बांग्लादेश ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को प्रदान किया मुक्ति संग्राम सम्मान

By: | Last Updated: Sunday, 7 June 2015 12:44 PM
atal bihari vajpayee

ढाका: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को बांग्लादेश के स्वतंत्रता संघर्ष में ‘सक्रिय भूमिका’ निभाने और उस देश से भारत के दोस्तान रिश्तों को मजबूत बनाने में उनके योगदान के लिए आज बांग्लादेश मुक्ति संग्राम सम्मान प्रदान किया गया.

 

बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हामिद ने यहां राष्ट्रपति आवास बंग भवन में शानदार समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को यह सम्मान सौंपा . इस समारोह में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और यहां की सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया.

 

वाजपेयी की ओर से सम्मान ग्रहण करने के बाद मोदी ने कहा, ‘‘यह दिन हम सभी भारतीयों के लिए बड़े गर्व का है कि अटल बिहारी वाजपेयी जैसे एक महान नेता को सम्मानित किया जा रहा है. उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा के लिए समर्पित कर दिया और आम आदमी के अधिकारों की लड़ाई लड़ी तथा राजनीतिक दृष्टिकोण से वह मेरे जैसे राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए प्ररेणा हैं.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि जब बांग्लादेश के मुक्ति योद्धा खून बहा रहे थे तब भारतीय भी उनसे कंधा से कंधा मिला कर लड़ रहे थे और एक तरह से बांग्लादेश के सपने को साकार बनाने में मदद की.

 

मोदी ने कहा कि वह 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति योद्धाओं के समर्थन में जन संघ द्वारा आयोजित सत्याग्रह में हिस्सा लेने दिल्ली आने वाले युवा कार्यकर्ताओं में से एक थे. उन्होंने छह दिसंबर 1971 में संसद में दिये गए वाजपेयी के भाषण को याद किया जिसमें उन्होंने सरकार से बांग्लादेश को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता प्रदान करने को कहा था.

 

मोदी ने कहा, ‘‘ अगर अटलजी का स्वास्थ्य ठीक होता और वह यहां मौजूद होते तब यह अवसर कुछ अलग ही होता.’’ प्रशस्ती पत्र में वाजपेयी की सराहना एक ‘बेहद सम्मानित राजनीतिक नेता’ के रूप में की गई है और बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम को समर्थन के लिए उनकी ‘सक्रिय भूमिका’ को मान्यता प्रदान की गई.

 

इसमें कहा गया है कि भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य के रूप में वाजपेयी ने इस दिशा में कई कदम उठाये.

 

इसमें कहा गया है, ‘‘ आर्गेनाइजर के संपादकीय में वाजपेयी ने बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान द्वारा बांग्लादेश की स्वतंत्रता की ऐतिहासिक घोषणा का स्वागत किया और भारत सरकार से बांग्लादेश की सरकार को मान्यता प्रदान करने और स्वतंत्रता सेनानियों को जरूरी मदद प्रदान करने को कहा था.’’ प्रशस्ती पत्र में मुक्ति संग्राम को समर्थन देने में तेजी लाने के लिए भारत सरकार से मांग करने के लिए जन संघ की भूमिका को भी मान्यता प्रदान की गई है.

 

बांग्लादेश और उसके अस्तित्व के प्रयास में लगे लोगों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाजपेयी के दृढ़ रूख का जिक्र करते हुए प्रशस्ति पत्र में कहा गया है, ‘‘ जनसंघ ने 1 से 11 अगस्त तक जन सत्याग्रह शुरू किया था और उसके कार्यकर्ताओं ने 12 अगस्त 1971 को भारतीय संसद के समक्ष बड़ी रैली का आयोजन किया था.’’

 

इसमें कहा गया है, ‘‘ बांग्लादेश के लोग बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और दोनों देशों के बीच मित्रता को मजबूत बनाने के लिए हमेशा अटल बिहारी वाजपेयी के महत्वपूर्ण योगदान को याद रखेंगे.’’ बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस अवसर पर कहा कि बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में वाजपेयी की गतिविधियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.

 

इस अवसर पर हसीना ने मोदी को वाजपेयी का योग्य उत्तराधिकारी और वाजपेयी की तरह बांग्लादेश का एक बड़ा मित्र बताया. खराब स्वास्थ्य के कारण भारत रत्न से सम्मानित 90 वर्षीय वाजपेयी समारोह में मौजूद नहीं हो सके.

 

हसीना ने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में भारत की मदद को स्वीकार किया और इस बात को भी याद किया कि उस समय भारतीयों ने बांग्लादेश के लोगों को आश्रय दिया था.

 

बांग्लादेशी अखबारों में मोदी का दौरा नए युग की शुरुआत

 

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे को एक नए युग की शुरुआत और भू-सीमा समझौते को द्विपक्षीय संबंधों के लिए ऐतिहासिक क्षण बताते हुए बांग्लादेश के समाचार पत्रों ने रविवार को कहा कि पड़ोसी देश सहयोग के महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गए हैं.

 

मोदी की शनिवार से शुरू हुई बांग्लादेश यात्रा अखबारों में छाई रही. इस दौरान कोलकाता-ढाका-अगरतला और ढाका-शिलांग-गुवाहाटी बस सेवाओं को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाई गई. अखबारों में प्रधानमंत्री के भाषण और उनके विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़ी विभिन्न रपटें प्रकाशित हुईं.

 

बांग्लादेश का सर्वाधिक बिकने वाला बंगाली समाचार पत्र ‘प्रोथोम अलो’ के मुताबिक, “नि:संदेह दो घनिष्ठ पड़ोसियों के बीच एलबीए समझौता सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है. सहयोग का एक नया द्वार खुल गया है.”

 

समाचार पत्र ने एलबीए के संबंध में पिछले 40 सालों में विभिन्न उतार-चढ़ाव का भी उल्लेख किया है. अखबार ने शेख हसीना सरकार की आतंकवादियों को पनाह नहीं देने की नीति को भी महत्वपूर्ण कारक बताया, जिसकी वजह से एलबीए मुद्दे के समाधान में मदद मिली.

 

बांग्लादेश के अंग्रेजी समाचार पत्र ‘द डेली स्टार’ ने मुखपृष्ठ पर ‘डॉन ऑफ अ न्यू इरा’ यानी ‘एक नए युग की शुरुआत’ शीर्षक के साथ लिखा, “बांग्लादेश और भारत ने अपने संबंधों में उम्मीदों के एक नए अध्याय खोल दिए हैं. पिछले कुछ दशकों से संदिग्ध राजनीति, अदूरदर्शी कूटनीति और सुस्त नौकरशाही ने संबंधों को नीरस कर दिया था.”

 

तीस्ता नदी जल बंटवारा संधि पर समझौता नहीं होने की ओर उल्लेख करते हुए समाचार पत्र ने कहा, “मोदी ने अपने भाषण में पिछले लंबे समय से बांग्लादेश के तीस्ता जल बंटवारे के प्रति चिंता जताई.” समाचार पत्र ने इस समझौते की राह में बाधा उत्पन्न करने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दोषी ठहराते हुए कहा, “मोदी की तरफ से ईमानदारी में कोई कमी नहीं है.”

 

वाजपेयी लोगों के लिए प्रेरणा: मोदी

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में बांग्लादेश में आयोजित एक समारोह में वाजपेयी को कई लोगों के लिए प्रेरणा बताया. पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के स्थान पर ‘बांग्लादेश लिबरेशन वॉर अवॉर्ड’ स्वीकार करने से पहले मोदी ने कहा, “भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी मेरे जैसे कई लोगों के लिए एक प्रेरणा हैं, उन्हें बाग्लादेश द्वारा सम्मानित किया जा रहा है.”

 

दक्षिण एशियाई देश की पाकिस्तान से मुक्ति की लड़ाई में उनके योगदान के लिए बांग्लादेश ने वाजपेयी को यह पुरस्कार प्रदान किया है. मोदी ने कहा, “अगर अटलजी का स्वास्थ्य सही होता तो वह यहां पर उपस्थित होते और इस कार्यक्रम में चार चांद लग जाते.”

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: atal bihari vajpayee
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017