पुरस्कार लौटाने वालों पर बिफरे अनुपम खेर, फिल्मकारों की मंशा पर उठाया सवाल

By: | Last Updated: Thursday, 29 October 2015 1:20 AM

नई दिल्लीः कुछ फिल्मकारों के राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाने पर अभिनेता अनुपम खेर बिफर गए. उन्होंने पुरस्कार लौटाने वालों की मंशा पर फिल्मकारों की मंशा पर सवाल उठाया है. अनुपम खेर ने ट्विटर पर लिखा, कुछ और लोग जो नहीं चाहते थे कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनें, अब वो भी #AwardWapsi गैंग का हिस्सा बन गए हैं. जय हो.

 

अनुप खेर ने दूसरे ट्वीट में लिखा, ये लोग किसी एजेंडे के तहत ऐसा कर रहे हैं. जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में आई थी तो इन्हीं में से कुछ लोग मुझे भी फिल्म सेंसर बोर्ड से बाहर करने वालों में शामिल थे.

 

तीसरे ट्वीट में अनुपम खेर ने कहा कि, ”इस अवॉर्डवापसीगैंग ने सरकार का ही नहीं बल्कि जूरी, जूरी के अध्यक्ष और दर्शकों का भी अपमान किया है जिन्होंने उनकी फिल्में देखीं.”

 

साहित्यकार, फिर वैज्ञानिक और अब फिल्मकार खुलकर सरकार के विरोध में उतर आए हैं. इससे पहले बुधवार को जाने-माने फिल्मकारों दिबाकर बनर्जी, आनंद पटवर्धन तथा आठ अन्य लोगों ने एफटीआईआई के आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए तथा देश में बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में अपने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटा दिए.

 

बनर्जी और अन्य फिल्मकारों ने कहा कि उन्होंने छात्रों के मुद्दों के निवारण तथा बहस के खिलाफ असहिष्णुता के माहौल को दूर करने में सरकार की ओर से दिखाई गई उदासीनता के मद्देनजर ये कदम उठाए हैं.

बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं गुस्से, आक्रोश में यहां नहीं आया हूं. ये भावनाएं मेरे भीतर लंबे समय से हैं. मैं यहां आपका ध्यान खींचने के लिए हूं. ‘खोसला का घोसला’ के लिए मिला अपना पहला राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाना आसान नहीं है. यह मेरी पहली फिल्म थी और बहुत सारे लोगों के लिए मेरी सबसे पसंदीदा फिल्म थी.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर बहस, सवाल पूछे जाने को लेकर असहिष्णुता तथा पढ़ाई के माहौल को बेहतर बनाने की चाहत रखने वाले छात्र समूह को लेकर असहिष्णुता होगी, तो फिर यह असहिष्णुता उदासीनता में प्रकट होती है. इसी को लेकर हम विरोध जता रहे हैं.’’ जानेमाने डाक्यूमेंटरी निर्माता पटवर्धन ने कहा कि सरकार ने ‘अति दक्षिणपंथी धड़ों’ को प्रोत्साहित किया है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इस तरह से एक समय पर बहुत सारी घटनाएं होती नहीं देखी हैं. क्या होने वाला है, यह उसकी शुरूआत है और मुझे लगता है कि पूरे देश में लोग अलग अलग तरीकों से प्रतिक्रिया दे रहे हैं.’’ एफटीआईआई के छात्रों ने आज अपनी 139 दिनों पुरानी हड़ताल खत्म कर दी, हालांकि वे संस्थान के अध्यक्ष पद पर गजेंद्र चौहान की नियुक्ति का विरोध एवं उनको हटाने की मांग जारी रखेंगे.

 

उर्स ने कहा, ‘‘परंतु हम इसका इस्तेमाल केवल यह कहने के लिए नहीं कर रहे है कि हम शिक्षा की ओर वापस जा रहे हैं बल्कि हम इस मौके का इस्तेमाल फिल्मनिर्माताओं, शिक्षाविदों और देश के नागरिकों से आह्वान करने के लिए करना चाहते हैं कि वे इस लड़ाई को आगे ले जाएं. उन्होंने कहा कि परिसर अभी भी ऐसी तख्तियों और.िचत्रों से भरा हुआ है जिसमें ‘‘लोकतंत्र पर हमले’’ की निंदा की गई है. छात्रों को प्रताड़ित करने की संभावना को लेकर पूछे गए सवाल पर एक अन्य छात्र प्रतिनिधि राकेश शुक्ल ने कहा, ‘‘हमें निश्चित तौर पर इसका भय है.’’ एफटीआईआई हड़ताल ने पूरे देश का ध्यान आकृष्ट किया और भारतीय सिनेमा की प्रमुख हस्तियों ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया था.

 

20 अक्तूबर को आंदोलनकारी छात्रों और राठौड़ के बीच दिल्ली में बातचीत हुई थी लेकिन वह गतिरोध समाप्त करने में असफल रही थी.

 

एफएसए के विरोध जारी रखने के खतरे के बारे में पूछे जाने पर राठौड़ ने कहा कि ‘‘यदि वे किसी चीज के बारे में दृढ़ता से कुछ महसूस करते हैं’’ तो वे यह कर सकते हैं.

 

छात्र गत 12 जून से ही कक्षा का बहिष्कार कर रहे थे और वे चौहान को पद से हटाने की अपनी मांग पर अड़े हुए थे जबकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने उनकी नियुक्ति का मजबूती से समर्थन किया.

 

इस बीच मुंबई से प्राप्त समाचार के अनुसार जानेमाने फिल्मकारों दिबाकर बनर्जी, आनंद पटवर्धन तथा आठ अन्य लोगों ने एफटीआईआई के आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए तथा देश में बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में अपने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटा दिए.

 

हालांकि छात्रों ने बुधवार को अपनी हड़ताल तो वापस लो ली है पर छात्रों का कहना है कि यह विरोध अभी भी जारी है.

 

किस-किस ने सम्मान लौटाया?

अवॉर्ड लौटाने वालों में खोसला का घोसला, ओए लकी, लकी ओए, लव सेक्स और धोखा, बॉम्बे टॉकीज़ और डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी जैसी फिल्में बनाने वाले फिल्मकार दिबाकर बनर्जी शामिल हैं. उनके अलावा राम के नाम, फादर सन एंड होली वार और वॉर एंड पीस जैसी चर्चित फिल्में बना चुके फिल्मकार आनंद पटवर्धन.

 

गुलाबी गैंग समेत कई फिल्मों का निर्देशन कर चुकीं निष्ठा जैन, शूल और केरला कैफे जैसी फिल्मों में सिनेमैटोग्राफर का काम कर चुके हरि नायर,  फिल्म निर्देशिका लिपिका सिंह, फिल्मकार कीर्ति नाखवा और हिंदी फिल्म हंसी तो फंसी समेत कई फिल्मों के लेखक हर्ष कुलकर्णी शामिल हैं.

देखें वीडियो-

कलबुर्गी हत्याकांड, FTII विवाद के विरोध में 10 फिल्मकारों ने नेशनल ऑवार्ड लौटाया 

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Web Title: anupam kher on filmmakers
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