भागवत के भाषण के क्या है मायने?

By: | Last Updated: Thursday, 22 October 2015 12:47 PM
Atmosphere of disappointment has dissipated: RSS chief

नई दिल्ली : नागपुर में विजयादशमी के क्रायक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आज मोदी सरकार के कामकाज का खूब बखान किया. आज आरएसएस का स्थापना दिवस भी है. हालांकि भागवत आरक्षण के मुद्दे पर कुछ नहीं बोले. पिछले दिनों आरक्षण की समीक्षा वाले बयान को लेकर उनके बयान की खूब आलोचन हुई थी.

 

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत हिंदुत्व के बारे में बता रहे थे लेकिन इस बीच उन्होंने कहा कि कभी-कभार कुछ छोटी-मोटी बातें हो जाती हैं.

 

भागवत का ये बयान तब आया है जब पिछले महीने यूपी के दादरी में गोमांस की अफवाह में एक बुजुर्ग अखलाक की हत्या कर दी गई थी. सवाल उठ रहे हैं कि क्या भागवत का इशारा दादरी की घटना की ओर था? मोहन भागवत यूं ही कुछ नहीं बोलते हैं. उनके एक-एक शब्द के मायने होते हैं.

 

कुछ दिन पहले दिए उनके आरक्षण वाले बयान पर देश में लंबी बहस छिड़ गई थी. भागवत ने कहा था कि मौजूदा आरक्षण नीति की समीक्षा होनी चाहिए. विवाद इतना बढ़ गया था कि बीजेपी को सफाई देनी पड़ गई. बिहार चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने साफ किया कि आरक्षण व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है. माना जा रहा था कि मोहन भागवत आरक्षण पर जरूर कुछ कहेंगे लेकिन वो चुप ही रहें. हालांकि उन्होंने दलितों के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ने वाले बाबा साहेब भीभराव आंबेडकर के योगदान को जरूर याद किया.

 

मोहन भागवत को आंबेडकर का जिक्र क्यों करना पड़ा? इसे समझने के लिए ज्यादा माथापच्ची करने की जरूरत नहीं हैं. माना जा रहा है कि भागवत आरक्षण वाले अपने बयान पर हुए हंगामे के बाद डैमेज कंट्रोल करने में जुटे हैं. हालांकि कांग्रेस ने आरक्षण के मुद्दे पर मोहन भागवत ने माफी मांगने की मांग भी कर डाली है.

 

वहीं नागपुर में राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ यानि आरएसएस के कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने मोदी सरकार का भी खूब गुणगान किया. भागवत के मुताबिक निराशा में डूबा हुआ देश नई सरकार में आशा की ओर ब़ढ रहा है.

 

मोहन भागवत के मुताबिक हाल के दिनों में विदेशों में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है. दुनिया भारत को आशाभरी निगाहों से देख रहा है.

 

भागवत के बयान बताने के लिए काफी हैं कि किस तरह वो मोदी सरकार के गुणगान में लगे हैं. हालांकि भागवत मोदी सरकार को नसीहत देते हुए भी नजर आए. भागवत ने कहा कि केवल अच्छी नीतियां बनाने से ही काम नहीं चलेगा बल्कि उसे अमलीजामा भी पहनाने की जरूरत है. इसके लिए उन्होंने जनता से फीडबैक लेने की भी सलाह दी.

 

मोहन भागवत इस मौके पर आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे का जिक्र करना नहीं भूले. मोहन भागवत ने देश में बढ़ते आतंकवाद के लिए पाकिस्तान पर निशाना साधा.

 

मोहन भागवत देश में बढ़ती आबादी पर भी लगाम लगाने की वकालत की. उन्होंने ये भी कहा कि जनसंख्या विस्तार में संतुलन होना चाहिए. 50 साल बाद जब दुनिया के कई देशों में बुजुर्गों की तादाद ज्यादा होगी तो भारत में काम करने वाले युवा करोड़ों में होंगे. मोहन भागवत ने इसके लिए सभी के लिए एक तरह की नीति बनाने की बात भी कही.

 

भागवत का इशारा साफ था. एक बड़ा वर्ग है जो देश में बढ़ती आबादी के लिए मुस्लिमों को जिम्मेदार मानता है. सवाल उठता है कि मोहन भागवत जनसंख्या पर एक तरह की नीति बनाने की बात कहकर क्या संदेश देना चाहते हैं?

 

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