आटिस्टिक बच्चों वाले कर्मचारियों का तबादला नहीं करें : सरकार

By: | Last Updated: Monday, 17 November 2014 1:54 PM
autistic child

नई दिल्ली: ऐसे सरकारी कर्मचारियों का अब तबादला नहीं किया जाएगा जिनके बच्चे आटिज्म से प्रभावित हैं. तबादला नियुक्ति से इंकार करने पर ऐसे कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के लिए भी मजबूर नहीं किया जाएगा. केंद्र सरकार ने आज यह फरमान जारी किया है .

 

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने एक आदेश जारी किया है जिसमें तबादले से छूट पाने वाले सरकारी कर्मचारियों में विकलांग बच्चों के माता पिता में उन्हें भी शामिल किया गया है जिनके बच्चे आटिज्म से प्रभावित हैं .

 

सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को जारी किए गए आदेश में कहा गया है, ‘‘ इस बात को ध्यान में रखते हुए कि आटिज्म से प्रभावित बच्चे को लगातार देखभाल की जरूरत होती है और सरकारी कर्मचारियों को अपने आटिज्म प्रभावित बच्चे की लगातार देखभाल करनी होगी.. यह फैसला किया गया है कि आटिज्म को ‘विकलांगता’ की श्रेणी में शामिल किया जाए.’’ आटिज्म एक ऐसी मानसिक अवस्था है जिसमें पीड़ित को संवाद कायम करने में बहुत अधिक दिक्कत होती है .

 

आदेश में कहा गया है कि एक सरकारी कर्मचारी जिसका विकलांग बच्चा है , वह उसकी देखभाल की मुख्य जिम्मेदारी उठाता है और ऐसे कर्मचारी को किसी अन्य जगह भेजने से बच्चे के सुचारू पुनर्वास पर असर पड़ेगा क्योंकि नया माहौल पुनर्वास प्रक्रिया में बाधक बन सकता है विकलांग शब्द में अंधता या कम दृष्टि , सुनने में बाधा, सेरेब्रल पाल्सी, कुष्ठ रोग , मानसिक रूप से कमजोर, मानसिक बीमारी आदि को शामिल किया गया है . डीओपीटी ने आदेश में कहा है, ‘‘ विकलांग बच्चे के पालन पोषण और पुनर्वास में धन की जरूरत होती है . नियमित तबादले या बारी बारी से किए जाने वाले तबादले की आड़ में सरकारी कर्मचारी को वीआरएस के लिए कहने से बच्चे के पुनर्वास की प्रक्रिया पर गलत असर पड़ेगा.’’ यह कदम इस मांग के बाद आया है जिसमें कहा गया था कि एक विकलांग बच्चे के माता पिता और सरकारी कर्मचारी को नियमित तबादले के चलते परेशान नहीं होने देना चाहिए.

 

आदेश में कहा गया है , ‘‘यह मांग इस आधार पर की गयी है कि एक सरकारी कर्मचारी जहां रहता है वह वहां पर रहते हुए धीरे धीरे अपने विकलांग बच्चे को लेकर एक अनुकूल माहौल बनाता है जो बच्चे के पुनर्वास में मदद करता है .’’ इसमें कहा गया है, ‘‘ अनुकूल माहौल में भाषाई समझ, स्कूल , प्रशासन, पड़ोस , ट्यूटर या विशेष शिक्षक , मित्र, चिकित्सा सुविधाएं , अस्पताल ,डाक्टर आदि शामिल होते हैं.’’ विभाग ने कहा, ‘‘ इसलिए पुनर्वास एक सतत प्रक्रिया है और ऐसा अनुकूल माहौल बनाने में सालों का समय लगता है .’’

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