भारत आतंकवाद को बढ़ावा नहीं देगा: अरुण जेटली

By: | Last Updated: Monday, 6 April 2015 2:23 PM
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नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा कि देश में न तो कर आतंकवाद को बढ़ावा दिया जाएगा, न इसे टैक्स हैवेन ही बनने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि जो लोग विदेशों में जमा अपनी अज्ञात संपत्ति का खुलासा करेंगे, उनके साथ सरकार नरम रुख अपनाएगी और इस दिशा में एक तर्कसंगत मार्ग अपनाया जाएगा.

 

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक सम्मेलन में जेटली ने मौजूदा संसद सत्र में अखिल भारतीय स्तर पर वस्तु एवं सेवा कर लागू करने से संबंधित विधेयक लाने और नौकरशाही में फैसला लेने की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए कानून में जरूरी संशोधन करने का भी वादा किया.

 

उन्होंने साथ ही कहा कि भूमि अधिग्रहण पर पिछला कानून गांव विरोधी है.

 

मंत्री ने कहा, “हम टैक्स हैवेन नहीं हैं और न ही बनना चाहते हैं. भारत की स्थिति इतनी खराब नहीं है कि कर से संबंधित हर मांग को कर आतंकवाद कह दिया जाए.”

 

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय में कई विदेशी फंड और कंपनियों को कर भुगतान करने के लिए नोटिस जारी किया गया है और कई पक्ष उससे नाराजगी जता रहे हैं.

 

उन्होंने कहा कि वह अघोषित विदेशी आय एवं संपत्ति (कराधान) विधेयक, 2015 को गत महीने लोकसभा में पेश कर चुके हैं फिर भी इस संबंध में सुझावों का स्वागत किया जाएगा और विधेयक में आवश्यकता होने पर सुधार किया जाएगा.

 

उन्होंने कहा कि पहले की जा चुकी इस तरह की गतिविधि के लिए नियम पालन करने की एक सीमित अवधि की सुविधा दी जाएगी.

 

विधेयक में विदेशों में जमा काला धन पर 300 प्रतिशत तक के जुर्माने के साथ ही तीन से 10 साल तक के कठोर कारावास की सजा का भी प्रावधान है.

 

विधेयक में हालांकि विदेशों में जमा काला धन वापस लाने पर कुछ नरमी का भी प्रावधान है, जिसमें ऐसे लोगों को एक निर्धारित समयावधि में अपनी ऐसी संपत्तियों की घोषणा करने पर कुछ कर अदायगी के बाद शेष राशि को अपने पास रखने की अनुमति होगी.

 

प्रावधानों के अनुसार, भारत से बाहर ऐसी संपत्ति की घोषणा पर 30 प्रतिशत कर और इतनी ही राशि का जुर्माना देय होगा. यानी प्रभावी कर 60 प्रतिशत होगा, जिसका अर्थ यह हुआ कि व्यक्ति को 40 प्रतिशत राशि अपने पास रखने का अधिकार होगा.

 

मंत्री ने कहा कि भारत अमेरिकी वैश्विक कर वंचना कानून ‘फॉरेन एकाउंट्स टैक्स कंप्लायंस-201’ पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हो गया है, जिसमें नागरिकों द्वारा कर चोरी रोकने और दोनों ओर के संस्थानों द्वारा धन की हेराफेरी संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान का प्रावधान है.

 

भूमि अधिग्रहण संबंधी विधेयक पर जेटली ने कहा कि 2013 में पारित हुआ भूमि अधिग्रहण कानून किसान विरोधी था, इसलिए इसकी जगह नए भूमि कानून की जरूरत है.

 

कंपनी कानून -2013 में भी उन्होंने कई संशोधन की जरूरत बताई. उन्होंने सेवा निवृत्त अधिकारियों पर विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही कई जांचों का हवाला दिया.

 

उन्होंने कहा कि फैसले लेने में हुई भूल और फैसले लेने में भ्रष्टाचार के बीच फर्क किए जाने की जरूरत है.

 

जेटली ने कहा, “भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की भाषा व्यापक स्तर पर अधिकारियों को फैसले लेने से रोक रही है.”

 

वस्तु एवं सेवा कर लागू किए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि संसद के बजट सत्र में ही इससे संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा.

 

भूमि अधिग्रहण कानून 2013 को त्रुटिपूर्ण बताते हुए जेटली ने कहा, “2013 का भूमि अधिग्रहण कानून ग्रामीण भारत के लिए बेहद हानिकारक था.”

 

उन्होंने कहा, “इसमें ग्रामीण बुनियादी ढांचे के लिए कोई प्रावधान नहीं है. यहां तक कि सिंचाई के लिए भूमि अधिग्रहित करने को भी कानून में जगह नहीं दी गई है. ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए भी भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं है.”

 

लोकसभा ने भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा और पारदर्शिता, पुनर्वास एवं पुनस्र्थापना अधिकार (संशोधन) विधेयक को पारित कर दिया है, लेकिन राज्यसभा में यह पारित नहीं हो सका है. जिसके बाद इस बारे में फिर से अध्यादेश लाया गया.

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