हरियाणा और महाराष्ट्र में खत्म हुआ चुनाव प्रचार, अब मतदाताओं की बारी

By: | Last Updated: Monday, 13 October 2014 2:38 PM
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नई दिल्लीः हरियाणा और महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए गहमागहमी से भरा चुनाव प्रचार आज शाम समाप्त हो गया और इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां कांग्रेस तथा अन्य प्रतिद्वंद्वी पार्टियों पर निशाना साधा वहीं विरोधियों ने भी पलटवार किया.

 

पिछले कई दिनों से चल रहा चुनाव प्रचार का शोर आज शाम छह बजे लाउडस्पीकरों के शांत होने के साथ ही समाप्त हो गया और राजनीतिक दलों ने अपने कार्यकर्ताओं को घर घर जाकर मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने का जिम्मा सौंपा.

 

करीब पांच माह पहले ही लोकसभा चुनावों में मिली शानदार जीत के बीच मोदी ने धुआंधार प्रचार करते हुए दोनों राज्यों में 30 से ज्यादा रैलियां कीं. मोदी ने वंशवादी राजनीति और भ्रष्टाचार को लेकर विरोधियों पर निशाना साधा.

 

चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय चेहरे के बगैर बीजेपी मोदी पर काफी हद तक निर्भर दिखी. महाराष्ट्र में बीजेपी लंबे समय से अपनी सहयोगी रही शिवसेना से अलग हो गयी. महाराष्ट्र में विधानसभा की 288 सीटें हैं जबकि हरियाणा में 90 सीटें हैं.

 

चुनाव प्रचार के दौरान मोदी ने शिवसेना की आलोचना से परहेज किया लेकिन उन्होंने कांग्रेस और राकांपा पर जमकर निशाना साधा और कहा कि वे काफी भ्रष्ट हैं और पिछले 15 साल से राज्य को लूटते रहे हैं.

 

दूसरी ओर कांग्रेस ने पृथ्वीराज चव्हाण को, राकांपा ने अजीत पवार को और शिवसेना ने उद्धव ठाकरे को पेश किया.

बुधवार को हो रहे विधानसभा चुनावों को लोकसभा चुनावों के बाद प्रमुख राजनीतिक दलों की लोकप्रियता की पहली बड़ी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है. चुनाव प्रचार में बीजेपी ने कोई कसर नहीं छोड़ी और मोदी ने हरियाणा में 10 एवं महाराष्ट्र में 20 से ज्यादा रैलियां कीं. मतों की गिनती रविवार को होगी. महाराष्ट्र में 15 अक्तूबर को हो रहा चुनाव पिछले करीब 25 साल में पहला ऐसा चुनाव है जब प्रमुख राजनीतिक दल बिना किसी गठबंधन के मैदान में हैं.

 

बीजेपी 257 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि सहयोगी छोटे दल 31 सीटों पर मैदान में हैं. कांग्रेस और राकांपा ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.

 

शिवसेना और बीजेपी आखिरी बार 1989 से पहले हुए चुनाव में अलग अलग मैदान में उतरी थीं. उनका गठबंधन 1989 में हुआ था. शरद पवार नीत राकांपा की स्थापना 1999 में हुयी थी.

 

महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों ने मराठा अस्मिता, हिन्दुत्व, भ्रष्टाचार और विकास को रेखांकित किया.

 

महाराष्ट्र में 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 82 सीटें मिली थीं जबकि राकांपा को 62, शिवसेना को 45 और बीजेपी को 47 सीटों पर कामयाबी मिली थी. मनसे को 12 सीटें मिली थीं. कांग्रेस के अशोक चव्हाण को मुख्यमंत्री चुना गया था.

 

चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने विकास के मुद्दे पर जोर दिया जबकि शिवसेना ने अपने को महाराष्ट्र की ‘‘असली पहचान’’ के रूप में पेश किया. बीजेपी ने भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस.राकांपा पर जमकर हमला बोला. मोदी ने मतदाताओं से कहा कि वे कांग्रेस और राकांपा को ‘‘दंडित’’ करें जिन्होंने लोगों को ‘‘लूटा.’’

 

हरियाणा के चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री ने सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा से जुड़े भूमि सौदों को लेकर पैदा विवाद पर कांग्रेस को आड़े हाथ लिया और कहा कि यह 10 साल के कांग्रेस शासन के भ्रष्टाचार का प्रतीक है. उन्होंने बीजेपी को बहुमत देने की अपील करते हुए कहा कि खंडित जनादेश से किसी का हित नहीं पूरा होगा. हरियाणा में अन्य प्रमुख पक्षों में तीन प्रसिद्ध ‘‘लाल’’ के परिवार शामिल हैं. इनमें जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला भी शामिल हैं.

 

राज्य में हाल तक मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल के बीच होता था लेकिन अब इस बार कई नए दल भी मैदान में हैं.

 

हालांकि मुख्य प्रतिद्वंद्वी के तौर पर कांग्रेस, बीजेपी और इनेलो को ही देखा जा रहा है और तीनों दल को अपने दम पर सत्ता में आने की आस है.

 

बीजेपी हरियाणा के इतिहास में पहली बार सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. हरियाणा की स्थापना 1966 में हुयी थी.

 

दो नयी पार्टियांे, पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा की हरियाणा जन चेतना पार्टी और निर्दलीय विधायक गोपाल कांडा की हरियाणा लोकहित पार्टी के अलावा बसपा, हरियाणा जनहित कांग्रेस और वाम दल भी चुनावी मैदान में अपना भाग्य आजमा रहे हैं.

 

जानेमाने स्वतंत्रता सेनानी दिवंगत चौधरी रणवीर सिंह के पुत्र और दो बार से मुख्यमंत्री भूपिन्द्र सिंह हुड्डा एक बार फिर रोहतक जिले में गढ़ी सांपला किलोई क्षेत्र से मैदान में हैं.

 

मुख्यमंत्री के सामने सत्ता विरोधी रूझानों और अन्य कारकों के बीच लगातार तीसरी बार कांग्रेस को जीत दिलाने की चुनौती है.

प्रधानमंत्री ने हरियाणा में अपने चुनाव प्रचार के दौरान लोगों को उन ‘‘परिवारों’’ से दूर रहने को कहा जो पिछले 25 साल से ‘‘परदे के पीछे गठबंधन बनाकर’’ हरियाणा की सत्ता पर एकाधिकार बनाए हुए हैं. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बीजेपी और इनेलो दोनों पर हमला बोला और कहा कि वे सिर्फ सत्ता के पीछे हैं. उन्होंने बीजेपी पर खोखले वादे करने और अमीरों का पक्षधर होने का आरोप लगाया.

 

वर्ष 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 40 सीटें मिली थीं जबकि इनेलो को 31 और बीजेपी को चार सीटों पर जीत मिली थी. शेष सीटें अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को मिली थीं.

 

हरियाणा के तीन प्रसिद्ध ‘‘लाल’’ में देवी लाल, बंसी लाल और भजन लाल शामिल हैं. राज्य की राजनीति में लंबे समय तक उनका प्रभाव रहा और अब उनकी अगली पीढ़ी परिवार के नाम को बनाए रखने के लिए प्रयासरत है. तीनों नेताओं की अगली पीढी के सदस्य अलग अलग सीटों पर चुनाव मैदान में अपना भाग्य आजमा रहे हैं.

 

देवी लाल के पुत्र ओम प्रकाश चौटाला और चौटाला के पुत्र अजय सिंह शिक्षक भर्ती घोटाला में सजा के कारण चुनावी मैदान से बाहर हैं. लेकिन परिवार के उन सदस्यों की प्रतिष्ठा दांव पर है जो चुनावी मैदान में हैं.

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