केजरीवाल का क्या होगा ?

By: | Last Updated: Monday, 10 November 2014 4:52 PM

नई दिल्ली : दिल्ली के विधानसभा चुनाव के नतीजे आम आदमी पार्टी के लिए सिर्फ प्रतिष्ठा की लड़ाई नहीं है इन नतीजों पर पार्टी का राजनीतिक भविष्य टिका है. आंदोलन की राजनीति से दिल्ली में पैदा हुई राजनीतिक पार्टी के लिए दूसरा विधानसभा चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है.

 

14 फरवरी को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी थी. केजरीवाल अपनी मर्जी का लोकपाल दिल्ली में लागू करवाना चाहते थे. लागू नहीं करवा पाए तो इस्तीफा दे दिया. सोचा तो ये था कि राजनीतिक शहादत मिलेगी. दरअसल केजरीवाल दिल्ली नहीं देश पर परचम लहराने का सपना देख रहे थे. दिल्ली में सीएम की कुर्सी छोड़ने के बाद ही वो लोकसभा चुनाव में कूद पड़े. केजरीवाल खुद मोदी को चुनौती देने के लिए बोरिया बिस्तर लेकर काशी चले गए थे.

 

आम आदमी पार्टी ने पूरे देश में चुनाव लड़ा. 432 सीटों पर आम आदमी पार्टी ने अपने उम्मीदवार उतारे. लेकिन जीत सिर्फ चार सीटों पर मिली. विधानसभा चुनाव में पहली बार में ही 70 में से 28 सीटें जीतने वाली पार्टी लोकसभा चुनाव में खाता भी नहीं खोल पाई.

 

लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद आम आदमी पार्टी के राजनीतिक अस्तित्व पर सवाल उठने लगे थे. पीएम का सपना देख रहे केजरीवाल के हाथ से दिल्ली भी छूट चुकी थी. पहले तो सीएम पद पर इस्तीफे पर सवाल उठाने वालों को केजरीवाल चुप कराते रहे लेकिन धीरे-धीरे उन्हें भी एहसास हो गया कि गलती हो गई है

 

केजरीवाल दोबारा दिल्ली में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुट गए. दिल्ली में चुनाव कराने की मांग करते रहे.. लेकिन दिल्ली विधानसभा भंग होने के बाद दिल्ली का पहला ओपिनियन पोल उनके पक्ष में जाता दिखाई नहीं दे रहा. केजरीवाल को पिछली बार की 28 सीटों के मुकाबले 18 सीटें ही मिलती दिखाई दे रही हैं जबकि बीजेपी को 46 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं. ओपिनियन पोल की ये तस्वीर आम आदमी पार्टी के लिए किसी झटके से कम नहीं है. लेकिन ओपिनियन पोल में दो बातें अरविंद केजरीवाल के पक्ष में जाती दिखाई दे रही हैं पहली केजरीवाल का मुख्यमंत्री के तौर पर किया काम.

 

केजरीवाल सरकार के 49 दिन के काम से 61 फीसदी लोग खुश हैं. सिर्फ 38 फीसदी लोगों को केजरीवाल के काम से निराशा हुई.  दूसरी बात ये ओपिनियन पोल के मुताबिक सीएम पद के लिए केजरीवाल पहले नंबर पर हैं. 39 फीसदी लोग केजरीवाल को दिल्ली के अगले मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं. बीजेपी के हर्ष वर्धन उनसे थोड़ा कम 38 फीसदी लोगों की सीएम पद की पसंद हैं. जबकि 4 फीसदी लोगों ने अरविंदर सिंह लवली को सीएम पद के लिए अपनी पसंद बताया है.

 

आम आदमी पार्टी भी मानती है कि देश में मोदी की लहर है. मोदी लहर का असर हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव में दिखाई भी दिया है. लेकिन आम आदमी पार्टी दिल्ली में मोदी लहर को रोकने का दावा कर रही है.

 

आम आदमी पार्टी मोदी लहर को रोक पाएगी ऐसा ओपिनियन पोल में होता दिखाई नहीं दे रहा. अब अगर दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी पहले से बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाती तो केजरीवाल के नेतृत्व पर सवाल उठेंगे. पहले से पार्टी के अंदर चली आ रही बगावत और मुखर होगी और खतरे में होगा आम आदमी पार्टी का राजनीतिक अस्तित्व.

 

 

 

 

 

 

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Web Title: arvind kejriwal
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