अदावत से मुलाकात तक की कहानी

By: | Last Updated: Thursday, 12 February 2015 3:12 PM
arvind kejriwal meet modi

मनोनीत मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस तस्वीर को 2015 की सबसे चर्चित तस्वीर कहा जा रहा है. इस मुलाकात को  साल की सबसे बड़ी मुलाकात कही जा रही थी. ये भारतीय राजनीति के दो धुर विरोधियों के बीच पहली मुलाकात थी

दिल्ली के मनोनीत मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पीएम के सरकारी आवास 7 रेस कोर्स पर करीब साढ़े 10 बजे पहुंचे. बाहर मीडिया का भारी जमावड़ा लगा था. चंद मिनटों बाद अरविंद केजरीवाल उस कमरे में पहुंचते हैं जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले से केजरीवाल का इंतजार कर रहे थे. प्रधानमंत्री केजरीवाल को फूलों का गुलदस्ता देकर स्वागत करते हैं, फिर केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से हाथ मिलाते हैं और फिर उन्हें बैठने का इशारा करते हैं, और फिर शुरू होती है अरविंद केजरीवाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मुलाकात.

 

अरविंद केजरीवाल- 14 फरवरी को रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण समारोह होगा. आप अगर इस कार्यक्रम में आते तो हमें बहुत खुशी होती.

 

नरेंद्र मोदी-  हमें भी आपके कार्यक्रम में शामिल होकर अच्छा लगता लेकिन पहले से हमारे कार्यक्रम तय हैं. उस दिन हम महाराष्ट्र के बारामती में रहेंगे जहां कई कार्यक्रम निर्धारित हैं. हम इसके बाद भी मिलते रहेंगे.

 

अरविंद केजरीवाल- दिल्ली में हमें भी लोगों का भारी समर्थन मिला है. आपकी सरकार को केंद्र में भारी बहुमत हासिल है. ये दिल्लीम के विकास के  लिए एक सुनहरा मौका है. हम चाहें तो दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिला सकते हैं.

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल के बीच ये मुलाकात आज भले बेहद गर्मजोशी के साथ हुई हो लेकिन इन दोनों के बीच अदावत की एक बड़ी और पुरानी कहानी है.

 

इसी साल की बात है. दिल्ली विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिल्ली के रामलीला मैदान में पहली चुनावी सभा हुई. इस रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने केजरीवाल का नाम तो नहीं लिया लेकिन उनके चुनावी भाषण में निशाने पर थे अरविंद केजरीवाल. मोदी ने केजरीवाल के उस पुराने बयान पर हमला बोला जिसमें केजरीवाल ने खुद को अराजकतावादी बताया था. प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में केजरीवाल की ये कह कर आलोचना की कि वो सरकार चलाने से ज्यादा धरना प्रदर्शन में विश्वास रखते हैं.

 

विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अरविंद केजरीवाल ने सीधे तौर पर कभी नरेंद्र मोदी पर निशाना नहीं साधा हालांकि उनके निशाने पर पार्टी हमेशा रही. आम आदमी पार्टी ने चुनावी रणनीति को ध्यान में रख कर ऐसा किया…क्योंकि पार्टी को लगता था कि नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय छवि पर हमला करने से चुनाव में नुकसान हो सकता है.

 

नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल के बीच विरोध की कहानी पिछले साल यानी 2014 से शुरू होती है. लोकसभा चुनावों की भी घोषणा हो चुकी थी. नरेंद्र मोदी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे और बीजेपी ने उन्हें अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर चुकी थी. केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर मोदी को चुनौती देने की तैयारी कर रहे थे.  इसी कोशिश में केजरीवाल चार दिन के दौरे पर गुजरात आए थे. गुजरात आते ही केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी के विकास के मॉडल पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए. दरअसल केजरीवाल वाराणसी में मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की तैयारी का गुजरात से आगाज करना चाहते थे. यही वजह थी कि गुजरात सरकार केजरीवाल का मुकाबला करने के लिए पहले से तैयार थी. केजरीवाल दो दिन तक गुजरात के अलग-अलग हिस्सों में घूमते रहे और मोदी सरकार के कामकाज को लेकर हंगामा किया. 7 मार्च 2014 का दिन था. केजरीवाल ने मोदी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए अचानक एलान कर दिया कि वो नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए उनके मुख्यमंत्री निवास जा रहे हैं और उनसे मिलकर पूछेंगे कि गुजरात मॉडल की खामियों पर उनका क्या कहना है. केजरीवाल मोदी से मिलने के लिए अहमदाबाद से गांधीनगर रवाना हो गए. लेकिन मोदी के निवास स्थान से करीब तीन किलोमीटर पहले ही पुलिस ने अरविंद केजरीवाल को रोक लिया. 200 से ज़्यादा पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए थे. अरविंद केजरीवाल ने मीडिया से बातचीत में सवाल उठाया कि वह सिर्फ मोदी से मिलना चाहते हैं, और मिलने में उन्हें क्या आपत्ति है?

 

केजरीवाल को करीब दो घंटे तक वहां रोककर रखा गया. इस दौरान केजरीवाल की ओर से मनीष सिसोदिया मुख्यमंत्री कार्यालय भेजे गए और मोदी के पीए ने कहा कि आपका कागज रख लिया है, मोदीजी ने समय दिया तो भविष्य में मिलने बुलाएंगे, लेकिन करीब एक साल होने को आया, लेकिन मोदी ने केजरीवाल को समय नहीं दिया. आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल अब ठान चुके थे कि उनकी लड़ाई बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी से होगी. केजरीवाल ने अब बाराणसी का रुख किया.

 

धर्म नगरी वाराणसी. राजनीतिक रूप से पूरब की अहमियत को ध्यान में रख कर नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से चुनाव मैदान मैदान में उतरने का फैसला लिया था. पीएम उम्मीदवार मोदी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने के लिए केजरीवाल कमर कस चुके थे. एक सभा में केजरीवाल ने वाराणसी के लोगों से चुनाव लड़ने की इजाजत मांगी और लगे हाथ मोदी से भिड़ने का उन्होंने एलान कर दिया.

 

वाराणसी की सभा में नरेंद्र मोदी ने अरविंद केजरीवाल पर तो कुछ नहीं कहा लेकिन देश की बाकी सभाओं में उन पर जमकर हमला बोला. जम्मू की एक सभा में मोदी ने केजरीवाल का नाम लिए बिना उन्हें एक नया नाम दे दिया. मोदी ने केजरीवाल को पाकिस्तान का एजेंट करार दे दिया. मोदी ने केजरीवाल को एके 49 तक कह दिया. 

सोशल मीडिया पर केजरीवाल की खांसी पर चुटकियां तो ली ही जा रही थी इतना ही नहीं मोदी भी केजरीवाल पर चुटकी लेने से पीछे नहीं रहे. अन्ना के आंदोलन के दौरान भी केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी को गुजरात में लोकायुक्त को लेकर निशाना बनाया था.

 

करीब एक साल पहले जो अरविंद केजरीवाल मोदी से मिलने की कोशिश कर रहे थे और नहीं मिल पाए थे आखिरकार गुरुवार को केजरीवाल का एक साल का इंतजार खत्म हुआ.

 

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Web Title: arvind kejriwal meet modi
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