बाबा रामदेव ने 'पाकिस्तानी टैंक' पर चढ़कर गाया 'मेरा रंग दे बसंती'

By: | Last Updated: Sunday, 13 September 2015 3:36 PM

नई दिल्ली: भारत पाकिस्तान बॉर्डर पर पहुंचे योगगुरु बाबा रामदेव. बाबा पहुंचे तो थे बीएसएफ के जवानों को योग सिखाने लेकिन सरहद पर बाबा रामदेव देशभक्ति के रंग में डूबे हुए नजर आए.

 

बाबा रामदेव राजस्थान में भारत पाकिस्तान के उस बॉर्डर के पास मौजूद थे जहां 1971 की लोंगेवाला की लड़ाई हुई थी. एक तरफ पाकिस्तान की टैंक से सजी हजारों की फौज थी तो दूसरी तरफ भारत के सिर्फ 120 जवान. लेकिन भारत के हाथ पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी.

 

जवानों से मिलने पहुंचे बाबा रामदेव 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुई लड़ाई की कहानी याद कर एक भारतीय होने का गर्व महसूस कर रहे थे. देशभक्ति के रंग में रंगे बाबा रामदेव ने उसी पाकिस्तानी टैंक पर चढ़कर रंग दे बसंती गाया जिसे लेकर पाकिस्तानी भारत की सीमा में घुसना चाहते थे

 

मौका था बीएसएफ जवानों की गोल्डन जुबली के जश्न का. इस जश्न का हिस्सा बनने के लिए बाबा रामदेव भी जवानों के साथ बॉर्डर पर मौजूद थे. राजस्थान के जैसलमेर में बाबा रामदेव का तीन दिनों तक बीएसएफ के जवानों को योग सिखाने का कार्यक्रम था.

 

योग की पाठशाला के अलावा बाबा रामदेव तपती गर्मी में बॉर्डर पर तैनात सैनिकों से मिलकर उनका हौंसला भी बढ़ा रहे थे. इसी कड़ी में बाबा रामदेव सबसे पहले पहुंचे थे पाकिस्तान की सीमा से सटे लोंगेवाला सेक्टर में. जहां वो खुद को ना तो पाकिस्तान के टैंक पर चढ़ने से रोक पाए और ना ही देश के लिए रंग से बसंती गाने से.

 

भारत पाकिस्तान बॉर्डर पर मौजूद बाबा रामदेव 1971 की लड़ाई के ऐसे कई किस्सों को सुनते और सुनाते हुए नजर आए जो आज भी भारतीय सेना की जांबाजी के तौर पर याद किए जाते हैं. ऐसा ही एक किस्सा इस पाकिस्तानी पिलर के साथ जुड़ा हुआ है. इस पिलर को पाकिस्तानी सेना इस इरादे के साथ लेकर आई थी कि लोंगेवाला को फतेह करने के बाद झंडा दिल्ली तक जाएगा लेकिन भारतीय जांबाजों ने पाकिस्तानी सेना के मंसूबों को मिट्टी में मिला दिया था.

 

1971 में लोंगेवाला की लड़ाई पर बनी फिल्म बॉर्डर में भी इस किस्से का बखूबी जिक्र किया गया था. लोंगेवाला के बाद बाबा रामदेव का काफिला वहां से कुछ किलोमीटर दूर माता तनोट के मंदिर पहुंचा. यहां बाबा रामदेव ने युद्ध में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी. उसके बाद माता तनोट के मंदिर में दर्शन किए और आरती में भी हिस्सा लिया. आरती के बाद बाबा रामदेव भजन भी गुनगुनाते हुए नजर आए.

 

बॉर्डर फिल्म में पास के गांव में एक मंदिर था जिसके आस-पास कई बम गिरे थे. ये तनोट माता के मंदिर की वो कहानी है जब बम की बरसात होती रही थी लेकिन मंदिर को तिनके भर का भी नुकसान नहीं हुआ था. बाबा रामदेव को अब तक टीवी पर देखने वाले जवान अपने बीच पाकर खुशी से फूले नहीं समा रहे थे. तनोट माता के मंदिर में दर्शन करने के बाद बाबा रामदेव ने जीरो लाइन पर जाकर वहां तैनात जवानों से भी मुलाकात की.

 

बाबा ने सिखाया, योग से रोग को कैसे भगाया जाता है

बॉर्डर पर बाबा रामदेव के कार्यक्रम की शुरुआत 11 सितंबर को हुई थी. 11 सितंबर को सुबह का सूरज उगने से पहले रामदेव बीसएएफ के जवानों के साथ योग के लिए मैदान में मौजूद थे.

 

बाबा रामदेव ने सिर्फ योग करना नहीं सिखाया बल्कि जवानों को ये भी बताया कि योग से रोग को कैसे भगाया जाता है. अभी उजाला भी नहीं हुआ था लेकिन योग सिखाने वाले बाबा रामदेव और सीखने वाले जवानों और महिलाओं से मैदान भरा हुआ था. बाबा रामदेव ने योग की इस पाठशाला में कई क्रियाएं करवाईं.

 

पेट से लेकर कमर की चर्बी कम करने तक सारे आसन करवाए गए. 12 सितंबर की सुबह भी योग का सिलसिला जारी रहा. दूसरे दिन शुरुआत प्राणायाम के साथ हुई, लेकिन दूसरे दिन योगआसन नहीं हुए. जिंदगी में योग के सहारे दवा से कैसे दूर रहा जा सकता है ये रामदेव ने बताया.

 

आजकल सबसे ज्यादा प्रकोप डेंगू का है देश की राजधानी दिल्ली से लेकर कई शहरों में डेंगू की वजह कोहराम मचा हुआ है. बाबा रामदेव ने योग के सहारे डेंगू का भगाने का उपाय भी बताया.

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Web Title: Baba Ramdev teaches yoga to BSF personnel
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