किरन की शादी आमिर से हुई, ये सहनशीलता का सबसे बड़ा प्रमाण- प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाबा रामदेव

By: | Last Updated: Saturday, 28 November 2015 3:56 PM
baba ramdev press confrence

नई दिल्ली: बाबा रामदेव इन दिनों बेहद चर्चा में हैं. बाबा रामदेव की इस चर्चा का कारण बना है बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद का नूडल. इसके साथ बाबा रामदेव ने लोकसभा चुनाव से काले धन पर भी जमकर आंदोलन किया था. बाबा ने मोदी सरकार के लिए प्रचार भी किया था. अब बाबा रामदेव को लगता है कि काला धन अभी नहीं आ पाया है और ये लगातार बढ़ रहा है. इन सभी मुद्दों पर बाबा रामदेव ने आपेक चैलन एबीपी न्यूज़ पर वरिष्ठ पत्रकार दिबांग और एक सीनियर पत्रकारों के पैनल से बात की. यहां पढें उस पूरी बातचीत का लेखा जोखा…..

 

सवाल दिबांग – कहां बाबा दिखाई देते थे फल खाते हुए अब आप नूडल्स खाते हुए दिखाई देते हैं.

जवाब बाबा रामदेव- कुछ लोग इस देश में ज्यादा खाकर बीमार हैं, कुछ लोग खाना ना मिलने से लाचार हैं, मैं तो सहज रहता हूं, न कम खाओ और जो गम आए तो सह जाओ

 

सवाल दिबांग – कहां आप इंस्टेंट योगा सिखाते थे कि नाखून रगड़ो और बाल झड़ना कम हो जाएंगे. वहां से आप सीधा इस्टेंट योगा से इस्टेंट नूडल पर वो कह रहे हैं कि लाइसेंस नहीं है आप के पास.

 

जवाब बाबा रामदेव- अभी लाइसेंस की कॉपी मैं लेकर नहीं वैसे सब मीडिया वालों की भेजी हुई है. हमने FSSAI से बनाने, बेचना का सब लाइसेंस लिया हुआ है. उनका नोटिस भी मिल गया, उनके भी प्रेम पत्र का भी उत्तर दे दिया जाएगा बहुत प्रेमपूर्वक.

 

दिबांग – आज की तारीख में आप जब कह रहे हैं कि प्रेमपूर्वक जवाब दे दिया जाएगा तो लोग तो कह रहे हैं कि उस आदमी की तो नौकरी गई. बाबा रामदेव का तीसरा नेत्र उधर खुलने वाला है.

 

बाबा रामदेव- हम किसी के साथ कोई क्रूरता नहीं करते हैं. ये काम बहुत नेताओं नेताओं ने किया कि कोई इनके खिलाफ बोल नहीं सकता. किसी मंत्रालय में बाबा रामदेव को देखा. किसी का ट्रांसफर, प्रमोशन कराते हुए बाबा रामदेव को देखा. मोदी जी के आने के बाद राजनैतिक दृष्टि से हमने तटस्थ योग अपना लिया है.

 

सवाल- पहले तो योग प्रचार था, उसके बाद दवाइयां आ गईं, सौंदर्य प्रसाधन आ गए, अब नूडल पास्ता भी आ गया है तो इस सब को आप कैसे चला रहे हैं, बिना मैनेजमेंट की डिग्री के आप को ये जो पूरा साम्राज्य है इसको आप किस तरीके से चलाते हैं, कैसे इसकी व्यवस्था करते हैं

 

बाबा रामदेव- देखिए हमारे पास में मैनेजमेंट स्किल वाले बहुत सामान्य लोग हैं, जो सारे गवर्नमेंट के गाइडलाइन और लीगल रिक्वायरमेंट के अनुसार वो लोग काम करते हैं, हमारे पास में 50 लाख रुपये सालाना से ज्यादा पैकेज वाला कोई आदमी नहीं है, बस साधारण लोग हैं और वो असाधारण तरीके से इस काम को करते हैं क्योंकि सब सहज योगी हैं.

 

सब रिलेक्स होकर काम करते हैं, किसी का कोई बॉस नहीं है, सब अपना एक परिवार मानकर और काम को कर्तव्य और धर्म मान करके इस काम को करते हैं. कमाई के लिेए देश की भलाई के लिए इस काम कर रहे हैं. यही कारण है कि जो एमएनसी है ज्यादातर बेसेलस और फेसलेस हैं, उनको परेशानी हो रही है कि अब इस बाबा को टक्कर कैसे देंगे. अभी 2 हजार करोड़ से घबराए हैं और जब मार्च के बाद जब 5 हजार करोड़ का आकड़ा होगा तो शायद हो सकता है कि बहुतों का शीर्षासन हो जाए फिर उनको कपाल भारती, अनुलोम-विलोम करवाएंगे.

 

दिबांग- हिंदुस्तान यूनीलीवर लिमिटेड जो है उनका आयूष है 35 हजार करोड़ का वो लोग धंधा करते हैं, आप 5 हजार करोड़ पर पहुंच जाएंगे इस बार, 150 फीसदी आपकी ग्रोथ है, 93 फीसदी कह रहे हैं कि बालकृष्ण जी का है, फैमली है जिसने स्कॉटलैंड से आपकी मदद की पोद्दार उनका है, बहुत थोड़ा सा हिस्सा आपके भाई का, कहां जाता है पैसा, किसको मिलता है, किसका है पैसा.

 

बाबा रामदेव- देखिए जहां तक आप भाई की बात कर रहे हैं उसके पास तो…

दिबांग- .015 फीसदी

 

बाबा रामदेव- कितना होता है वो, खाली उतने लोग चाहिए कंपनी को फॉर्मेट करने के लिए, उसके लिए एक व्यवस्था है. ये प्रापर्टी ना किसी भाई की है, ना किसी बहन की है ना ये आचार्य बालकृष्ण की है. ये सब देश का है. जहां तक आप ये बात कर रहे हैं कि पैसा कहां से आया, इसमें कोई ब्लैक मनी नहीं है. पूरा का पूरा व्हाइट मनी है. करीब 70 करोड़ कर्ज लिया, व्यक्तिगत लोन जिसे बोलते हैं आचार्य बालकृष्ण ने, फिर उसके बाद वर्किंग कैपिटल हमने लिया, करीब 500 करोड़ रूपये हमने लोन लिया और वो सारा का सारा पैसा हमने बाईज्जत उनको लौटा दिया. सुनीता पोद्दार जी से लिया था उनको लौटा दिया है, बैंक से लिया था, उनको लौटा दिया है. अब इससे जो इनकम होगा वो थोड़ा बहुत इसके विस्तार के लिेए होगा, बाकी जो भी इससे इनकम होगी वो सेवा की लिए लगेगी. और सारा काम हमारा ट्रांसपैरेंट है, हमारे ऊपर तो हजार प्रकार की जांच हो चुकी है. अब तो कांग्रेस ने हमारी प्रामाणिकता को सर्टिफाइड कर दिया, अब आंख मूंद कर लो पतंजलि का प्रोडक्ड यूज करते हैं, बोलते हैं घी है पंतजलि का प्योर होगा, आटा है प्योर होगा, दाल है प्योर होगी. आप को पता है कितनी डिमांड है, 5 सौ टन आटा की रोज डिमांड है, जो आप नूडल की बात कर रहे हैं, इसकी भी 3 सौ से 5 सौ टन रोज की डिमांड है. इसको फुलफिल कैसे करेंगे इसके लिए अब सोचना पड़ रहा है.

 

दिबांग- मुझे आप पहचान में नहीं आप रहे हैं, पिछली बार जब आप से बात की थी तो आप आसनों के लाभ बता रहे थे. अब लग रहा है वो रामदेव कहीं खो गए

बाबा रामदेव- दिबांग अभी कोलकाता में 5 दिन का शिविर कर के आया हूं, उसके बाद आगे पोर्टब्लेयर जाऊंगा, फिर सूरत की सूरत बदलूंगा. पूरे देश में मेरे शिविर चालू हैं, सुबह सुबह योग, दिन भर कर्मयोग.

 

दिबांग- उसमें भी आप कहते होंगे कि आटा नूडल्स खाओ, मैगी बेकार है.

बाबा रामदेव- मैं बस इतना कहता हूं, हेल्थी खाओ हेल्थी रहो.

 

सवाल मुकेश केजरीवाल-  क्या आप की कभी ऐसा लगता है कि कुछ गलती हुई कि आप गुरू से एक सेल्समैन की भूमिका में आ गए.

बाबा रामदेव- गुरू जो है वो अपने ज्ञान के द्वारा हजारों, लाखों, करोड़ों लोगों को प्रभावित करता है, वो भी तो सेल्समैन है. तो मैं योग का भी सेल्समैन हूं, मैं दिमाग से ब्राह्मण हूं, कार्य से क्षत्रिय हूं, प्रबंधन से वैश्य हूं, सेवा से सूद्र हूं तो इसमें क्या दिक्कत है, ये कोई अफसोस की बात थोड़े ही है ये तो गौरव की बात है कि एक सन्यासी अपने लिए कुछ ना चाहता हो, जमीन पर सोता हूं, चाहे स्टिंग ऑपरेशन कर के देख लो. इस देश के लोगों ने मुझे सेलेब्रिटी बनाया है, इस देश के लोगों ने मुझे योगी बनाया है, मैं तो एक अनपढ़ मां-बाप के घर में, देहाती लोगों के बीच में पैदा हुआ, जिनको बहुत से लोग तो उनको अपने पास नहीं बैठने दिया करते थे.

 

दिबांग- आपका जो सामान होता है वो सस्ता होता है, जैसे आप केशकांती बनाते हैं, वो 110 रूपये का है, हिंदूस्तान लीवर वाले वही चीज 325 रूपये उसके साथ-साथ जब आप बेचते हैं उसको तो आप ज्ञान देते हैं. आप कहते हैं कि बाहर की कंपनियों का खरीदोगे टूथपेस्ट तो उसमें हड्डियों का चूरा होता है, हमारा ले जाओ इसमें पेड़ की झाली होती. क्या ये भई स्ट्रेटजी में है कि इस तरीके से आगे बढ़ना है.

 

बाबा रामदेव- MNC कोई सामान बेचती हैं तो हमारे मां-बहन-बेटियों के आधे कपड़े उतरवा देते हैं और देश के तो पूरे उतरवा देते हैं. हमारी स्ट्रेटजी ये है कि हम किसी भी मां, बहन, बेटी को अर्धनग्न अवस्था में नहीं लेकर आएंगे. हम किसी भी सेलेब्रिटी को लाकर के और झूठ बोल करके, सपना दिखा करके, लोगों के बीच एक तरह से कृत्रिम भूख जगा कर के, लोगों में एक कृत्रिम खूशी कि चारों तरफ से गुलाब की पंखुड़ियां फेंकी और बीच में से एक अर्धनग्न महिला को उतारा और ओहो कोमल सी त्वचा का अहसास. हमारी अब भी करीब 100 टन अलग-अलग प्रकार के हर्बल जो हैं बॉडी क्लिनर हम देते हैं, लेकिन कोई अर्धनग्न महिला नहीं आती.

 

सवाल- च्यवनप्राश से अचानक नूडल, पश्चिमी संस्कृति को नहीं बढ़ावा दे रहे हैं.

बाबा रामदेव- हमने उनके जितने भी पाश्चात का कॉन्सेप्ट था ना, वो बना रहे थे जितने भी बिस्किट हैं, वो मैदा से, हमने 100 फीसदी आटा प्रयोग किया है. हमारा दावा है 100 फीसदी आटा, 0 परसेंट कॉलेस्ट्राल , 0 परसेंट ट्रांसफैट, हम क्या करें. हमने तो इस्टेड फूड में एक क्रांति ला दी है. अब देखो ये मैदा का बना रहे थे मैगी, हम आटा का ले आए तो

 

सवाल- लेकिन पश्चिमी खाद्य पदार्थ तो हैं, भारतीय खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने के बजाय आप पश्चिमी खाद्य पदार्थ को बढ़ावा दे रहे हैं

बाबा रामदेव- ये जो है आप की असहिष्णुता है. इस असहिष्णुता से बचिए वैसे भी आज कल देश में असहिष्णुता पर बड़े प्रश्न आ रहे हैं. आप इतने सहिष्णु होइए कि यदि कोई विदेशी चीज आप के सामने है तो सोचिए उसका स्वदेशी विकल्प क्या हो सकता है. आज कल वाट्सएप पर बड़ा चला है कि पहले अर्धनग्न लड़कियां प्रोडक्ट बेचती थीं, आज कल एक अर्धनग्न बाबा प्रोडक्ट बेंच रहा है.

 

दिबांग- आप की बात से लग रहा है कि आपका उसमें कुछ नहीं है, कंट्रोल कौन करता है, आपको कुछ करना है या नहीं करना है, ये तय कौन करता है. ऐसा तो नहीं है कि कुछ पैसे वाले लोग हैं जो बाबा का मुखौटा लगाकर चल रहे हैं आगे.

 

बाबा रामदेव- ऐ दिबांग भाई गलत बात नहीं, ये प्रेस कॉन्फ्रेंस है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में गलत मैसेज चला जाएगा, ये राजनैतिक पार्टियों में चलता होगा, मुखौटा-मुखौटा, हमारे यहां नहीं है बिलकुल भी. जैसे हमारा 10 हजार करोड़ का आगे का प्लान है, एजुकेशन के ऊपर खर्च करने का तो उसमें जरूर मुझे लगता है कि एक हजार या दो हजार करोड़ रूपये जरूर मैं एक-दो लोगों से ले लूंगा मैं. लेकिन पंतजलि आयुर्वेद में बहुत लोगों ने, हमारे यहां करीब 7-8 दिन तक हिंदुजा वहीं पर थे, पतंजलि योग पीठ में आज से करीब 10 साल पहले, पार्टनरशिप करने के लिए, हमने नहीं किया, ये सच है. दिबांग भाई पहली बार बोल रहा हूं मीडिया में कि देश के बहुत से उद्योगपतियों ने प्रपोजल दिए कि हम आपके साथ पार्टनरशिप कर लेते हैं. मैंने कहा भईया हमारे साथ आपकी पार्टनरशिप हो ही नहीं सकती है, क्योंकि हमारा जो कॉन्सेप्ट है वो ट्रस्टशिप कॉन्सेप्ट है

 

दिबांग- तो आप कह कर रहे हैं, मुखौड़ा कहना गलत है, आप उसमें सब कंट्रोल करते हैं.

 

बाबा रामदेव- मैं कंट्रोल करता हूं बिना किसी लीगल पावर के, स्प्रिचुअल पावर से. इस दुनिया से जाने से पहले

 

दिबांग- बहुत दूर है वो

 

बाबा रामदेव- शायद 50 साल तो जिंदा रहूंगा मैं, आप जब बुढ्ढे हो जाएंगे तब दोबारा इंटरव्यू देने आऊंगा मैं. जाने से पहले कुछ ऐसा कर के जाना चाहता हूं कि लोग सन्यास की परिभाषा, योग की परिभाषा, अध्यात्म की परिभाषा नए सिरे से करें कि एक योगी और सन्यासी अपने लिए कुछ ना चाह करके, देश के लिए सब कुछ करना चाहता है.

 

दिबांग- ये लग रहा है कि जब से मोदी सरकार आई है, आप के अच्छे दिन आ गए हैं.

 

बाबा रामदेव- मैं कह रहा हूं कि मोदी जी ने मुझे कहां प्रमोट किया. एक जगह बता दो

 

दिबांग-  ये कह रहे हैं कि जो चैरिटेबल ट्रस्ट हैं उनमें सर्विस टैक्स नहीं लगेगा.

 

बाबा रामदेव- तो अच्छी बात है. अरे विदेशों में तो जो ट्रस्ट को डोनेशन दे रहा है, उसको और ऊपर से छूट देती ही सरकार. यहां तो उसमें भी दिक्कत है कि आपको 80 परसेंट छूट मिलेगी, वहां तो 100 परसेंट सरकार छूट देती है टैक्स में. तो यदि टैक्स में सारा काम सरकार कर लेगी क्या, सरकार अच्छे से सरकार चला ले वही बहुत है. मैं तो कहता हूं सोशल रिस्पांसबिलटी हम जैसे लोगों को दे दे सरकार. यदि मुझे 2-4 कामों की रिस्पांसबिलटी दी गई होती तो मोदी के कामों को देश में और लोग एप्रिशिएट करते. प्राचीन भारत का इतिहास देख लीजिए, देश का पूरा हेल्थ सिस्टम, एजुकेशन सिस्टम, सुश्रुत, धनवंतरी, पाणिनी, पतंजलि, गौतम, भिग्रु, वशिष्ठ ये सब ऋषि-मुनि चलाते थे. मैं तो कहता हूं कि हेल्थ और एजुकेशन की मुझे जिम्मेदारी दे दो, मैं बहुत अच्छा करूंगा, कोई घोटाले नहीं होने दूंगा और देश के अंदर उसको हम एक आंदोलन की तरह चला देंगे.

 

दिबांग- चलिए दो मंत्रालय आप ने मांग लिए

 

बाबा रामदेव- नहीं मैं मंत्रालय नहीं मांग रहा हूं, इसको अच्छा करने के लिए हम और अच्छा कर सकते हैं.

 

दिबांग- कालेधन मामले पर आप के साथ थे रामजेठमलानी, आप के साथ थे सुब्रमण्यम स्वामी ये लोग तो बोल रहे हैं कि सरकार कुछ कर नहीं रहे हैं, रामजेठमलानी तो बहुत ही कड़ा बोल रहे हैं. अब लग रहा है कि बाबा रामदेव अब ये छोड़ के अपने बिजनेस में लग गए हैं,  लग रहा है कि कुछ कर ही नहीं रहे हैं.

बाबा रामदेव- इस बारे में हमने मोर योग अपनाया है, थोड़ा सा बोल रहे हैं, ज्यादा इसलिए नहीं बोल रहे हैं कि बोले क्या, बोलने लायक है ही नहीं

 

दिबांग- मतलब

 

बाबा रामदेव- मतलब नहीं पता

 

दिबांग- आप ने वादा किया था कि काला धन आएगा.

 

बाबा रामदेव- इसीलिए तो लाए तो नहीं ना. बोलें क्या, लोग तो कहते हैं कि बाबा पहले तो बहुत बयान देते थे, अब बयान क्यों दे रहे हो, लाकर दो. ला नहीं सके तो मौन हो गए. जहां बोलना है वहां बोलते हैं. अब आप को बोलने से क्या फायदा, आप तो काला धन लाने वाले हैं नहीं तो आदरणीय अमित शाह जी को बोलते हैं, जेटली जी को बोलते हैं, प्रधानमंत्री जी से बोलेंगे कि भाई देखो आपकी और हमारी सब की साख बट्टे पर लगी है, जल्दी ले आओगे तो फायदा होगा नहीं तो लोग कोसेंगे.

दिबांग- पहले तो आप हर चीज बाहर बोलते थे, अब आपको ये ध्यान आ गया कि नहीं घर के अंदर ही बात होनी चाहिए. इनको नहीं बोलना चाहिए कि ये थोड़ी लाएंगे.

बाबा रामदेव- जहां जरूरी है वहां बोलना चाहिए, आप लोग पहले मेरा इंटरव्यू लेते थे तब क्या बोलते थे कि बाबा बहुत बोलता है, अब कहते हैं कि बाबा कम बोलता है, तो मेरे को हद बता दो ना कितना बोलना है, लक्ष्मण रेखा खींच दो उसको कभी अतिक्रमण नहीं करूंगा. बस इतना ही कहता हूं कि काला धन एक बहुत बड़ा मुद्दा है और ये सच है कि केवल देश में ही नहीं पूरी दुनिया में पैरेलर ब्लैक मनी की व्यवस्था है. इस दुनिया में, भूख और कुपोषण का, हंगर इनजस्टिस का सबसे बड़ा कारण है ब्लैक मनी और करप्शन. अब कहने का समय नहीं है, एक्शन है और एक्शन में थोड़े कमजोर हो गए हैं.

 

दिबांग- लोगों से साथ धोखा हुआ है

 

बाबा रामदेव- मैं ऐसा नहीं कह रहा हूं कि धोखा हुआ है, आदरणीय मोदी जी ने कहा है कि हम पाई-पाई दिलाएंगे तो अभी तो ढेढ़ ही साल हुआ है ना. थोड़ा इंतजार कीजिए

 

दिबांग- आप तो आंकड़ा बहुत बताते थे

 

बाबा रामदेव- अरे सब आंकड़ा तो अब भी उतना ही है

 

दिबांग- कितना है आपका आंकड़ा अब

 

बाबा रामदेव- बढ़ गया है

 

दिबांग- आप कह रहे हैं कि सरकार के चलते कालेधन का आंकड़ा बढ़ गया है.

 

बाबा रामदेव- दिबांग जी अब मुझे मत फंसाइए, थोड़ा कृपा कीजिए मुझ पर

 

सवाल- सरकार आपकी है 18 महीने हो गए तो क्या आप ने काला धन लाने का आंदोलन छोड़ दिया है, त्याग दिया है.

 

बाबा रामदेव- कतई नहीं छोड़ा है. मैं आप के सामने एक बात कह रहा हूं  मोदी सरकार आने के बाद में पहली बार, काला धन हमने कोई काल्पनिक मुद्दा नहीं बनाया था वो इस देश की अस्मिता से जुड़ा हुआ, इस देश के 80 करोड़ से भी ज्यादा वो लोग जो आज भी पिछड़े हैं, गरीब हैं उन वंचित, शोषितों का हित इससे जुड़ा हुआ है, इस मुद्दे को हम अंतिम सांस तक छोड़ेंगे नहीं. और मोदी जी काला धन दिलवा कर ही दम लेंगे. मोदी जी को वक्त दिया हुआ है, छोड़ा नहीं है.

 

सवाल- उसके लिए कोई रूप रेखा है.

 

बाबा रामदेव- रूपरेखा पूरी है ना. अब आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सारे पत्ते थोड़ी ना खोलने हैं. इसके बाद भी तो हम और जिंदा रहेंगे.

 

सवाल- देश के अंदर जो काला धन है उसका क्या, उस पर तो कोई चर्चा नहीं करता है

 

बाबा रामदेव- मैंने तो दोनों की बात की हमेशा इंटरनल इकॉनमी का ब्लैक मनी वो तो 90 प्रतिशत है, बाहर जो गया है वो तो 10 ही प्रतिशत है. आरदरणीय आडवानी जी ने और बीजेपी के तमाम शीर्ष नेताओं ने मुझे लिख कर दिया हुआ है, ब्लैक मनी के ऊपर, करप्शन के ऊपर और सिस्टम को चेंज करने के ऊपर तीन ही तो मुद्दे थे.

और सब ने माना है कि 25 लाख करोड़ से लेकर के करीब 100 लाख करोड़ तक बाहर गया है बाकी यहां कितना रह गया, करीब 900 लाख रूपये. 400 लाख रूपये मैंने जो इनिशियल रीसर्च जो किया था उससे पता चला था. जैसे-जैसे मैं डीप गया तो ये तो बहुत बड़ा मुद्दा है. मल्टीप्लाई होता जा रहा. ब्लैक मनी बहुत जल्दी ग्रोथ करता है, उसमें टैक्स तो देना ही नहीं पड़ता है.

 

दिबांग- तो आप कह रहे हैं कि काला धन अब भी बढ़ता जा रहा है

 

बाबा रामदेव- वो तो बढ़ेगा ही ना. दो तरह का ब्लैक मनी है एक वो है जो देश के साथ गद्दारी कर के सवा सौ करोड़ लोगों का हक मार के लूटा है, घोटाले कर के, एक वो काला धन है जो लोगों ने कमाया तो मेहनत कर के हैं व्यापार कर के लेकिन उसमें टैक्स नहीं दिया. तो ये दोनों कालेधन का, वैसे तो देखा जाए तो धन तो धन होता है उसका उपयोग खराब और बुरा होता है. लेकिन ये जो ब्लैक मनी है वो डेंसजेस नहीं है उतना.

 

दिबांग- कमाल है मतलब आप ने काले धन को भी शीर्षासन करवा दिया. उसको भी आपने कह दिया कि ये काला धन है पर ये सफेद है.

 

बाबा रामदेव- ये काला धन देश के लिए खतरा नहीं है. दो तरह काला धन है ही वो तो आप भी जानते हो. इस देश के किसी परचून की दुकान पर जाओ, पतंजलि के स्टोर छोड़ दीजिए वहां तो 100 प्रतिशत बिल मिलेगा आपको, बाकी जो गांव की दुकान है वहां कितने परसेंट बिल मिलता है. एक जमीन खरीदने जाओ, आप ने शायद मकान नहीं बनाया है, जमीन रजीस्ट्री कराएंगे तो पता लग जाएगा कि कितना ब्लैक का लगता है और कितना व्हाइट का. तो ये सारे काम होते हैं , लैंड, हेल्थ, माइनिंग, गोल्ड में सब जगह ब्लैक मनी सब जगह ब्लैक मनी लगा हुआ है रीटेन मार्केट में भी है. सरकार भी जानती है, बाबा कोई नई बात थोड़ी कह रहा है.

 

दिबांग- लोग ये जानना चाह रहे हैं कि ऐसी सरकार है जो आपने बनवाई वो  कागज भी आपके पास लिखा हुआ है. हर खाते में 15 लाख कब तक आएगा और आप क्या करोगे इसके लिए. कोई समय है आपके पास.

 

बाबा रामदेव- देखिए टाइम तो आदरणीय मोदी जी बताएंगे लेकिन मुझे उनकी नियत पर अब भी भरोसा है. उनकी नियत, नीतियों और नेतृत्व पर आज भी शक नहीं है. और क्योंकि वो लोकतांत्रिक तरीके से देश के चुने हुए प्रधानमंत्री हैं और उनका जो पीछे का ट्रैक रिकॉर्ड है, वो ये कहता है कि ये आदमी जो कहता है उसको करता है. तो भरोसा करना चाहिए उसी पर दुनिया कायम है.

 

दिबांग- वो तो कह रहे हैं कि ये तो चुनावी जुमला था.

 

बाबा रामदेव- अरे वो ऐसे ही बोल दिया होगा, मतलब वो काला धन लाएंगे.

 

दिबांग- कमजोर पड़ रहे हैं आप लोग देख रहे हैं

 

सवाल- पतंजलि ग्रुप और दिव्य योग फार्मेसी जो है उस पर ताबड़तोड़ जांच का सिलसिला चला था और लगातार कई तरह की अनियमितताओं को लेकर रिपोर्टिंग हुई थी और ये आप ने खुद भी कहा है. अब वो सारे मामले एकदम से दब गए हैं और ऐसी कोई बात सामने नहीं आ रही है. चर्चा ये हो रही है कि आप शायद मोदी सरकार के राजनैतिक समर्थक हो गए इसीलिए ये सारी जो पतंजलि पर तलवार लटकी थी वो हटा दी गई तो इसमें कितनी सच्चाई है.

 

बाबा रामदेव-  पहले तो एक बात ये बता देता हूं दो साल का सरकार के पास समय था, दो साल में तो जिंदा आदमी को धरती में गाड़ दें सरकार वाले, जिंदा आदमी को और कांग्रेस ने तो कितने लोगों को दफना दिया था. इसका इतिहास जानते हो आप सब लोग. बाबा रामदेव दो साल तक उनसे लड़ता रहा और डबल-डबल सीबीआई की जांच का सामना करता रहा. दो साल में ये कुछ नहीं कर पाए. अब भी जितने भी आरोप कांग्रेसियों ने लगाए थे, उसमें किसी में भी क्लीन चिट नहीं मिला है. एक के बाद जो दूसरा स्टेप होता है उसमें केस लड़ रहे हैं. इसको कभी मीडिया ने उछाला नहीं. मैं तो प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से ये कहना चाहता हूं जब हम गलत नहीं है तो हमको फेवर करना चाहिए.     

 

दिबांग- इतना जोर लगाया आपने बिहार में और सूपड़ा साफ.

 

बाबा रामदेव- नहीं हमने बिहार में कोई जोर नहीं लगाया, ये तो एक मुद्दे की बात थी, हम कहीं गए नहीं. जब देश में हमने जोर लगाया तो आपने देखा 20 लाख किलोमीटर हमने यात्रा की और करीब-करीब 15 से 20 करोड़ लोगों को मैंने संबोधित किया देश में घूम-घूम के. उसका परिणाम देखा.

 

दिबांग- बिहार में क्या हुआ

 

बाबा रामदेव- वहां मै गया होता तो आप को बताता.  मेरा ना कोई सहयोग ना ही कोई असहयोग. मैंने कहा तटस्थ योग

 

सवाल संयज सिंह- आपका तटस्थ रहना सही है मोदी के कार्यकाल और सरकार को देखकर के या आपको लगता है कि सरकार में कई जगह वो खामियां है. जहां बाबा को तटस्थ मुद्रो छोड़ कर के सामने से बताने की जरूरत

 

बाबा रामदेव-  जब सिस्टम आपकी बात सुन रहा है तो सिस्टम के सामने अपनी बात कहनी चाहिए. जब आदरणीय मोदी जी, अमित शाह जी मेरी बात सुन रहे हों, जेटली जी मेरी बात सुन रहे हैं, गडकरी जी मेरी बात सुन रहे हैं, राजनाथ जी सुन रहे हैं तो मैं उनके सामने अपनी बात रख दूं. मैंने असहयोग आंदोलन नहीं कर रखा है.

 

दिबांग- मतलब आप कह रहे हैं कि मैं अपनी बात उनके सामने कह देता हूं, वो मेरी बात सुन लेते हैं और रहता वही ढाक के तीन पात है, कुछ काम होता नहीं, काला धन कुछ नहीं किया, लगातार बढ़ रहा है काला धन तो ऐसी सुनवाई का फायदा क्या जब कुछ काम ना हो उसपर,  आप सिर्फ सुनवाई पर ही खुश हैं.

 

बाबा रामदेव-   आप मेरे को ज्यादा क्यों कुरेद रहे हैं.

 

दिबांग- मैं पूछ रहा हूं आप से

बाबा रामदेव-  ऐसा है कि बाबा की ये विश्वसनीयता है कि बाबा बेबाक बोलता है और अपने भीतर कुछ नहीं रखता है. लेकिन अब थोड़ा सा संकट है

 

दिबांग- वही मैं कह रहा हूं कि बाबा बेबाक बोलता है और लोग सुन लेते हैं करता कोई कुछ नहीं है.

 

बाबा रामदेव- अरे बाबा को जो करना है… अरे बाबा कोई पीएम है क्या, बाबा कोई मिनिस्टर है क्या. हमने उनको प्राइममिनिस्टर बनाने के लिए ताकत लगाई, देश के लोगों ने भी लगाई, एक भरोसे के साथ लगाई और अब भी तो थोड़ा समय है ना, थोड़ा तो मौका देना चाहिए.

 

दिबांग- कितनी देर और मौका देना चाहते हैं

 

बाबा रामदेव-  अब ये भी मुश्किल है, क्योंकि फिर आप दोबारा से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के बुलाओगे कि बाबा आप ने टाइम दिया था, अब क्या करोगे. अब जो ये सरकार की लीला है इस रामलीला कब शुरू होगी. अब ये सब दिक्कत वाली चीजें हैं. इसलिए आप मेहरबानी कर के आप मुझे ज्यादा संकट में मत डालिए. ये राजनैतिक संकट है. ये जो राजधर्म है ना ओम शांति ओम शांति

 

सवाल-  आप ने अभी कहा कि सरकार ठीक से काम नहीं कर पा रही है, कुछ काम मुझे दे दिया जाता तो अच्छा होता. बीच में एक ऐसा समय भी आया जब आप ने प्रधानमंत्री बनने की बात भी की. तो सरकार नहीं काम कर पाएगी तो क्या वो काम भी अपने हाथ में लेने की कोशिश करेंगे

 

बाबा रामदेव- पहले भी मैंने ये कहा था कि हम एक अच्छी व्यवस्था देश में देखना चाहते हैं, मैंने ये कभी नहीं कहा कि मैं प्रधानमंत्री बनूंगा, मैंने कहा था कि ये मेरी भीष्म प्रतीज्ञा है कि मैं कभी चुनाव नहीं लडूंगा, कोई राजनैतिक पद नहीं लूंगा. और मैं चाहता इसी सरकार में कम से 50 से 10 सांसद नई पार्टी बनाकर दे सकता था. और मैं चाहता तो रिमोट कंट्रोल से सरकार को चला सकता था.

 

दसअरल हमारे सारे ऋषि ऐसा करते थे जैसे मैं करता हूं लेकिन बीच में हमारे इन बाबाओं ने बहुत से घोटाले करने लगे इसलिए मेरे ऊपर आरोप लगने लगे. बाबाओं ने पैर पूजा शुरू कर दी, अपनी पूजा करवानी शुरू कर दी. ज्यादातर जितने इस समय बाबा हैं उनकी फोटो लगी मिलेगी और उस पर माला लगी मिलेगी. मेरे भी एक-आधा भक्त ऐसे काम करता है तो मैं कहता हूं कि ये क्या कर रहा है तो बोले बाबा जी रोज आप की पूजा करते हैं, फोटो लगाते हैं. मैंने कहा कि अपने मां-बाप के फोटो के ऊपर माला लगाई है तो बोले वो तो अभी जिंदा हैं तो मैं बोला मुझे स्वर्ग में पहुंचाना चाहते हो

 

दिबांग- आप ने सुना होगा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि अगर मुसलमानों को इस देश में रहना है तो उन्हें बीफ खाना छोड़ना पड़ेगा. क्या इस तरह के बयानों का जवाब देना चाहिए कि देश में कानून व्यवस्था है, इस तरह के बयान आ नहीं रहे हैं.

 

बाबा रामदेव- वैसे तो आमिर खान भाई बहुत अच्छे हैं. इन्होंने भारत की महिमा, अतुल्य भारत के विज्ञापन कितने चैनल पर चले हैं. भारत कभी भी असहिष्णु नहीं रहा इसका एक प्रमाण तो ये है कि यदि भारत असहिष्णु होता तो किरन इनके साथ शादी नहीं करतीं. किरन की शादी आमिर खान से हुई है तो इसका मतलब है कि भारत सहिष्णु है. दूसरी बात ये है कि हिंदूस्तान में रहने वाले जो मुसलमान हैं, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन, हिंदू हैं ये सब एक ही जैनेटिक स्ट्रक्चर वाले हैं, सबके जिंस एक हैं, खून एक हैं, सबके पूर्वज एक हैं सबकी संस्कृति, सभ्यता, वतन एक है. ये तो पिछले कुछ 5-7 सौ वर्षों में कुछ ईसाई बन गए, कुछ जैन बन गए, कुछ बौद्ध बन गए. हममें बहुत भाईचारा है. और ये जो असहिष्णुता वाली बातें हैं, मुझे राजनैतिक बयानबाजी से ज्यादा कुछ नहीं लगती है. कम से कम देश के सभ्य नागरिकों को जो स्वस्थ्य चिंतन वाले बुद्धजीवी हैं, उनको ऐसी बातें कर के देश की छवि दुनिया में खराब नहीं करनी चाहिए.

 

 

दिबांग- ये जो बयान आते हैं बड़े-बड़े उसमें मंत्री भी शामिल हैं. तुरंत पाकिस्तान भेज देते हैं लोगों को. जो भी हमारा विरोध करेगा वो पाकिस्तान जाएगा. क्या शीर्ष से इस तरह के बयान आने चाहिए

 

बाबा रामदेव- बिलकुल ऐसे बयान नहीं आने चाहिए. भारत में हमें सामाजिक समरता, सहिष्णुता भारत एकता, अखंडता, संप्रभुता, भारत की संस्कृति-सभ्यता क्या है वसुधैव कुटुम्बकम.   विविधता में एकता, भारत की विशेषता. ये हमारे बच्चे-बच्चे की जुबान पर है और हमने इस संस्कृति को जिया है और आज भी जी रहे हैं. आप कभी सड़क पर जाइए, कहां डर लगता है. मैं तो रोज सड़को पर घूमता हूं कहीं मुझे असहिष्णुता दिखाई नहीं देती. ये पॉलिटिकल प्रोपोगंडा है मोदी के खिलाफ. आज एक हिंदू चायवाले के घर में पैदा हुआ प्रधानमंत्री है. लोकतांत्रिक तरीके से बना हुआ प्रधानमंत्री है, इतना असहिष्णु मत बनो कि हर समय उसकी आलोचना करो. मुझे लगता है कि जो कांग्रेसी और कम्यूनिस्ट माइंड सेट के जो लोग हैं उनको ज्यादा दिक्कत है, असहिष्णुता दरअसल उनमें आ गई है.

 

 

दिबांग- आप खुद कह रहे हैं कि इस तरह के बयान मंत्रियों को नहीं देने चाहिए.

 

 

बाबा रामदेव-  नहीं देने चाहिए और मैं एक और आंतरिक बात बताता हूं, मोदी जी से मैं प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री जी से तीन बार प्रत्यक्ष रूप से मिला हूं, बैठते ही उनसे कहा कि इस तरह के बयान दे रहे हैं कि उससे सरकार और देश की छवि खराब होती रहती है और बहुत मन में पीड़ा होती है, ये मैंने उनसे व्यक्त किया कि आंतरिक वेदना बता रहा हूं आप से. एक बात तो मुस्कुरा कर कही और एक बात गंभीरता से कही. मुस्कुरा कर तो मैंने ये कहा कि मोदी जी मेरी तरफ से कोई ऐसा बयान नहीं आएगा जिससे आप या आपकी सरकार किसी भी तरह के संकट में पड़े और वैश्विक पटल पर आप को नीचा देखना पड़े. दूसरी बात जो लोग ये कर रहे हैं उनको नियंत्रित तो करना ही पड़ेगा,

 

दिबांग- जब आप कह रहे हैं कि उन्हीं की पार्टी के लोग इस तरह के बयान दे रहे हैं जिससे कि वो भी परेशान रहते हैं तो बाहर के लोगों का तो बाहर के लोगों का इस बारे में सवाल उठाना और सोचना तो स्वाभाविक है, आप को नहीं लगता है. इसमें राजनीति क्यों नजर आती है

 

बाबा रामदेव- मैं कह रहा हूं कि जो बीजेपी वाले ऐसा करें उनको पार्टी से निकाल के बाहर फेंक देना चाहिए. क्या दूसरे देशों के अंदर क्या आंतरिक प्रश्न नहीं होते, घरेलू हिंसा नहीं होती, क्या वहां आपस में खून खराबा नहीं होता है. तो हमारे यहां पर भी खून खराबा नहीं होना चाहिए किसी भी नाम पर हिंदू, मुसलमान के नाम पर, गाय के नाम पर, सुअर के नाम पर किसी भी नाम पर. लेकिन जो हमारे आंतरिक प्रश्न हैं उनको आपस में मिल-बांट के सुलझांए, दुनिया में भारत की बदनामी ना फैलाएं.

 

दिबांग- तो फिर बात वहीं पर आ गई. ना काला धन लाने पर कुछ काम करेंगे बाबा रामदेव, बाहर जवाब नहीं दे पा रहे हैं, जान रहे हैं कि अपनी पार्टी के लोग ऐसा कर रहे हैं.

 

बाबा रामदेव- अपनी पार्टी नहीं बीजेपी

 

दिबांग- बीजेपी के लोग ऐसा कर रहे हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई नहीं हो रही है तो हो क्या रहा है.

 

बाबा रामदेव- मैं आपका अप्वाइन्मेट करवा देता हूं प्रधानमंत्री जी से, आप जोर लगाइए थोड़ा सा.

 

दिबांग- दूसरा जवाब क्या है

 

बाबा रामदेव- ईश्वर अल्लाह तेरे नाम, सब को सनमति दे भगवान. क्या बोलूं.

 

सवाल- ऐसे व्यक्तित्व के स्वामी होके, कभी आप को जीवन में प्यार हुआ या प्यार का एहसास हुआ.

 

बाबा रामदेव- प्यार तो मेरा इतना ज्यादा है कि लबालब भरा हुआ हूं प्रेम से इसीलिए तो सब के लिए काम करता हूं.

 

सवाल- एक व्यक्ति के रूप में

 

बाबा रामदेव- पहले मैंने विरोध में जवाब दिया अब गंभीरता से दे रहा हूं, हम जो सन्यासी सेवा करते हैं इसके पीछे हमारे भीतर की करूणा, हमारे भीतर का प्रेम, हमारे भीतर का वात्सल्य तो वो जो प्रेम है सेवा, करूणा और वात्सल्य में रूपांतरित हो जाता है. तो इस तरह के प्रश्न हमारे जीवन में कभी नहीं आए. ये अलग बात है कि सन्यासी होने बाद भी हमें भी बहुत लोगों ने वो क्या कहते हैं प्रपोज करना कि बाबा जी हमें आप से प्यार हो गया है.

 

अब एक फंक्शन में था कि वो एक फिल्मी लड़की सामने आ गई, मैं दूर भागा वहां से, फिर ऐसे ही अमेरिका में था तो वहां भी एक ऐसा प्रसंग आया, एक बहुत सभ्य सी दिखने वाली जिसने करोड़ो के गहने पहने हुए थे. उसने बोला बाबा जी मुझे आप से एकांत में बात करनी है लास एंजलिस की बात है तो मैंने सोचा कि औरतों को कोई अपनी बीमारी की प्रश्न होता है तो मैं 10 कदम थोड़ा दूर हटा तो मैंने कहा बोलिए बहन जी तो बोली बाबा जी मैं अपना सब कुछ आप को देना चाहती हूं. मैंने कहा हमारा ट्रस्ट है उसमें आपको जो भी करना हो कर दीजिए, बोली बाबा जी आप समझे नहीं, फिर वो बोली मैं आप को तन, मन, धन सब कुछ देना चाहती हूं.

 

मैं तो चुपचाप वहां से खिसक लिया और मैंने कहा मेरे पीए का नंबर है तो हमारे साथ एक आचार्य जी रहते हैं तो मैंने उनका नंबर दे दिया, उनको कम से कम 1 हजार फोन किए होगें बाद में उस औरत में. मैं मुंबई में था तो एक औरत आई बोली बाबा जी एकांत में बात करनी है, इसलिए मैंने टीवी पर बयान दिया था कि बाबाओं को औरतों से अकेले में नहीं मिलना चाहिए, ऐसे तो मैं माताओं-बहनों को बहुत गौरव कहता हूं, मैं तो मां को धरती का भगवान कहता हूं.

 

उनसे फिर मेरे को प्रपोज किया. मुंबई में 10-12 साल पहले मैंने कैंप किया तो जब मैं शिविर से निकलता था तो लोग ऐसे फूंक मारते थे. मेरे को दो-तीन दिन तो समझ में नहीं आया तो मैंने बाद में पूछा कि सब लोग फूंक क्यों मारते हैं तो बोले बाबा जी आप के फैन हैं तो मैंने सुना था जो पंखा हिलता है वो फैन होता है. फिर बोली ये आप को फ्लाइंग किस करती हैं, मुझे तो ये नहीं पता था कि किस क्या होता है, ये फ्लाइंग किस क्या होता है. तो ये सब दुनिया में चलता होगा.

 

दिबांग- आप की कभी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी.

 

बाबा रामदेव- अरे कोई थी ही नहीं ना, किसी से कभी प्रेम नहीं हुआ कभी भी. ये गर्लफ्रेंड-ब्यायफ्रेंड होते ना तो जैसे बहुत से बाबा जेल में हैं ना बाबा रामदेव भी वहीं होता.

 

दिबांग- नहीं बचपन में कोई रही हो तो

 

बाबा रामदेव-  15 साल की उम्र में तो घर छोड़ दिया, हम गांव में पैदा हुए थे, वहां तो क्या अभी तक नहीं पता कि गर्लफ्रेंड का पूरा मतलब क्या होता है. मैंने सच में 8-10 दिन पहले पूछा कि गर्लफ्रेंड होती क्या है. तो बोले बच्चे आपस में प्यार से बात करने लगते हैं तो गर्लफ्रेंड हो जाती है. मैंने बोला गर्लफ्रेंड के साथ सादी करना जरूरी होता है. बोले नहीं बात आगे बढ़ गई तो ठीक नहीं तो नहीं होती, अभी तक हमें नहीं पता कि ये सब होता क्या है. आप हमको ये पूछते हो कि ये कभी हुआ क्या . जब हमको शब्दों के बारे में नहीं पता तो क्या पता क्या होता है ये. तुम जानो तुम्हारा काम जाने.

 

दिबांग- कभी ऐसा भाव आता है कि गर्लफ्रेंड होनी चाहिए, परिवार होना चाहिए, एक बच्चा होना चाहिए.

 

बाबा रामदेव-  किसी के मन में कुछ भी आता हो हमारे मन में कुछ भी नहीं आता कि हमारा किसी स्री के साथ शारिरिक संबंध होना चाहिए.

 

दिबांग- मैं शारिरिक संबंध वाली बात नहीं कर रहा हूं, मैं कह रहा हूं कि एक परिवार हो.

 

बाबा रामदेव-  नहीं कभी कोई परिवार या बच्चा करने की इच्छा ही नहीं हुई. और ना कभी होगी. कुछ लोग बुढ़ापे ही बिगड़ जाते हैं.

 

दिबांग- इसको आप बिगड़ना क्यों कहते हैं

 

बाबा रामदेव- अरे भईया जो रहो पूरे होकर रहो ना, साधू बने हो तो पूरे साधू बनकर रहो ना. गृहस्थ बनों तो पूरे बनो. ये बीच में लटकते क्यों रहते हो जैसे हमारे कुछ नेता, अभिनेता लटक रहे हैं.

 

सवाल अशोक वानखेड़े- क्या बाबा पॉलिटकल पार्टी लांच करेंगे एक विकल्प के तौर पर

 

बाबा रामदेव- एक आदर्श राजनैतिक विकल्प देश में होना चाहिए, मैंने पहले भी कहा था आज भी अपने उस स्टैंड पर मैं कायम हूं. विकल्प की अपेक्षा आदरणीय मोदी जी से करी है. अब हम जब अपने हाथो से, अपना सर्वस्व दांव पर लगा कर के, आदमी को दो ही चीजों की इच्छा होती है जिंदगी में पैसा और प्रतिष्ठा. तो हमने पैसा और प्रतिष्ठा को काम किया और हमारी दिल से इच्छा है कि मोदी जी कामयाब हों.

 

सवाल- मेरा सवाल यदि कामयाब नहीं हुए तो. क्योंकि लोगों ने आप पर विश्वास कर के उनको मतदान किया है. उनको आप ले आए हो. ऐसा नहीं कि चाणक्य ही किसी चंद्रगुप्त को लाएगा. क्या परशुराम बनेंगे

 

बाबा रामदेव-  अभी तो रामदेव से ही बहुत तकलीफ हो रही है, आप परशुराम बना रहे हो.

 

सवाल- पिछले साल जब भारत रत्न की बात हो रही थी तो उसमें आपका नाम भी आ रहा था तो क्या आप अपने आप को भारत रत्न के रूप में देखते हैं आगे

 

बाबा रामदेव-  मैं जन्मजात भारत रत्न हूं, मुझे किसी से पुरस्कार की क्या जरूरत है. देखो मैं जन्मजात भारत रत्न हूं और नोबल पुरस्कार पाने वालों से मैं ज्यादा कामयाब आदमी हूं. अपनी बड़ाई करनी नहीं चाहिए, कोई एक बीमारी को ठीक कर दे तो उसको नोबल पुरस्कार मिलता है. मैंने थायरॉयड क्योर किया है, बीपी क्योर किया है जो विश्व में लाइलाज बीमारी है, हेपेटाइटिस क्योर किया है, कैंसर तक ठीक किया है मैंने. मेरे पास पूरे डाक्यूमेंट हैं उसके. लेकिन ना हम इसके लिए लॉबिंग करेंगे और ना ही इसके लिए पुरस्कार की इच्छा है. सन्यासी को आदर और निरादर दोनों में सम रहना चाहिए.

 

 

रैपिड फायर राउंड-

सवाल नं.1- आप के अच्छे दिन कब थे. जब आप योग सिखाया करते थे, दिव्य फार्मेसी की तरफ से मुफ्त दवाइयां बांटा करते थे या अब जब आप योगी कम और व्यापारी ज्यादा लगते हैं, 5 हजार को 20 हजार करोड़ कैसे बनाऊंगा इसके बारे में बात करते हैं

बाबा रामदेव- व्यापारी नहीं उपकारी हूं. कमाई के लिए नहीं भलाई के लिए काम कर रहा हूं. मेरे तब भी अच्छे दिन थे और आज भी अच्छे दिन हैं. और मैं देश के अच्छे दिन लाने के लिेए पूरी कोशिश करता हूं.

 

दिबांग- दोनों में से एक चुनना हो तो आप क्या चुनेंगे.

बाबा रामदेव- वो भी दिन अच्छे थे, ये भी दिन अच्छे हैं.

 

सवाल नं.2- ज्यादा अच्छा नेता कौन…. अरविंद केजरीवाल या लालू यादव

बाबा रामदेव- बड़े जोर से प्रश्न गढ़ के लाए हो, लगता है आज मुझे गिफ्ट मिलेगा नहीं. दरअसरल अरविंद केजरीवाल जी को अच्छे नेता का टैग लगाने के लिए बहुत कुछ करना बाकी है और लालू यादव जी के ऊपर जो गलत टैग लगा है उसको हटाना बाकी है इसलिए रामदेव का उत्तर देना बाकी है.

दिबांग- सवाल पास, रामदेव फेल

 

सवाल नं3- खरा योग कौन सा है…. पतंजलि योग या मुंगेर योग

बाबा रामदेव-  खरा योग पतंजलि योग है. स्वामी सत्यानंद जी ने मुंगेर योग नहीं कहा उन्होंने आर्श्व योग कहा ऋषियों का योग. तो पतंजलि योग को ही मुंगेर वाले मानते हैं, इसलिए पतंजलि योग ही खरा योग है.

 

सवाल नं4- आपको ज्यादा खुशी भविष्य में कब होगी…. सफल बिजनेस साम्राज्य बनाएं या एक सफल राजनैतिक दल बनाएं

बाबा रामदेव- राजनैतिक दल बनाना तो मेरा मकसद नहीं है. बहुत बड़ा साम्राज्य खड़ा करके उससे सेवा का एक इतिहास बनाना, साधना का एक इतिहास बनाना.

 

सवाल नं5-  क्या आप अभी भी नोली कर सकते हैं 

बाब रामदेव ने प्रेसकॉन्फ्रेंस में नोली करके दिखाया.

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