बातें जिससे 'गूंज' के संस्थापक अंशु गुप्ता की हर ओर है 'गूंज'

By: | Last Updated: Wednesday, 29 July 2015 10:59 AM

नई दिल्ली: जरुरतमंदो की मदद करने वाली एनजीओ के संस्थापक अंशु गुप्ता और एम्स के पूर्व सीवीओ संजीव चतुर्वेदी को इस बार के रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड के लिए चुना गया है.

 

साल 2015 के लिए रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड के लिए चुने गए अंशु गुप्ता की मेहनत आखिर कैसे रंग लाई और ‘गूंज’ की गूंज इंडिया के साथ साथ दूसरे देशों में कैसे सुनाई देने लगी… एशिया का नोबेल पुरस्कार माने जाने वाले रैमन मैग्सेसे अवार्ड के लिए चुने गए और ‘गूंज’ नामक एनजीओ के जरिए गरीबों की सहायता करने वाले अंशु गुप्ता से जुड़ी कुछ खास बातें जो आपको जरुर जाननी चाहिए…

1- देहरादून के मिडिल क्लास परिवार में जन्में अंशु गुप्ता चार भाई बहनों में सबसे बड़े हैं. जब अंशु 14 साल के थें तो उनके पिता को हॉर्ट अटैक आने के चलते घर का जिम्मा उन्हीं के कंधों पर आ गया.

 

2- 12वीं की पढ़ाई के दौरान अंशु का एक एक्सीडेंट हो गया जो उनकी जिंदगी को बदल गया.

 

3- देहरादून से ग्रेजुएशन करने के बाद अंशु ने दिल्ली का रुख किया. अंशु ने इकोनॉमिक्स से मास्टर की डिग्री हासिल की और फिर पत्रकारिता और जनसंचार का कोर्स किया.

 

4- एक ग्रेजुएट स्टूडेंट के तौर पर अंशु ने 1991 में नॉर्थ इंडिया में उत्तरकाशी की यात्रा की और भूकंप प्रभावित क्षेत्र में पीड़ितों की सहायता भी की और यही ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं को लेकर अंशु की पहली पहल थी.

 

5- अंशु ने पढ़ाई खत्म करके बतौर कॉपी राइटर एक विज्ञापन एजेंसी में काम करना शुरू किया. कुछ समय बाद पावर गेट नाम की एक कंपनी में दो साल तक काम किया.

6- आखिरकार जब अंशु नौकरी से बोर हो गए तो उन्होंने एनजीओ की तरफ अपना कदम बढ़ाया और ‘गूंज’ नामक के एनजीओ की शुरुआत की.

 

7- आपको बता दें कि कभी 67 कपड़ों से शुरु हुआ यह संगठन आज हर महीने करीब अस्सी से सौ टन कपड़े गरीबों को बांटता है.

 

8- 2012 में गूंज को नासा और यूएस स्टेट डिपार्टमेंट के द्वारा ‘गेम चेंजिंग इनोवेशन’ के रुप में चुना गया और इसी साल अंशु गुप्ता को इंडिया के मोस्ट पॉवरफुल ग्रामीण उद्यमी के तौर पर फोर्ब्स की लिस्ट में जगह मिला.

 

9- अपने इन्ही कार्यों की वजह से ‘गूंज’ को हाल ही में ‘मोस्ट इनोवेटिव डेवलेपमेंट’ प्रोजेक्ट के लिए जापानी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

 

10- 1999 में चमोली में आए भूकंप में उन्होंने रेड क्रॉस की सहायता से जरूरतमंदों के लिए काफी सामान भेजा.

11- केवल इतना ही नहीं अंशु ने तमिलनाडु सरकार के साथ एक समझौता किया ताकि वहां आई प्राकृतिक आपदा के दौरान जो कपड़े नहीं बांटे जा सके उन्हें वह जरूरतमंदों तक पहुंचा सके.

 

12- आपको बता दें कि फिलहाल गूंज का वार्षिक बजट तीन करोड़ से अधिक पहुंच चुका है. गूंज के 21 राज्यों में संग्रहण केंद्र हैं और दस ऑफिस हैं. टीम में डेढ़ सौ से ज्यादा साथी हैं.

 

13- इसके साथ ही गूंज ने क्लॉथ फॉर वर्क कार्यक्रम शुरू किया. अंशु के प्रयासों से कुछ गांवों में छोटे पुल बने तो कुछ गांवों में कुएं खोदे गए.

 

14- आप शायद यह नहीं जानते होंदगे कि ‘गूंज’ में कामकाज को देखने की जिम्मेदारी ज्यादातर महिलाओं के हाथ में है.

 

15- अंशु गुप्ता का पेट प्रोजेक्ट ‘केवल कपड़े के एक टुकड़े के लिए नहीं’ गांवों में और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले ऐसे लोगों के लिए है जहां  महिलाओं और लड़कियों के पास पर्याप्त कपड़े नहीं थे.

 

ऐसे ही कार्यों की बदौलत अंशु गुप्ता की मेहनत रंग लाई और उन्हें इस साल के एशिया के नोबल पुरस्कार यानी रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड के लिए चुना गया.

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Web Title: Anshu Gupta
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