फिर पास हुए अमित शाह! 

By: | Last Updated: Sunday, 19 October 2014 5:13 PM
amit shah

नई दिल्लीः महाराष्ट्र का महासंग्राम खत्म हो चुका है और इस चुनावी जंग में भी सबसे चमकदार चेहरा बन कर उभरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. लेकिन महाराष्ट्र औऱ हरियाणा के विधानसभा चुनाव में मोदी की इस चमक के पीछे से एक परछाई लगातार झांकती रही है जिसका नाम है अमित शाह.  

 

बीजेपी अध्यक्ष बनने के चंद महीनों में ही देश के बड़े राज्य महाराष्ट्र औऱ हरियाणा में जिस तरह उन्होंने बीजेपी को शानदार जीत दिलाई है उसकी चर्चा आज राजनीतिक पंडितों की जुबान पर है. बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर अमित शाह की ये पहली जंग थी जिसका बिगुल उन्होने अगस्त 2014 में उस वक्त फूंका था जब उनके अध्यक्ष पद पर पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में मुहर लगाई गई थी. पार्टी अध्यक्ष के नाते अमित शाह का महाराष्ट्र और हरियाणा के मैदान में ये पहला इम्तिहान था और अपनी इस परीक्षा में वो कामयाब हो चुके हैं औऱ इसीलिए पार्टी में एक बार फिर हो रही है अमित शाह की जय-जय कार.

 

मिशन महाराष्ट्र पर निकले अमित शाह ने चुनावी बिसात पर ऐसी चाले चली की विरोधी दल चारो खाने चित्त हो गए. दरअसल महाराष्ट्र औऱ हरियाणा विधानसभा चुनाव में जो जीत बीजेपी ने दर्ज की है उसकी तैयारी अमित शाह ने महीनों पहले ही शुरु कर दी थी औऱ बीजेपी अध्यक्ष की कुर्सी संभालते ही अमित शाह ने मिशन महाराष्ट्र को लेकर अपने इरादे जता भी दिए थे.

 

महाराष्ट्र के लोकसभा चुनाव में बीजेपी – शिवसेना गठबंधन ने 48 में से 42 सीटें जीती थीं. लोकसभा चुनाव में शिवसेना-बीजेपी गठबंधन के इस शानदार प्रदर्शन से ये बात साफ थी कि महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में भी ये गठबंधन आराम से जीत कर राज्य की सत्ता में आ जाएगा. लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर जब बीजेपी – शिवसेना का 25 साल पुराना ये गठबंधन टूट गया, ऐसे हालात में बीजेपी के लिए महाराष्ट्र में जीती हुई बाजी एक मुश्किल मुकाबले में फंस गई थी.

 

महाराष्ट्र में जब बीजेपी के तमाम नेता इस फैसले से हैरान हो रहे थे कि महाराष्ट्र जैसे राज्य में शिवसेना से गठबंधन टूटने का नुकसान उठाना पड़ सकता है तब अमित शाह अपने मजबूत होमवर्क और रणनीति के दम पर पूरे विश्वास में थे.

 

अमित शाह की टीम तैयार हो चुकी थी लेकिन 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में बीजेपी ने 160 सीटों पर कभी चुनाव नहीं लड़ा था. इन 160 सीटों पर बीजेपी का तालुका स्तर पर भी कोई नुमाइंदा नहीं था. लेकिन इकनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक इस बात को लेकर जब महाराष्ट्र बीजेपी नेता परेशान हो रहे थे तब अमित शाह के पास पूरी लिस्ट तैयार थी.

 

वरिष्ठ पत्रकार अनुराग तिवारी के अनुसार इस बार बीजेपी में 54 कैंडीडेट है जो बाहर से लिए गए है. वो जीतने लायक थे इसका आकलन करके पार्टी ने अचानक बीजेपी से खड़ा कर दिया. वो भी एक बहुत बड़ा स्ट्रेटेजिक जीत थी जो उनहोने हासिल की है. ऐसे कैंडीडेट ढूंढना और उनको लेकर आना.

 

महाराष्ट्र की चुनावी चुनौती से निपटने के लिए अमित शाह ने अपनी चाल बेहद चतुराई से चली है. कैसे अमितशाह ने चुनाव मैनेजमेंट के जरिए जीती महाराष्ट्र औऱ हरियाणा की ये चुनावी जंग बताएंगे आपको आगे लेकिन पहले देखिए विधानसभा चुनाव की ये जीत अमित शाह और बीजेपी के लिए कितनी है अहम.

 

राजनीतिक विश्लेषक कंचन गुप्ता के अनुसार अगर हम सिर्फ इसको भाजपा के एंगल से देखे …. इससे जो संगठन पर असर होगा उनके जो वर्कर हैं उनके जो मेंबर हैं। उनमें जो सेल्फ कान्फीडेंस आएगी वो आगे जाकर पार्टी के लिए संगठन के लिए ये काम देगा। संगठन को नए तरीके से सजाया जा रहा है। नए लोग लाए गए हैं। नए पदाधिकारी लाए गए हैं लेकिन अगर वर्कर में जो मोराल है वो ना हो तो फिर आप जितनी भी नए पदाधिकारी ले आए संगठन आगे नहीं बनने वाला है। ये सब देखते हुए मुझे लगता है कि …. ये चुनाव जीतना … जरुरी भी है

 

दरअसल 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी के चुनावी प्रदर्शन पर ही ये निर्भर था कि केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी की सरकार बनेगी या नहीं. 2013 में बीजेपी के यूपी प्रभारी महासचिव बने अमित शाह अपने इस मिशन यूपी में कामयाब रहे थे लेकिन इस बार बीजेपी अध्यक्ष के नाते उनकी जिम्मेदारी बड़ी थी. क्योकि महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव में ये जीत आगे होने वाले जम्मू कश्मीर, झारखंड और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में बीजेपी का माहौल बनाए रखने के लिए जरुरी थी.

 

इस पर कंचन गुप्ता ने कहा – अगले जो चुनाव आएंगे उसके लिए एक टैंपो बन जाता है. दूसरा है राज्यसभा में आगे जाकर जो चुनाव होंगे उसमें आप अपने उम्मीदवार को ले आ सकते हैं. इसकी जरुरत इसलिए है क्योंकि लोकसभा में भाजपा के पास अपना बहुमत है. लेकिन राज्यसभा में नही है. कुछ ऐसे बिल हो सकते हैं जो पास करवाने में दिक्कत आए और इसलिए राज्यसभा में अपना बहुमत होना जरुरी है.

 

वरिष्ट पत्रकार जयंतो घोषाल के अनुसार ये जो नंबर वन नरेंद्र मोदी,  नंबर 2 अमित शाह मैं इसको एक combo बोलता हूं इसके उपर dependence on this two characters जिसपर नरेंद्र मोदी लीड कर रहे हैं पूरी पार्टी को रैली करना पड़ेगा. कोई decedenr leader का voice नहीं रहेगा. संघ परिवार से लेकर अभी आपको मानना पड़ेगा तो अभी ये चलेगा इसके momentam से बाकी कश्मीर और बाकी जहां राज्य में तमिलनाडू, बंगाल में जो चुनाव आ रहा है वो momentam को भी use करने का मौका मिलेगा.

 

नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी माने जाने वाले अमित शाह चुनावी रणनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं लेकिन अमित शाह के लिए महाराष्ट्र और हरियाणा की ये जंग आसान नहीं थी. बीजेपी मोदी लहर पर सवार होकर जहां बहुमत के लिए जरुरी 145 सीटों के मिशन पर निकली थीं वहीं बीजेपी की पूर्व सहयोगी शिवसेना उसके इस मिशन पर लगाम लगाने के लिए एडी चोटी का जोर लगा रही है. बीजेपी के सामने शिवसेना के गढ से सीटें जीतने की भी असल चुनौती खड़ी थी. एक तरफ एनसीपी और कांग्रेस तो दूसरी तरफ अमित शाह को शिवसेना से भी लोहा लेना था ऐसे में उन्होंने बेहद चतुराई से चली अपनी चुनावी चाल.

 

वरिष्ठ पत्रकार अनुराग तिवारी के अनुसार अमित शाह के लिए उत्तर प्रदेश में जिस तरह से उन्होने काम किया लोकसभा में उसके बाद महाराष्ट्र और हरियाणा उनके लिए टेस्टिंग ग्राउड था. …… मेरे ख्याल से अमित शाह का लोहा सभी को मानना पडेगा. उनके काम करने का जो एग्रेशिव स्टाइल है सामने एक शांत चेहरा और पीछे एक बहुत जबरदस्त एग्रेशिव स्टाइल ये जो काम करने का तरीका है ये एक नया बीजेपी में आया है और ये सफल होता दिखाई दे रहा है.

 

महाराष्ट्र में चुनाव की चुनौती से निपटने के लिए अमित शाह ने अपनी एक खास टीम भी बनाई थी. उनकी इस टीम में करीब नौ लोग शामिल थे. शाह की टीम महाराष्ट्र के अलग – अलग जिलों का दौरा करने से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रचार का जिम्मा संभालने तक औऱ टीवी अखबार में पार्टी का विज्ञापन देने से लेकर इलाकों की समस्याओं की लिस्ट तैयार करने तक हर काम में रात दिन जुटे रहे.

 

बीजेपी महाराष्ट्र के प्रवक्ता माधव भंडारी ने कहा अमित शाह ऐसा अगर कहा जाए तो उसमें छह नहीं बहुत सारे सदस्य थे. और अलग अलग लोगों को अलग अलग तरह की जिम्मेदारियां दी गई थी. जिसमें बहुत ही छोटी सी जिम्मेदारी मेरे पास भी थी प्रकाश जावडेकर, पीयूष गोयल ये सारे सेंटर के पदाधिकारी थे महाराष्ट्र के भी कई सारे नेता थे. जिन पर जिम्मेदारी थी..

 

महाराष्ट्र में बीजेपी को कामयाबी दिलाने के लिए अमित शाह ने योजनाबद्ध तरीके से काम किया.. बारीकी से रणनीति तैयार की और इसके लिए चुने कुछ खास चेहरे.. इन चेहरों में सबसे पहला नाम उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री अनिल बंसल का है चुनाव के दौरान कौन कहां क्या काम करेगा अनिल बंसल को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इस बीच अमित शाह ने पार्टी के सह संगठन मंत्री वी सतीश से बात महाराष्ट्र के 55 संगठन जिलों का प्रभारी तय करने की योजना भी बना ली थी संगठन की दृष्टि से महाराष्ट्र को सात विभागों में बांटा गया और हर विभाग अमित शाह ने खुद राष्ट्रीय स्तर के नेता के हवाले किया. इस तरह उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की रणनीति भी लोकसभा चुनाव की तर्ज पर ही रच दी.

 

अमित शाह ने महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों को ABCD के रूप में चार कैटेगरी में बांटा और सी और डी कैटेगरी की सीटों पर ज़्यादा ध्यान देने के लिए रोज रिपोर्ट लेना शुरू कर दी हर सीट की रिपोर्टिंग चार अलग-अलग जगहों से आती थी. जिला संगठन, विधानसभा चुनाव प्रभारी, प्राइवेट सर्वे एजेंसी और आरएसएस.. रिपोर्ट के आधार पर अमित शाह और सुनील बंसल रणनीति बदलने की जरूरत होने पर रणनीति बदल दिया करते थे.

 

महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव में पीएम मोदी तो मोर्चा संभाले हुए थे ही कई केंद्रीय मंत्रियों को भी अमित शाह ने प्रचार में उतार दिया.. अनंत कुमार को मुंबई और ठाणे की सीटों पर नजर रखने को कहा गया.. राधामोहन सिंह को नवी मुंबई में बिहार मूल के लोगों के बीच तैनात किया गया.. जबकि स्मृति ईरानी को पूरे महाराष्ट्र में रैलियों का जिम्मा सौंपा गया. अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक जुलाई महीने में ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जब मिशन महाराष्ट्र की शुरूआत की थी तभी राज्य में बीजेपी के प्रवक्त माधव भंडारी और वी सतीश को पूरे महाराष्ट्र के दौरे पर भेज दिया गया था उन्हें एक एक इलाके के स्थानीय मुद्दों और संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार करने का भी निर्देश दिया गया था.

 

राजनीति पर नजर रखने वाले कहते हैं कि अमित शाह और नरेंद्र मोदी चेहरा देख कर एक दूसरे की मन की बात जान जाते हैं महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ 25 साल की दोस्ती छोड़ अकेले चुनावी मैदान में जाने का फैसला हो या हरियाणा में पार्टी की ताकत पहचान कर रणनीति बनाने की बात, इसके पीछे अमित शाह और उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बेहतरीन तालमेल का ही हाथ माना जाता है. और अब महाराष्ट्र औऱ हरियाणा में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के बाद तो अमित शाह का कद औऱ ज्यादा बढेगा वो पहले से ज्यादा ताकतवर होंगे अमित शाह की इस सफलता से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताकत और भरोसा सरकार से लेकर संगठन तक बढ जाएगा और इसी के साथ आने वाले चुनावों में भी गर्म रहेगा बीजेपी का माहौल.

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Web Title: amit shah
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