BBC Documentary Controversy: Anu Aga, Javed Akhtar view

BBC Documentary Controversy: Anu Aga, Javed Akhtar view

By: | Updated: 05 Mar 2015 08:10 AM

नई दिल्ली: बीबीसी डॉक्यूमेंट्री पर विवाद क्या हुआ, कई तरह की सोच और बयान सामने आने लगे. पक्ष हो या विपक्ष सभी इस डॉक्यूमेंट्री के खिलाफ खड़े हो गए. लेकिन राज्यसभा में जावेद अख्तर और अनु आगा के बयानों ने एक अलग एंगल से सोचने पर मजबूर कर दिया है.

 

फ़िल्म गीतकार और सांसद जावेद अख़्तर ने कहा, "अच्छा हुआ है कि यह डॉक्युमेंट्री बनी है और इससे सच सामने आएगा. सरकार इस डॉक्युमेंट्री पर रोक लगाकर लोगों को सच जानने रोक रही है."

 

जावेद अख्तर ने इस डॉक्युमेंट्री कौ बैन करने पर तल्खी जताते हुए कहा, "गुस्सा इस बात पर है कि ये दुनिया को क्यों बताया जा रहा है कि रेपिस्ट ये गंदी बाते कर रहा है. इस तरह की बातें तो मैं इस हाउस में सुन चुका हूं कि औरत रात को सड़क पर घूमेगी तो वो आमंत्रित कर रही है. हिंदुस्तान के करोड़ो आदमियों को मालूम हुआ कि वे रेपिस्ट की तरह सोचते हैं. अगर उन्हें गंदा लग रहा है तो उन्हें अपनी सोच बदल लेनी चाहिए.''

 

एबीपी न्यूज़ से बातचीत में जावेद अख्तर ने कहा, "हम नाराज डॉक्युमेंट्री से हैं लेकिन हमें ये सोचना चाहिए कि जो रेपिस्ट कह रहा है वही बहुत सारे समाज सेवी बोलते हैं. इनकी बातों में और रेपिस्ट की बातों में फर्क क्या है?"

 

इसके अलावा संसद में अनु रागा ने भी पुरूषों की सोच पर सवाल उठाते हुए, "डॉक्युमेंट्री पर रोक लगाने की कोशिश को ग़लत. करार दिया है. अनु आगा ने  कहा, 'सिर्फ रेपिस्ट ही नहीं ये वास्तविकता है कि जो आरोपी ने बोला वही अपने देश के कई मर्दों की सोच है. हम इससे भाग क्यों रहे हैं?  जहां हम हर बात को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं. जिन मुद्दों से मुकाबले की जरूरत है हम उससे भाग रहे हैं. आरोप को मौत की सजा दे देना या फिर इस डॉक्युमेंट्री को बैन कर देना इसका समाधान नहीं है. हमें इस बात को स्वीकार करने की जरूरत है कि भारत में मर्द महिलाओं की इज्जत नहीं करते हैं. और जब भी रेप की बात होती है तो सारा आरोप लड़की पर मढ़ा जाता है कि उसने कपड़े सही नहीं पहने. यह सिर्फ जेल में  रह रहे उस रेपिस्ट की सोच नहीं  है यह भारत के बहुतेरे मर्दों की सोच है. हमें यह दिखाने की जरूरत नहीं है कि 'ऑल इज़ वेल'."

 

इस मुद्दे को लेकर संसद से सोशल मीडिया तक घमासान मचा हुआ है. यहां पर कुछ लोगों का कहना है कि आरोपी के बयान को प्रचारित कर उसकी बेइज्जती की जा रही है. हालांकि सोशल मीडिया पर लोगों ने अनु आगा और जावेद अख्तर के बयान की भी आलोचना हो रही है.

 

 

दिल्ली पुलिस ने दर्ज की एफआईआऱ-

आपको बता दें कि दिल्ली पुलिस ने तिहाड़ जेल के अधिकारियों को नोटिस भेजकर पूछा है कि उन्होंने मुकेश के इंटरव्यू के प्रसारण की इजाजत कैसे दी है. दिल्ली पुलिस ने इस सिलसिले में धारा 509 और 504 के तहत केस दर्ज किया है.

 

डॉक्युमेंट्री निर्माता का पक्ष-

इस डॉक्युमेंट्री को ब्रिटीश के स्वतंत्र फिल्म निर्माता औऱ निर्देशक लेज्ली उडविन ने बनाई है. लेज्ली उडविन ने एफआईआर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, ''एफआईआर दर्ज होने के लेकर मैं दुखी हूं लेकिन दूसरी तरफ मुझे लगता है कि इसका परिणाम एक आंदोलन की तरह आएगा जो कि इतनी आसानी से नहीं होता है.''

 

इसका प्रसारण बीबीसी 4 और एनडीटीवी पर आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस होना था. लेकिन भारत सरकार ने अब इसके प्रसारण पर रोक लगा दी है.

 

इंटरव्यू पर विवाद क्या है?

बीबीसी डॉक्यूमेंट्री के लिए इंटरव्यू में मुकेश ने कहा, ''निर्भया और उसके दोस्त ने अगर हमसे लड़ाई नहीं की होती, तो उन्हें इस कदर नहीं पीटा जाता कि उसकी जान ही चली जाती. रेप और हत्या को एक घटना करार देते हुए मुकेश ने कहा कि जब रेप हो रहा था, तब उसे प्रतिरोध नहीं करना चाहिए था. उसे उस वक्त चुप रहना चाहिए था और हम जो कर रहे थे वो करने देना चाहिए था। अगर ऐसे होता तो हम निर्भया को कहीं पर छोड़ देते.''

 

बीबीसी ने 2013 में तिहाड़ जेल में बंद मुकेश कुमार से इंटरव्यू की इजाजत मांगी थी, तिहाड़ की तरफ से बीबीसी को इजाजत भी दे दी गई थी और इंटरव्यू भी कर लिया था. तिहाड़ प्रशासन ने इंटरव्यू देने से पहले ये शर्त रखी थी कि बीबीसी प्रसारण से पहले फाइनल डॉक्यूमेंटरी उन्हें दिखाएगा और जेल अथॉरिटी की इजाजत के बाद ही प्रसारण किया जाएगा लेकिन बीबीसी ने ये नहीं किया.

 

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