सतीश, तुम्हारी शहादत का कर्ज हम कभी नहीं उतार पाएंगे !

By: | Last Updated: Sunday, 6 December 2015 3:45 PM
Army pays tribute to Naik Satish Kumar

नई दिल्ली: तिरंगे में लिपटे सतीश कुमार अपने वतन के लिए मिट गए. वो आखिरी सांस तक दुश्मनों से लोहा लेते रहे. देश की राजधानी दिल्ली से करीब सवा सौ किलोमीटर दूर हरियाणा के भिवानी ही लाल तो था सतीश. जिसकी बहादुरी को सलाम करने के लिए पूरा गांव जुटा.

 

सतीश के अंतिम संस्कार में जो भीड़ आई उसमें पहचान पाना मुश्किल था कि सतीश की मां कौन सी है क्योंकि भिवानी के माइकलां गांव की हर मां सतीश के लिए आंसू बहा रही है

 

शहीद सतीश के घर में आज मामा की बेटी की शादी थी. सारी तैयारियां हो चुकी थीं लेकिन बारात की जगह तिरंगे में लिपटा हुआ सतीश का शव घर पहुंचा है. सतीश ने तो पहले ही कह दिया था कि वो शादी में नहीं आ पाएगा लेकिन ये नहीं बताया था कि फिर कभी नहीं आएगा.

कर चले हम फिदा..शहीद नायक सतीश तुम्हारी शहादत को देश हमेशा याद रखेगा 

24 घंटे के भीतर प्रमिला की जिंदगी बदल गई. गुरुवार रात को ही पति से बात हुई थी. सतीश ने हाल-चाल लिया पत्नी का, मां-बाप का, खेती-बाड़ी का और बच्चों का भी लेकिन प्रमिला कहां जानती कि वो अपने पति से आखिरी बार बात कर रही है.

 

शहीद सतीश के दो बच्चे हैं 10 साल की रितिका जो पांचवी क्लास में पढ़ती है और 8 साल का नितिन जो दूसरी कक्षा का छात्र है. इन मासूम बच्चों ने अपने पिता को खो दिया है. सतीश को बस अपने बच्चों की पढ़ाई और उनकी खुशियों की चिंता थी.

सतीश की बेटी बताती है कि दो दिन पहले बात हुई बस पूछा कि ठीक हो. पापा कहते कहना माना करो. घूमने नहीं लेकर जाते थे कुछ बातचीत नहीं होती थी बस खुशी के बारे में पूछते थे.

 

10 साल की यह मासूम बच्ची अपने पिता को याद करती है तो उसका गला रूंध जाता है. दुनिया की कोई ताकत ये अंदाजा नहीं सकती कि रितिका और नितिन ने क्या खोया है.

 

देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले सतीश के घर की तीन पीढ़ियां सेना में अपनी सेवा दे चुकी हैं. पिता आजाद सिंह बीएसएफ में इंस्पेक्टर हुआ करते थे. दादा भी सेना का हिस्सा रह चुके हैं. सतीश घर में सबसे छोटे थे और मां-बाप के लाडले. आखिरी बार जब पिता से बात हुई तो बस इतना कहा था कि मिशन पर हूं.

 

21 राष्ट्रीय राइफल्स के नायक सतीश कुमार पिछले डेढ़ साल से जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में तैनात थे. दो दिन पहले गुरुवार रात को सतीश की अपने परिवार से बात हुई थी और परसों यानि शुक्रवार को कुपवाड़ा के हंदवाड़ा में घने जंगलों में आर्मी ने आतंकियों की तलाश में एक ऑपरेशन शुरू किया था.  नायक सतीश कुमार इस टीम का हिस्सा थे.

 

सेना को शक था कि जंगल के एक हिस्से में कुछ आतंकी छिपे हुए हैं. सेना के जवान जैसे ही उस हिस्से की तरफ बढ़े आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. नायक सतीश कुमार मुठभेड़ में बुरी तरह घायल हो गए थे. जवानों ने मुठभेड़ में दोनों आतंकियों को मार गिराया लेकिन नायक सतीश कुमार शहीद हो गए.

 

सेना को शक है कि जंगल में अभी और भी आतंकी छिपे हो सकते हैं इसलिए ये ऑपरेशन अभी जारी है. श्रीनगर से सतीश का शव जैसे ही हरियाणा में उनके गांव पहुंचा मानो पूरा भिवानी चीखों से गूंज उठा. सतीश के शव को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया.

 

सतीश को जब आखिरी बार विदाई दी जा रही थी तो वहां सतीश अमर रहे के नारे लग रहे थे. सतीश के परिवार और गांव को नहीं पूरे देश को उनकी शहादत पर गर्व है. ये देश सतीश की शहादत को सलाम करता है. एबीपी न्यूज़ भी शहीद सतीश को को सलाम करता है.

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Web Title: Army pays tribute to Naik Satish Kumar
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