सस्पेंड आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने कहा ‘हार नहीं मानूंगा’

By: | Last Updated: Wednesday, 15 July 2015 2:46 AM

लखनउ: उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव के खिलाफ फोन पर धमकी देने के आरोप में तहरीर देने के बाद अनुशासनहीनता के आरोप में सस्पेंड होने के अगले ही दिन आज वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने आक्रामक रूख दिखाते हुए कहा कि वह हार नहीं मानेंगे और अंत तक लड़ेंगे.

 

ठाकुर ने कहा, ‘‘जहां तक सपा मुखिया से टेलीफोन पर हुई बातचीत के टेप का सवाल है तो उसमें आवाज निश्चित रूप से उन्हीं (मुलायम) की ही है ..मैं पुलिस को मूल टेप सौंप दूंगा और फिर देखते हैं कि आगे क्या कार्रवाई होती है.’’

 

उत्तर प्रदेश सरकार ने अमिताभ ठाकुर को कल देर रात स्वेच्छाचारिता, अनुशासनहीनता, सरकार विरोधी आचरण और उच्च न्यायालय के आदेश के उल्लंघन के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित करके उन्हें पुलिस महानिदेशक कार्यालय से संबद्ध कर दिया है.

 

महानिरीक्षक स्तर के पुलिस अधिकारी ठाकुर ने सपा मुखिया की तरफ से फोन पर उन्हें दी गयी कथित धमकी को उनकी पत्नी एवं सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर की तरफ से अवैध खनन के आरोप में प्रदेश के खनन मंत्री गायत्री प्रसाद के खिलाफ दर्ज करायी गयी प्राथमिकी का परिणाम बताया है.

 

सपा मुखिया के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए हजरतगंज कोतवाली में ठाकुर ने शनिवार को एक तहरीर दी थी और उसी दिन रात को गाजियाबाद की एक महिला की शिकायत पर गोमती नगर थाने में ठाकुर तथा उनकी पत्नी नूतन के खिलाफ रेप के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.

 

पुलिस महानिरीक्षक (लोक शिकायत) ए मुथा जैन ने आज बताया कि उक्त मामले में आज शिकायतकर्ता महिला का मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज किया गया है.

 

गाजियाबाद की महिला ने ठाकुर के खिलाफ धारा 376 (रेप), 504 (इरादतन बेज्जती) और 506 (डराना धमकाना) के तहत दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि नौकरी के सिलसिले में नूतन ठाकुर ने पिछली 31 दिसंबर को उसे अपने लखनउ स्थित आवास पर बुलाया था, जिसके बाद उन्होंने उसे साक्षात्कार के बहाने अमिताभ ठाकुर के कमरे में भेजा, जहां उन्होंने उसके साथ रेप किया.

 

बहरहाल विपक्षी दलों ने सपा मुखिया के खिलाफ तहरीर देने के बाद ठाकुर के निलंबन को बदले की भावना से की गयी कार्रवाई करार देते हुए अखिलेश सरकार पर हमला बोल दिया है. उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष निर्मल खत्री ने आज यहां कहा कि आईपीएस अफसर ठाकुर के निलम्बन के पीछे खराब मंशा जाहिर होती है. यह बदले की भावना से की गयी कार्रवाई है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘ठाकुर ने अगर कोई सरकारी विरोधी कार्यो का काम किया होता. नियमों, मर्यादाओं का उल्लंघन किया था तो उनका निलम्बन मुलायम सिंह यादव टेप प्रकरण से पहले होना चाहिये था. उस मामले के बाद यह कार्रवाई होने से साबित होता है कि सरकार ने उन्हें बदले की भावना से निलम्बित किया है.’’ भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने भी वरिष्ठ आईपीएस और निवर्तमान पुलिस महानिरीक्षक (नागर सुरक्षा) अमिताभ ठाकुर के निलम्बन को दुर्भावनापूर्ण कार्यवाही बताया है.

 

पाठक ने कहा कि प्रदेश सरकार को आरोपों से घिरे खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति, नोएडा प्राधिकरण के पूर्व मुख्य अभियंता यादव सिंह जैसे लोग अच्छे लगते हैं, और एसपी सिंह या अमिताभ ठाकुर या विजय शंकर पाण्डेय जैसे मौजूदा और पूर्व अफसर खटकते हैं.

 

हालांकि उनके निलम्बन पर मुख्य विपक्षी दल बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) का रख थोड़ा अलग है. विधानसभा में बीएसपी और विपक्ष के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने ठाकुर के निलम्बन पर कहा कि एक अराजक सरकार ने अपने जैसे ही अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की है.

 

उन्होंने कहा कि सपा मुखिया जैसे बड़े कद के नेता को एक अफसर को धमकी देने की बात शोभा नहीं देती है. वैसे ही ठाकुर की कार्यप्रणाली को देखकर नहीं लगता कि वह अपने कर्तव्यों के प्रति बहुत गम्भीर हैं.

 

मौर्य ने कहा कि जिस तरह मुलायम ने लोकतांत्रिक मर्यादा प्रतिष्ठा से हटकर काम किया, उसी तरह ठाकुर भी अराजक रवैये के लिये मशहूर हैं. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बहरहाल सपा मुखिया का बचाव करते हुए कहा है कि उन्होंने ठाकुर को समझाकर कोई गलती नहीं की है.

 

उन्होंने इस संबंध में एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘नेताजी मुख्यमंत्री को समझा सकते है, मंत्रियों को समझा सकते है तो अधिकारियों को समझाने में क्या गलती है.’’

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Web Title: amitabh thakur
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