अरुणाचल: गोहत्या को आधार बनाकर की गई थी राष्ट्रपति शासन की सिफारिश

By: | Last Updated: Thursday, 28 January 2016 11:50 AM
Arunachal Pradesh: Governor cites ‘cow slaughter’ protest to justify president rule

नई दिल्ली : अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है, लेकिन इसे लेकर बवाल रुकने का नाम नहीं ले रहा है. अरुणाचल प्रदेश में जिस आधार पर राष्ट्रपति शासन लागू किया गया है, वो आधार सवाल के घेरे में आ गया है.

दरअसल, अरुणाचल के राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजकोहवा ने गोहत्या को आधार बनाकर सूब में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की थी और यही विवाद की जड़ बन गया है.

अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक ज्योति प्रसाद राजकोहवा ने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करते हुए अपनी रिपोर्ट में लिखा कि गोहत्या को लेकर राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है.

अखबार का कहना है कि राज्यपाल ने राज्य की कानून व्यवस्था को खराब बताने के लिए अपनी रिपोर्ट में एक गाय ‘मिथुन’ की तस्वीर भी भेजी, जिस गाय की राजभवन के बाहर हत्या की जा रही है.

ये खुलासा तब हुआ जब सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस की ओर से पेश हुए वकील फाली एस नरीमन और कपिल सिब्बल ने ये जानना चाहा कि राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश किस तारीख को की थी. इसके बाद राज्यपाल के वकील सत्यपाल जैन ने इस रिपोर्ट को पेश किया.

आपको बता दें कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल को नोटिस भेजा है.

अरुणाचल प्रदेश में 26 जनवरी को राष्ट्रपति शासन लागू कर दी गई.

कब और क्या है राजनीतिक संकट

पिछले महीने 16 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश में तब राजनीतिक अस्थिरता शुरू हुई जब कांग्रेस के 21 बागी विधायकों ने बीजेपी के 11 विधायकों से हाथ मिला लिया और अन्य 2 निर्दलीय विधायक भी इस गुट के साथ आ गए.

बाद में कांग्रेस के बागी विधायकों ने मौजूदा मुख्यमंत्री नबाम तुकी की जगह कैलिखो पॉल को नेता चुन लिया. बागी कांग्रेस के विधायकों की जब स्पीकर ने सदस्यता रद्द की तो फिर बागी गुट ने बीजेपी के साथ मिलकर मौजूदा स्पीकर को ही हटा दिया. इस राजनीतिक खींचतान के बीच ये केस सुप्रीम कोर्ट में पहुुंच गया और अब भी ये केस सुप्रीम कोर्ट में है.

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान अरुणाचल प्रदेश का मुद्दा आया था तब कांग्रेस ने जमकर हंगामा किया था और संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी थी. तब कांग्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधित्व मंडल ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की थी और इस मसले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था. तब कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार राज्य सरकार को अस्थिर कर रही है.

आपको बता दें कि 60 सदस्यीय विधानसभा में 47 विधायक कांग्रेस के हैं, लेकिन जब 47 में से 21 कांग्रेसी विधायक ने बग़ावत का झंडा उठाया तो बीजेपी के 11 विधायक भी कांग्रेस के बाग़ी गुट के साथ खड़े हो गए. बाग़ी होने वालों में डिप्टी स्पीकर भी शामिल थे.

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Web Title: Arunachal Pradesh: Governor cites ‘cow slaughter’ protest to justify president rule
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