बेबाकी में शौरी की सानी नहीं!

By: | Last Updated: Saturday, 2 May 2015 2:56 PM
Arun Shourie_

नई दिल्ली: अपनी बेबाक बोली के लिए जाने जाते हैं देश के जाने-माने लेखक, पत्रकार अर्थशास्त्री और राजनेता अरुण शौरी. साल 2009 की बात है, बीजेपी को लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा था.

 

लोकसभा चुनाव में मिली हार के लिए बीजेपी के भीतर से जिम्मेदारी तय करने की बात हो रही थी, जिस किसी ने बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष राजनाथ सिंह से हार पर सवाल किया उसे हाशिये पर धकेल दिया गया.

 

ऐसे में अरुण शौरी के इस बयान ने खूब सुर्खियां बटोरी थी. बीजेपी नेता अरुण शौरी ने खुद अपनी पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष राजनाथ सिंह की तुलना ‘हम्टी डम्पटी’ से कर दी. शौरी ने कहा राजनाथ सिंह कल्पना लोक में जीने वाले व्यक्ति हैं.

 

अरुण शौरी यहीं नहीं रुके उन्होंने बीजेपी के तत्कालीन दिग्गज नेताओं पर हमला करते हुए यहां तक कह दिया कि आरएसएस को बीजेपी मुख्यालय पर कब्जा कर लेना चाहिए.

 

अरुण शौरी को इन बेबाक बोली के चलते पार्टी की नाराजगी झेलनी पड़ी और शौरी तीसरी बार राज्यसभा जाने से रह गए. 

 

अरुण शौरी ने 2009 लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लाल कृष्ण आडवाणी के बदले नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए योग्य बताकर तब बीजेपी में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी. कहा जाता है तभी से पार्टी के दूसरे पंक्ति के नेता अरुण शौरी को दरकिनार करने में लगे हैं.

 

अमेरिका से अर्थशास्त्र में पीएचडी करने के बाद अरुण शौरी ने कई सालों तक विश्व बैंक में काम किया. इसके बाद 70 के दशक में शौरी भारत लौट आए और जेपी आंदोलन से जुड़ गए. 1975 में इमरजेंसी के समय शौरी ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के लिए सक्रिय रूप से लिखना शुरू किया और जल्द ही उसी अखबार के संपादक बन गए.

 

शौरी को भारत में खोजी  पत्रकारिता का जनक माना जाता है. संपादक रहते हुए उन्होंने भारत के बड़े कारोबारियों के खिलाफ कई खुलासे किये. शौरी जिस अखबार के संपादक थे उसने ही चर्चित बोफोर्स दलाली घोटाले का खुलासा किया.       

 

1988 में मानहानि बिल को लेकर जब प्रेस की आजादी पर अंकुश लगाने की कोशिश की गई तो अरुण शौरी ने इसके खिलाफ भी लड़ाई लड़ी और कामयाब हुए. विश्व बैंक में नौकरी, शिक्षण और पत्रकारिता के बाद शौरी ने राजनीति में कदम रखा और वो भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गए.

 

अपनी ईमानदार छवि और अनुभव की वजह से अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्हें अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली. उन्होंने विनिवेश और आईटी मंत्री जैसे कई अहम महकमों को संभाला.

 

अरुण शौरी का जन्म 2 नवंबर 1941 को पंजाब के जालंधर में हुआ था. शौरी के पिता हरिदेव शौरी इंडियन सीविल सेवा के अधिकारी थे. देश के बंटवारे से पहले इनके पिता लाहौर में मजिस्ट्रेट थे. विभाजन के बाद इनका पूरा परिवार दिल्ली आ बसा था.

 

इनकी शुरुआती पढ़ाई मॉर्डन स्कूल बाराखंबा से हुई. उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से हुई. अर्थशास्त्र में डॉक्ट्रेट की उपाधि के लिए सिराक्यूज विश्वविद्यालय अमेरिका के मैक्सवेल स्कूल को चुना. डॉक्ट्रेट करने के बाद शौरी 9 साल तक विश्व बैंक में रहे. अरुण शौरी भारत के योजना आयोग में सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके हैं. शौरी को पद्मश्री और पद्मभूषण सम्मान भी मिल चुका है.

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