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By: | Updated: 20 Jan 2015 02:17 PM

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के आरोप में जेल में बंद संत आसाराम की अंतरिम जमानत की याचिका आज खारिज कर दी. कोर्ट ने एम्स के चिकित्सकों की रिपोर्ट पर विश्वास करते हुये कहा कि उन्हें आसाराम की सर्जरी की आवश्यकता महसूस नहीं हुयी है.

 

जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने आसाराम की जमानत याचिका खारिज करते हुये कहा, ‘‘हमें एम्स के विशेषज्ञों की राय अस्वीकार करने की कोई वजह नजर नहीं आती.’’ इस बीच, कोर्ट ने जोधपुर की अदालत से कहा है कि छह ‘महत्वपूर्ण गवाहों’ में से तीन से पूछताछ के लिये ‘प्रभावी कदम’ उठाये जायें. यह अदालत दैनिक आधार पर मुकदमे की सुनवाई कर रही है.

 

कोर्ट ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई कर रही अदालत में तीन अन्य प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद आसाराम फिर से जमानत याचिका दायर कर सकते हैं जिस पर अदालत मेरिट के आधार पर फैसला करेगी.

 

इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही कोर्ट ने आसाराम के वकील को यह स्पष्ट कर दिया कि मेडिकल आधार पर उन्हें अंतरिम जमानत देने के अनुरोध पर ही सुनवाई की जायेगी जैसा कि उनके पहले के वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने दलील दी थी.

 

आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा, ‘‘हां, मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत के लिये अर्जी है लेकिन मैं मेरिट पर भी कुछ कहना चाहता हूं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘तीन मुख्य गवाहों (लड़की और उसके माता पिता0 से पहले ही पूछताछ की जा चुकी है और तीन अन्य मुख्य गवाहों में से एक से आंशिक पूछताछ हो चुकी है. वैसे भी उनका कथित अपराध से कोई लेना देना नहीं है.’’ न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘हम आपको यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि आप उच्च न्यायालय नहीं गये तो हम आपको इसे यहां से वापस नहीं लेने देंगे और विस्तृत आदेश पारित करेंगे. हम आपको न्यायिक समय बर्बाद करने और फिर अर्जी वापस लेने की अनुमति नहीं देंगे. आप वहां :जेल: में हैं क्योंकि आपके खिलाफ गंभीर आरोप हैं.’’ वकील ने कहा, ‘‘फिर तो मेरे पास कोई विकल्प नहीं है’’ और इसके साथ ही उन्होंने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत के लिये बहस शुरू कर दी.

 

76 वर्षीय आसाराम बलात्कार के मामले में अगस्त, 2013 में गिरफ्तारी के बाद से ही जोधपुर की जेल में हैं.

 

सुनवाई के दौरान सिंह ने कहा कि वह एम्स के मेडिकल बोर्ड के इस निष्कर्ष पर संदेह नहीं कर रहे हैं कि फिलहाल आसाराम को किसी सर्जरी की जरूरत नहीं है लेकिन उनकी बीमारी का इलाज एम्स में ओपीडी मरीज के रूप में हो सकता है लेकिन जेल अस्पताल में इसका उपचार नहीं हो सकता है.

 

न्यायालय ने कहा कि आसाराम जोधपुर में स्थित विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श कर सकते हैं लेकिन यह विशेषज्ञ जेल में नहीं आयेगा.

 

शीर्ष अदालत ने निचली अदालत से कहा कि सुनवाई में विलंब नहीं किया जाये और मुख्य गवाहों से पूछताछ के लिये आवश्यक कदम उठाये जायें.

 

आसाराम के खिलाफ बलात्कार, आपराधिक साजिश और अन्य अपराधों के आरोप में जोधपुर की अदालत ने अभियोग निर्धारित किये हैं. यह मामला आसाराम द्वारा कथित रूप से जोधपुर के आश्रम में नाबालिग लडकी का यौन शोषण करने से संबंधित है.

 

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