकिन कबीरपंथी रामपाल खुद को परमेश्वर बताते हैं. हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर से रामपाल के परमेश्वर बनने तक की कहानी बड़ी दिलचस्प है.

 

जूनियर इंजीनियर की नौकरी के दौरान संत रामपाल महाराज की मुलाकात 107 साल के कबीरपंथी संत स्वामी रामदेवानंद महाराज से हुई थी. रामपाल रामदेवानंद महाराज के शिष्य बन गए और 18 साल लंबी सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर सत्संग करने लगे.

 

आज संत रामपाल हरियाणा के हिसार जिले के सतलोक आश्रम के मालिक हैं. 12 एकड़ में फैला उनका आश्रम किसी महल से कम नहीं है,लेकिन छावनी में तब्दील हो चुका हिसार के इस आश्रम की कहानी रोहतक से शुरू होती है.

 

साल 1999 में रामपाल ने रोहतक के करौंथा में अपना आश्रम शुरू किया था. रामपाल देवी देवता की पूजा के खिलाफ हैं और रामपाल की इस कबीरपंथी सोच के खिलाफ है आर्यसमाज. लेकिन सोच का ये फर्क साल 2006 में जमीन के विवाद के रूप में सामने आया.

 

दैनिक जागरण में छपी खबर के मुताबिक 2006 में स्वामी दयानंद की लिखी एक किताब पर संत रामपाल ने एक टिप्पणी की, आर्यसमाज को ये टिप्पणी बेहद नागवार गुजरी और दोनों के समर्थकों कें हिंसक झडप हुई. घटना में एक शख्स की मौत भी हो गयी. घटना के बाद एसडीएम ने 13 जुलाई 2006 को आश्रम को कब्जे में ले लिया. रामपाल और उनके 24 समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया. 2006 में रामपाल पर हत्या का केस दर्ज हुआ था जिसमें उन्हें 21 महीने जेल में रहना पड़ा था. तब से रामपाल जमानत पर हैं.

 

विवाद की जड़

रामपाल ने 2013 में सुप्रीम कोर्ट में केस जीता और उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फिर से रोहतक का आश्रम फिर वापस मिल गया. इस जमीन को लेकर आश्रम के आसपास के गांव वालों का विरोध इतना ज्यादा है कि जब रामपाल के समर्थक पिछले साल आश्रम पर कब्जा करने गए तो नाराज गांव वालों और आर्य समाज के लोगों ने इन पर धावा बोल दिया.

 

हरियाणा में रामपाल का काफी विरोध है. इसलिए पड़ोसी राज्यों पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान से समर्थक जुटाते हैं रामपाल. इन राज्यों से काफी तादाद में इनके अनुयायी हरियाणा आते हैं.

बाबा जमानत पर बाहर तो आ गए लेकिन साल 2006 में हिंसक झड़प में हुई मौत का मामला खत्म नहीं हुआ था. इसी मामले में अगस्त 2014 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए रामपाल की हिसार कोर्ट में पेशी थी. लेकिन बाबा के समर्थक कोर्ट पहुंच गए और वहां वकीलों से बदसलूकी की.

 

नाराज वकीलों ने रामपाल की जमानत रद्द करने की याचिका दे दी. हाईकोर्ट ने अदालत की अवमानना के इस मामले में रामपाल को दो बार पेशी का नोटिस भेजा लेकिन रामपाल खराब तबीयत की दलील देकर हाजिर नहीं हुए. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इसे अदालत की अवमानना मानते हुए रामपाल की गिरफ्तारी के आदेश जारी कर दिए. और फिर अब 14 दिनों तक चले ड्रामे के बाद रामपाल को गिरफ्तार कर लिया गया.