Analysis: क्यों बीजेपी के लिए जरूरी है उत्तर प्रदेश?

Analysis: क्यों बीजेपी के लिए जरूरी है उत्तर प्रदेश?

By: | Updated: 26 Mar 2014 03:19 PM
कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी कह रहे हैं कि मोदी के नाम का गुब्बारा जल्द ही फूट जाएगा. वहीं बीजेपी की तरफ से पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और उनकी टीम ने यूपी में पूरी जान लगा रखी है.

 

आइए आपको बताते हैं कि इस बार लोकसभा चुनावों में यूपी बीजेपी के लिए क्यों जरूरी है.

 

लोकसभा चुनावों का घमासान तेज हो चुका है. देश की सभी बड़ी पार्टियों की नजरें इस वक्त यूपी पर लगी हैं.



543 सीटों में से 80 लोकसभा सीटें उत्तर प्रदेश से आती हैं और अगर कोई भी दल इनमें से आधी सीटें भी जीतने में कामयाब हो जाएगा तो वो देश की गद्दी की दौड़ में सबसे आगे होगा.

 

यूपी में से ही देश के प्रधानमंत्री आते रहे हैं और इस बार फिर हालात बन रहे हैं कि जो भी अगला प्रधानमंत्री होगा उसका कनेक्शन यूपी के साथ ही होगा. 

 

बीजेपी की पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ रहे हैं. मोदी के सबसे करीबी अमित शाह महीनों पहले से यूपी के चुनाव का मैनेजमेंट संभालने में जुटे हुए हैं.

 

आंकडों की नज़र में यूपी

 

बीजेपी के लिए यूपी क्यों जरूरी है इसे बताते हैं ये आंक़डे.

 

1991 में बीजेपी को यूपी से 51 सीटें मिली थीं. 1996 में जब वाजपेयी 13 दिन के पीएम बने थे तक यूपी ने बीजेपी को 52 सीटें दी थीं. 1998 में जब वाजपेयी 13 महीने के पीएम बने थे तब बीजेपी ने यूपी में 57 सीट जीती थीं. 1999 में वाजपेयी पीएम बने तो भी यूपी ने बीजेपी को 29 सीटें दी थीं.

 

2004 में बीजेपी उत्तर प्रदेश में 10 सीट जीतीं और इस तरह वाजयेपी की सरकार का भी अंत हो गया. 2009 में एक बार फिर बीजेपी को उत्तर प्रदेश में 10 सीट मिलीं.

 

2000 से पहले यूपी में 85 सीटें हुआ करती थीं जबकि अब 80 सीट हैं. बीजेपी जानती हैं कि यूपी में दस सीटों के सहारे वो केंद्र में सरकार बनाने का सपना नहीं देख सकती.

 

इसलिए बीजेपी ने यूपी में हालत सुधारने के लिए पूरी जान लगा दी है. इसके लिए उसने पूरे यूपी की नहीं बल्कि क्षेत्रिय स्तर की रणनीति बनाई है.

 

पूर्वांचल

 

सबसे पहले बात पूर्वांचल की. करीब सात करोड़ की आबादी वाला पूर्वांचल पूर्व में बिहार से छूता है. दक्षिण में मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड को छूता है. पूर्वांचल में कुल 32 लोकसभा सीट आती हैं. मोदी इसी इलाके की एक सीट वाराणसी से बीजेपी के उम्मीदवार बने हैं. कोशिश ये कि मोदी के असर का फायदा पूर्वांचल के साथ-साथ बिहार और एमपी की पूर्वांचल से लगती सीटों पर भी हो सके.

 

ओबीसी समुदाय में पैठ बनाने के लिए बीजेपी ने इस इलाके में अपना दल से भी गठबंधन किया है सीट सिर्फ दो दी हैं लेकिन इस बहाने पिछड़े समुदाय में पैठ बनाने की कोशिश बीजेपी ने की है.

 

बुंदेलखंड

 

एमपी से लगते बुदंलेखंड के इलाके में चार लोकसभा सीटें आती हैं जिसमें उमा भारती अहम भूमिका निभा सकती हैं बीजेपी इन चार सीटों के लिए शिवराज के जादू के असर से भी उम्मीद कर रही है पिछली बार बीजेपी यहां खाता भी नहीं खोल पाई थी.

 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश

 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुल 30 लोकसभा सीटें आती हैं. इन सीटों पर जीत हासिल करने के लिए बीजेपी कई पहलुओं पर काम कर रही है. मुजफ्फरनगर दंगे पश्चिमी यूपी में ही हुए थे जिसके बाद बीजेपी यहां भारी ध्रुवीकरण की उम्मीद कर रही है. मथुरा से बीजेपी ने हेमामालिनी को टिकट दिया है जबकि गाजियाबाद से जनरल वीके सिंह को.

 

बागपत से मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह को टिकट दिया गया है.

 

अवध प्रदेश

 

अवध क्षेत्र में आती है 14 लोकसभा सीट. इसी में है लखनऊ जहां से बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह मैदान में उतरे हैं. वैसे अवध क्षेत्र में ही आती हैं रायबरेली और अमेठी सीट भी. यहां बीजेपी ओबीसी और सवर्ण जातियों के सहारे मैदान जीतने की कोशिश में हैं.

 

सर्वे की जुबानी

 

एबीपी न्यूज और नील्सन के आपिनियन के मुताबिक लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी. फरवरी में हुए ओपिनियन पोल के मुताबिक बीजेपी को 40 सीटें मिल सकती हैं जबकि सीएसडीएस के सर्वे में सामने आया कि बीजेपी को 41 से 49 सीटें मिल सकती हैं.

 

लेकिन फरवरी के बाद से बीजेपी में आंतरिक कलह की जो खबरें सामने आईं वो बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

 

यूपी में ही मुरली मनोहर जोशी, लालजी टंडन और कलराज मिश्र सीट बदलने को लेकर नाराजगी जता चुके हैं. वहीं बीजेपी के पुराने दिग्गज राम विलास वेदांती, स्वामी चिन्मयानंद भी खुलकर टिकट ना दिए जाने का विरोध कर रहे हैं. वहीं बाहर से उम्मीदवार लाकर उतारने के कई मामलों में भी कार्यकर्ता खुलकर नाराजगी जता चुके हैं.

 

ऐसे में बीजेपी के सामने विरोधियों से बड़ी चुनौती अपने घर के विरोध को संभालने की होगी.

 

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल भी वाराणसी से मोदी के खिलाफ ताल ठोंक चुके हैं. केजरीवाल लगातार मोदी के विकास मॉडल पर हमला कर रहे हैं. वहीं राहुल गांधी दावा कर रहे हैं कि जमीनी स्तर पर मोदी की हवा जैसी कोई चीज नहीं हैं.

 

यूपी में ऊंट किस करवट बैठेगा ये तो चुनाव बाद ही पता चलेगा लेकिन एसपी और बीएसपी दोनों ही यूपी से ही बड़ी सीट की उम्मीद लगाए बैठे हैं. वो यूपी के सहारे ही किंग या किंगमेकर बनना चाहते हैं जबकि कांग्रेस ने अपना पिछला प्रदर्शन दोहराने की उम्मीद जरूर लगाई होगी. जबकि मोदी के लिए यूपी सबसे अहम है. वो जानते हैं कि अगर यूपी उनके हाथ से गया तो पीएम गद्दी भी खिसक जाएगी.

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