नर्स अरुणा को 42 साल तक मौत देने वाला मिला, ABP से कहा- 'मुझे पछतावा, बहुत पछतावा है'

By: | Last Updated: Monday, 18 May 2015 1:56 PM
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पारपा: मुंबई के केईएम हॉस्पिटल की नर्स अरुणा शानबॉग को जिसने 42 साल तक मौत से बदतर जिंदगी दी, उसे उस हालत में पहुंचाने के लिए जो शख्स जिम्मेदार था उसे 7 साल की सजा हुई थी. नाम था सोहनलाल वाल्मीकि. सोहनलाल सजा काटने के बाद कहां गया किसी को पता नहीं था लेकिन एबीपी न्यूज ने उस गुनहगार को ढूंढ़ निकाला है.

 

इसी साल 18 मई को मौत की नींद सो जाने वाली अरुणा शानबॉग सिर्फ एक महिला नहीं थी. वो मौत से बदतर जिंदगी की वो दास्तान बन गई जिसे मुंबई के केईएम अस्पताल के एक ही बिस्तर पर 42 बरस काटने को मजबूर कर दिया गया.

 

आप ने अब तक सिर्फ उसके गुनहगार का नाम सुना होगा लेकिन एबीपी न्यूज ने उस गुनहगार को ढूंढ़ निकाला है.

 

ये गुनाहगार है सोहनलाल वाल्मीकि, जो अब अपना पैतृक गांव छोड़कर हापुड़ के पारपा गांव में रह रहा है. वह गांव में मजदूरी का काम करता और उसे अपने गुनाह का पछतावा और पश्चाताप है. हालांकि उसका कहना है कि उसे याद नहीं है उस भयानक दिन को क्या हुआ था.

 

सोहनलाल ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत में बार बार कहा कि उसे पछतावा और अफसोस है, लेकिन अब भी वह बलात्कार और चोरी से इनकार करता है, जोकि हैरान करने वाला है.

 

क्या था सोहनलाल का गुनाह?

 

सोहनलाल का गुनाह देश के आपराधिक इतिहास का सबसे भयावह गुनाह कहा जाता है तो इसकी भी वजह है. अरुणा शानबॉग उसी केईएम अस्पताल में नर्स थी और 23 नवंबर 1973 को उसी अस्पताल में सोहनलाल वाल्मीकि नाम के एक सफाई कर्मचारी ने अप्राकृतिक बलात्कार किया. यही नहीं कुत्तों की एक चेन से उसका गला घोंट कर जान लेने की कोशिश भी की.

 

अरुणा जिंदा तो बच गई लेकिन उसे मिली एक ऐसी जिंदगी जिसमें जिस्म तो सांसे ले सकता था लेकिन उस जिस्म के भीतर मौजूद अरुणा हमेशा के लिए मर चुकी थी.

 

अरुणा अस्पताल के ही एक डॉक्टर से प्यार करती थी और शादी करने वाली थी. बदनामी ना हो इसलिए अस्पताल ने बलात्कार की बात पर पर्दा डाल दिया. उसका गुनहगार सोहनलाल पकड़ा तो गया लेकिन बलात्कार के जुर्म में नहीं, केवल हत्या की कोशिश के जुर्म में सोहनलाल को छह बरस की कैद हुई और फिर साल 1980 में रिहाई भी हो गई. तब से 35 बरस तक किसी को नहीं पता था कि सोहनलाल कहां है क्या करता है और उसे अपने किए का कोई पछतावा है भी या नहीं. जीते जी अरुणा की जिंदगी की जहन्नुम बना देने वाले उस गुनहगार ने एबीपी न्यूज़ से कहा कि उस दिन जो कुछ हुआ उसका उसे पछतावा है.

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