आरुषि केस में जज ने 'गणित के टीचर' और 'फिल्म डायरेक्टर' जैसा व्यवहार किया: हाई कोर्ट

हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रायल जज को खुद पर संयम रखकर तथ्यों को तोड़ना मरोड़ना नहीं चाहिए था. ट्रायल जज को चाहिए कि वो पारदर्शी और निष्पक्ष हो.

By: | Last Updated: Friday, 13 October 2017 9:54 AM
arushi talwar case, high court said CBI judge acted like film director

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री में कल इलाहबाद हाईकोर्ट ने आरुषि के माता पिता को बरी कर दिया. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में निचली अदालत के फैसले को लेकर कठोर टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने परिस्थित जन्य साक्ष्यों के आधार पर ही फैसला सुना दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि हत्या की वजह को लेकर स्थिति स्पष्ट ही नहीं है. सीबीआई अदालत ने कानून के बुनियादी नियम की अनदेखी की है.

सीबीआई कोर्ट ने सबूतों और गवाहों को दरकिनार किया
कोर्ट ने कहा कि आरुषि मामले को एक तरीके से एक मैथ की प्रॉब्लम की तरह सॉल्व किया है जो कि नहीं होना चाहिए था. क्योंकि कानून में सबूत और गवाह अहम माने जाते हैं ना की एक पहेली की तरह किसी केस को सॉल्व करना चाहिए. सीबीआई कोर्ट ने इस मामले में कहानी की तरह खुद ही मान लिया कि उस रात नोएडा के जलवायू विहार के L 32 फ्लैट में क्या हुआ था.

कानून के बुनियादी नियम को जज ने फॉलो नहीं किया
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सीबीआई कोर्ट के जज पर सख्त टिप्प्णी की. हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि मानो जज को कानून की सही जानकारी तक नहीं थी, इसी वजह से उन्होंने कई सारे तथ्यों को खुद ही मानकर फैसला दे दिया जो थे ही नहीं. ट्रायल जज एक गणित के टीचर की तरह व्यवहार नहीं कर सकता. ट्रायल जज ने L 32 में जो हुआ उसे एक फिल्म निर्देशक की तरह सोच लिया. कानून के बुनियादी नियम को जज ने फॉलो नहीं किया. ट्रायल जज को खुद पर संयम रखकर तथ्यों को तोड़ना मरोड़ना नहीं चाहिए था. ट्रायल जज को चाहिए कि वो पारदर्शी और निष्पक्ष हो. ऐसा लगता है कि ट्रायल जज अपनी कानूनी जिम्मेदारियों से अनभिज्ञ हैं.

आज हो सकती है जेल से रिहाई?
आरुषि के माता पिता राजेश तलवाल और नुपुर तलवार अभी गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हैं. हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें आज रिहा किया जा सकता है. जानकारी के मुताबिक तलवार दंपत्ति फैसले से खुश हैं और पूरी रात सो भी नहीं पाए.

कानूनी प्रक्रिया के तहत फैसला आने के बाद अब तलवार दम्पत्ति के वकील कोर्ट के ऑर्डर की कॉपी लेकर गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट लेकर पहुंचेंगे. इसके बाद सीबीआई कोर्ट रिलीज ऑर्डर जारी करेगी जिसे डासना जेल में देना होगा. इसके बाद ही तलवार दम्पत्ति की रिहाई हो सकेगी.

सीबीआई कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा
सीबीआई की विशेष अदालत ने राजेश-नुपुर तलवार दंपत्ति को अपनी बेटी आरुषि और घरेलू नौकर हेमराज के कत्ल का दोषी पाया था और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी. खंडपीठ ने तलवार दंपति की अपील पर सात सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और फैसला सुनाने की तारीख 12 अक्टूबर तय की थी.

सबसे चर्चित मर्डर केस?
पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले इस केस की कहानी 2008 में शुरू हुई थी. 16 मई 2008 को नोएडा के जलवायु विहार इलाके में 14 साल की आरुषि का शव बरामद हुआ. अगले ही दिन पड़ोसी की छत से नौकर हेमराज का भी शव मिला.

केस में पुलिस ने आरुषि के पिता राजेश तलवार को गिरफ़्तार किया. 29 मई 2008 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी. सीबीआई की जांच के दौरान तलवार दंपति पर हत्या के केस दर्ज हुए.

मर्डर केस में सभी पक्षों की सुनवाई के बाद सीबीआई कोर्ट ने 26 नवंबर 2013 को नुपुर और राजेश तलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई. सीबीआई के फैसले के खिलाफ़ आरुषि की हत्या के दोषी माता-पिता हाई कोर्ट गए और अपील दायर की. राजेश और नुपुर फिलहाल गाजियाबाद की डासना जेल में सजा काट रहे हैं.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: arushi talwar case, high court said CBI judge acted like film director
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017