मोदी के मुरीद रहे हैं पनगढ़िया

By: | Last Updated: Monday, 5 January 2015 4:05 PM
Arvind Panagariya

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना आयोग की जगह गठित किए गए नीति आयोग के सदस्यों का एलान कर दिया गया है. अर्थशास्त्री अरविंद पनगढिया को इस आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है. नीति आयोग में कुल दस सदस्य होंगे.

बड़े अर्थशास्त्री अरविंद पनगढिया बने नीती आयोग के पहले उपाध्यक्ष

 

दुनिया के जाने-माने अर्थशास्त्री, चिंतक और विचारक प्रो अमर्त्य सेन ने जब नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का विरोध किया था तो मोदी के बचाव में दुनिया के जो दो दिग्गज अर्थशास्त्री सामने आए थे वे थे प्रो जगदीश भगवती और अरविंद पनगढ़िया.

 

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के 62 साल के वही प्रोफेसर अरविंद पनगढ़िया बने हैं योजना आयोग की जगह बने नीति आयोग के पहले उपाध्यक्ष.

 

प्रो अरविंद पनगढ़िया को खुली अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा पक्षधर माना जाता है. प्रो पनगढ़िया हमेशा से मानते रहे हैं कि देश का विकास दर तेजी से बढ़ेगा तो गरीबों की भी तरक्की होगी. इसलिए पनगढ़िया के नीति आयोग के उपाध्यक्ष बनने से साफ हो गया है कि मोदी सरकार का सबसे ज्यादा जोर विकास दर बढ़ाने पर होगा.

 

एशिययन डेवलपमेंट बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री रह चुके अरविंद पनगढ़िया से जब लोकसभा चुनाव से पहले सवाल किया गया था कि नई सरकार की सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी? तो उन्होंने कहा था नई सरकार को सबसे पहले तेजी से फैसले लेने पड़ेंगे. और जैसा कि देखा जाता है मोदी के पीएम बनने के बाद अलग-अलग मंत्रालयों में फैसले लेने में तेजी आई है.

 

2014 लोकसभा चुनाव के परिणाम अभी नहीं आए थे. तब उनसे पूछा गया था कि गुजरात मॉडल को आप कैसे देखते हैं? तो प्रो पनगढ़िया ने नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री के रूप में जबरदस्त तारीफ की. उन्होंने कहा था, ‘कुछ लोग कहते हैं कि गुजरात के लोग उद्यमी होते हैं. ऐसे तो मेरे राज्य राजस्थान में मारवाड़ी भी बहुत उद्यमी होते हैं तो उन मारवाड़ियों का क्या हुआ? वे आधे से ज़्यादा जाकर गुजरात में बैठे हैं, क्योंकि राजस्थान में प्रशासन बहुत कमज़ोर है. उद्योग-व्यापार विकास नहीं कर पाए हैं.’

 

जब पनगढ़िया से ये पूछा गया था कि मोदी ने ऐसा क्या कर दिया जो दूसरे मुख्यमंत्रियों ने नहीं किया- इसका जवाब प्रो पनगढ़िया ने इस तरह दिया- ‘कृषि को ले लें… कपास गुजरात की मुख्य फ़सल है, उसमें तेज़ी से विकास हुआ है. बीटी कॉटन महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश ने भी उगाना शुरू किया है लेकिन प्रति हेक्टेयर उत्पादकता गुजरात में सबसे ज़्यादा है. इसमें सिंचाई का महत्वपूर्ण योगदान है. इसके अलावा गुजरात में भूमिगत जल स्तर काफ़ी उठा है, ख़ासकर सौराष्ट्र में इसे काफ़ी ऊपर लाया जा सका है- हरियाणा और पंजाब के विपरीत जहां भूमिगत जलस्तर गिरा है. नीति के स्तर पर विस्तार के लिए मुख्यमंत्री अतिरिक्त सक्रिय रहे हैं….

 

इकॉनमी पर दस किताबें लिख चुके पनगढ़िया को 2012 में यूपीए सरकार में पद्मभूषण सम्मान मिल चुका है.

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Web Title: Arvind Panagariya
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