Special: हम दिल्ली नहीं बल्कि गैस के चैंबर में सांस ले रहे हैं!

By: | Last Updated: Thursday, 3 December 2015 4:18 PM
are we living in gas chamber

नई दिल्ली : दिल्ली की जहरीली हवा को लेकर कल एनजीटी यानि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई थी और आज दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रदूषण को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार दोनों से कहा कि ऐसा लग रहा है कि राजधानी में लोग जैसे गैस चैंबर के अंदर रह रहे हैं.  आखिर हाईकोर्ट को ऐसा क्यों कहना पड़ा?

 

देश की राजधानी दिल्ली की जिस हवा में आपके बच्चे रोज स्कूल जा रहे हैं. शाम को पार्क में खेल रहे हैं. वैसी हवा में चीन की राजधानी में सिर्फ स्कूल बंद नहीं होते, हाइवे, कारखाने, कंस्ट्रक्शन सब बंद कर दिया जाता है और ऑरेंज अलर्ट जारी हो जाता है.

 

बच्चे और बूढे घरों में बंद हो जाते हैं लेकिन यहां तो ऐसा लगता कि मानो कुछ हुआ ही नहीं. जबकि हाल ये है कि दिल्ली की हवा में घुला काला जहर दम घोंट रहा है. दिल्ली की हवा में घुल चुके इस काले जहर ने 11 साल के वीरेंद्र को बीमार कर दिया है. छोटे से वीरेंद्र को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी जिसकी वजह से वो पांच दिन तक स्कूल नहीं गया.

SPECIAL REPORT: दिल्ली बन गई गैस चेंबर 

हवा कितनी जहरीली है इसको नापने के लिए जो एयर क्वालिटी इंडेक्स होता है उसको 300 के पार नहीं जाना चाहिए. 300 के पार जाते ही लोगों को घर से बाहर निकलने से मना किया जाता है. लेकिन दिल्ली में तो प्रदूषण का स्तर पिछले 10 दिनों से करीब 400 के आसपास है.300 के पार होते ही हवा बीमार करने वाली हो जाती है. 400 के पार मतलब बहुत ज्यादा बीमार करने वाली हवा.

 

लेकिन दिल्ली के आनंद विहार में प्रदूषण के सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए हवा का ये कांटा आज 759 पर पहुंच गया. मतलब ऐसी हवा जो आपके दिल और फेफड़ों पर बहुत बुरा असर डाल सकती है

 

दिल्ली की इस जहरीली हवा का सबसे ज्यादा शिकार बच्चे क्यों हो रहे हैं वो भी जान लीजिए. जब हवा में प्रदूषण बहुत ज्यादा होता है तो हम ज्यादा सांस लेते हैं. बच्चे बड़ों के मुकाबले ज्यादा बार सांस लेते हैं.  बच्चे जब खेलते हैं तो सांस लेने की गति और भी बढ़ जाती है यानि प्रदूषण और ज्यादा सांसों के जरिए फेफड़ों तक पहुंचने लगता है.

 

 

साल 2014 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिल्ली के बच्चों पर एक सर्वे किया था इस सर्वे में दिल्ली के आधे बच्चों के फेफड़े बीमार मिले थे.

ऐसी बातें चौंकाती हैं. जर्मनी के स्कूल में जहरीली हवा का कांटा 300 पार होते ही बच्चों के क्लास के बाहर हर तरह के खेलकूद पर रोक लग जाती है दिल्ली में जहरीली हवा का पूरे साल का औसत ही 316 रहता है जितना होना चाहिए उससे 16 अंक ज्यादा. आनंद विहार जैसे इलाकों में 700 के पार पहुंच जाता है मतलब सीधा जहर सांस के जरिए शरीर में घुस रहा है.

 

लेकिन दिल्ली में ना तो कोई कुछ बताने वाला है और ना ही कोई सुध लेने वाला. सब राम भरोसे चले जा रहा है.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: are we living in gas chamber
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017