arvind kejriwal_delhi_election

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By: | Updated: 11 Feb 2015 03:41 PM

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव में अभूतपूर्व जीत हासिल करने के बाद अब भावी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती दिल्ली के 1.7 करोड़ लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने की है.

 

राष्ट्रीय राजधानी होने की वजह से दिल्ली का दर्जा एक अलग तरह का है और इसके कारण शहर राज्य के चार स्थानीय निकायों, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली पुलिस जैसे प्रमुख संगठनों का नियंत्रण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के हाथ में है.

 

इसलिए पानी और बिजली पर सब्सिडी का वादा घोषित करना और बात है, लेकिन कानून और प्रशासन, अनधिकृत कॉलोनियों को वैधता जैसे मुद्दों पर केजरीवाल को वादा पूरा करने में पापड़ बेलने पड़ सकते हैं.

 

दिल्ली की पूरी भूमि पर राज्य सरकार का अधिकार नहीं है, इसलिए झुग्गीवासियों के लिए स्थायी मकान देने के वादे अमल करने में दिक्कत है. शायद इसलिए केजरीवाल ने चुनाव परिणाम आने के अगले ही दिन बुधवार को शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू से मुलाकात करना मुनासिब समझा.

 

दिल्ली की पूर्व सचिव शैलजा चंद्रा के मुताबिक, "दिल्ली सरकार के पास अपनी कुछ जमीन हो, तभी उसका उपयोग इन कामों में किया जा सकता है. अन्यथा दिल्ली मास्टर प्लान के मुताबिक चिह्न्ति भूमि का इस्तेमाल सिर्फ वन, शिक्षा संस्थान और अस्पताल के लिए किया जाना है, तब दिल्ली सरकार कुछ खास नहीं कर सकती."

 

पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल में 2001-2004 तक मुख्य सचिव रही चंद्रा ने कहा, "विधेयक पारित करने की जहां तक बात है, लगभग सभी कानूनों के लिए आखिरी अनुमोदन केंद्र से लेना पड़ता है." ऐसा इसलिए है, क्योंकि राजधानी का दर्जा केंद्र शासित प्रदेश का है.

 

शैलजा के मुताबिक केजरीवाल अस्पताल और स्कूल निर्माण का आदेश दे सकते हैं, लेकिन इसके लिए दिल्ली सरकार के पास समुचित धन नहीं है.

 

उन्होंने कहा, "पूर्ण राज्य नहीं होने के कारण दिल्ली के पास धन की समुचित व्यवस्था नहीं है. दिल्ली सरकार बाजार से धन भी नहीं जुटा सकती. जहां तक सस्ती बिजली और पानी की बात है, तो सिर्फ सब्सिडी दी जा सकती है."

 

दिल्ली के पूर्व राज्यपाल तेजिंदर खन्ना ने कहा कि केजरीवाल को भले ही अपार जनमत मिला है, लेकिन अब उन्हें राजनीतिक खाई को पाटने के लिए मेहनत करनी होगी.

 

खन्ना ने कहा, "केजरीवाल को केंद्र और नगर निगमों के साथ संवाद जारी रखना होगा. तभी वे वादे पूरे कर सकते हैं." उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार की सफलता इसी में है कि वे किस तरह से साझा कोशिश सुनिश्चित कर सकते हैं.

 

एक विरोधी दल के नेता ने कहा कि केजरीवाल को जो भी ताकत मिली है उसका उपयोग सहभागिता की भावना जगाने में करना चाहिए और दिल्ली वासियों के लिए और अधिक अस्पताल तथा ओपीडी खोलने चाहिए और रिश्वत तथा भ्रष्टाचार रोकना चाहिए.

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