आखिर मोदी से क्या चाहते हैं केजरीवाल?

By: | Last Updated: Wednesday, 11 February 2015 2:49 PM

नई दिल्ली: अरविंद केजरीवाल कल पीएम नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे. इससे पहले केजरीवाल ने बुधवार को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की. केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से जो वादे किये हैं उन्हें पूरा करने के लिए उन्हें चाहिए मोदी सरकार की मदद. आखिर मोदी से क्या चाहते हैं केजरीवाल.

 

अपनी पार्टी की प्रचंड जीत के अगले ही दिन मनोनीत मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय मंत्रियों से भेंट-मुलाकात का दौर शुरू कर दिया. बुधवार की सुबह केजरीवाल पहले केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू से मिले….इसके बाद अरविंद केजरीवाल मिलने पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पास. और गुरुवार की सुबह केजरीवाल मिलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से.

 

केंद्रीय मंत्रियों से ताबड़तोड़ मुलाकात के पीछे केजरीवाल का सबसे बड़ा उद्देष्य है दिल्ली की जनता से किये गए वादों को पूरा करने के लिए केंद्र की सरकार से मदद हासिल करना. आखिर वो कौन से वादे हैं जिन्हें केजरीवाल बिना केंद्र की मदद के पूरा नहीं कर सकते.

 

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से वो कौन से ऐसे वादे किये हैं जिन्हें केंद्र सरकार की मदद के बिना पूरा करना केजरीवाल के लिए मुश्किल होगा.

 

 

1. पुलिस

दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के पास है. दिल्ली सरकार का उस पर नियंत्रण नहीं है. पिछली बार जब दिल्ली में 49 दिन की आम आदमी पार्टी की सरकार थी, तो अरविंद केजरीवाल ने कुछ पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए धरना-प्रदर्शन तक दिया था.

 

दिल्ली पुलिस दिल्ली सरकार के तहत आए, इसको लेकर भी केजरीवाल केंद्र से मांग कर सकते हैं. दिल्ली की कानून-व्यवस्था को लेकर तमाम सवाल उठते रहते हैं. अपराध के ग्राफ में बढ़ोतरी के लिए भी दिल्ली सरकार यह कहकर पल्ला झाड़ती नजर आती है कि पुलिस उसके तहत नहीं है.

 

2. पानी

 

दिल्ली पानी के लिए पूरी तरह से हरियाणा पर निर्भर है. केंद्र और हरियाणा में बीजेपी की सरकार है. हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर नीति आयोग की मीटिंग के बाद बाकायदा यह चेतावनी दे चुके हैं कि दिल्ली को अपने पानी का इंतजाम खुद करना पड़ेगा. जाहिर है केजरीवाल के सामने  मुफ्त पानी मुहैया कराने से ज्यादा समय पर पर्याप्त पानी दिलाने की चुनौती होगी और इसमें केंद्र सरकार की भूमिका अहम रहेगी.

 

3. जमीन

 

दिल्ली की जमीन भी डीडीए के तहत आती है. डीडीए दिल्ली सरकार के तहत ना होकर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के तहत है. आम आदमी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में कहा है कि दिल्ली में 20 नए कॉलेज खोले जाएंगे. ऐसे में इन कॉलेजों के लिए जमीन डीडीए से लेनी पड़ेगी. साथ ही कोई भी प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए दिल्ली सरकार को केंद्र की ओर देखना पड़ेगा. जाहिर है केंद्र सरकार की मदद के बिना आम आदमी पार्टी अपना वादा नहीं पूरा कर सकती.

 

4. पूर्ण राज्य का दर्जा

 

केजरीवाल ने दिल्लीवालों से वादा किया है कि उनकी सरकार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाएगी. दिल्ली विधानसभा से अगर पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का प्रस्ताव पास करके केंद्र को भेज भी दिया जाएगा, तो इस मामले पर केंद्र की मदद के बिना प्रस्ताव पास कराना मुश्किल होगा. इतना ही नहीं प्रस्ताव को पास करने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है. यह बहुमत केंद्र की बीजेपी सरकार के पास भी नहीं है. राज्यसभा में तो बीजेपी के पास सामान्य बहुमत तक नहीं है. आम आदमी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में इस प्रस्ताव को शामिल किया है.

 

5. जनलोकपाल बिल

 

दिल्ली में जनलोकपाल बिल पास कराने के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार को उसे केंद्र सरकार को भेजना पड़ेगा. यह प्रस्ताव केंद्र की मंजूरी से ही पास होगा. इतना ही नहीं, कोई भी बिल जो विधानसभा में पास होगा, उसको केंद्र को भेजना पड़ेगा. बिना केंद्र सरकार की सहमति के कानून बनाना केजरीवाल के लिए मुश्किल हो जाएगा.

 

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Web Title: arvind kejriwal and pm narendra modi
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