श्रद्धांजलि सभा में शराब पीकर पहुंचे आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान!

By: | Last Updated: Monday, 26 October 2015 5:09 PM
Bhagwant Mann denies being drunk

नई दिल्ली: पंजाब के फरीदकोट की हिंसा में मारे गए दोनों युवकों की श्रद्धांजलि सभा में आप सांसद भगवंत मान के शराब पीकर पहुंचने का आरोप लगा है. गुस्साई भीड़ ने भगवंत मान को वहां से फौरन भगा दिया. हालांकि भगवंत मान ने सफाई देते हुए इसे अपने खिलाफ झूठा प्रचार करार दिया है.

 

आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान को भगाने की ये तस्वीरें पंजाब के फरीदकोट की हैं. भीड़ के गुस्से को भांपते हुए भगवंत मान ने वहां से उल्टे पांव निकलने में ही अपनी भलाई समझी.

 

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर भगवंत मान ने ऐसा क्या कर दिया जिसके वजह से उन्हें इस शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा? दरअसल, पंजाब के फरीदकोट में 12 अक्टूबर को गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान के बाद हिंसा भड़क गई थी. बवाल इतना बढ़ गया था कि भीड़ को शांत कराने के लिए पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी जिसमें दो युवकों की मौत हो गई थी. फरीदकोट में दोनों युवकों की श्रद्धांजलि सभा थी जिसमें आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान पहुंचे थे. आरोप है कि इस दौरान भगवत मान नशे की हालत में थे जिसका वहां मौजूद लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया.

 

इससे पहले भगवंत मान की वहां मौजूद लोगों से बातचीत भी हुई थी जिसमें वो फरीदकोट में मारे गए दोनों युवकों की मौत पर अफसोस जता रहे थे.

 

भगवंत मान के इस वीडियों के वायरल होने के बाद उन्होंने फेसबुक फर सफाई भी दी है. भगवंत मान ने लिखा है कि दोस्तों, मुझे बदनाम करने के लिए झूठा प्रचार किया जा रहा है. शराब पीने वाली बात सही नहीं हैं. मैं इसके बारे में सोच भी नहीं सकता हूं, ये असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश है. मैं सच्चे दिल से लोगों के हक की लड़ाई जारी रखूंगा.

 

वहीं आम आदमी पार्टी से निकाले गए योगेंद्र यादव ने फेसबुक पर लिखा है कि भगवंत मान पार्टी की मीटिंग में भी शराब पीकर आते थे. मैंने और प्रशांत भूषण ने इस मुद्दे को पार्टी में उठाया भी था. मुझे ये भी सुनने को मिला था कि भगवंत मान लोकसभा में शराब पीकर जाते थे.

 

क्या है विवाद?

 

इस साल जून में बुर्ज जवाहरसिंह वाला से गुरु ग्रंथ साहब की चोरी हो गई. 12 अक्टूबर को बरगारी गांव में पवित्र ग्रंथ के फटे हुए पन्ने मिले. सिख समुदाय में इसे लेकर भारी आक्रोश था और इस आक्रोश को पहले हुई एक घटना ने और भी भड़का दिया. 23 सितंबर को अकाल तख्त ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को गुरु गोविंद सिंह के अपमान के मामले में माफीनामा दे दिया गया था. सिख समुदाय के लोग इससे आहत थे और जब 12 अक्टूबर को पवित्र ग्रंथ के फटे हुए पन्ने मिले तो गुस्से ने हिंसा का रूप ले लिया.  

 

14 अक्टूबर को पुलिस और सिख प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव शुरू हो गया. हंगामें में 2 की मौत हो गई और पुलिस के बड़े अधिकारी समेत 70 लोग घायल हो गए.

 

फरीदकोट में हुई हिंसा पर राजनीति भी हो रही है. यही वजह है कि कोई भी पार्टी इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती है. पंजाब में साल 2017 में विधानसभा चुनाव भी होने हैं. आम आदमी पार्टी ने भी विधानसभा चुनाव के लिए जमीन तैयार करना शुरू कर दिया है.

 

यही वजह थी कि भगवंत मान दोनों युवकों की श्रद्धांजलि सभा और भोग कार्यक्रम में पहुंचे थे लेकिन उनका यहां पहुंचना कुछ लोगों को रास नहीं आया.

 

इससे पहले आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी फरीदकोट हिंसा पर अफसोस जताने के लिए पहुंचे थे. केजरीवाल ने पवित्र गुरु ग्रंथ का अपमान किए जाने के विरोध में फरीदकोट में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की गोलीबारी में मारे गए दो सिखों के परिवार वालों से मुलाकात की थी. केजरीवाल ने पंजाब में प्रकाश सिंह बादल सरकार पर निशाना साधते हुए उनकी सरकार को नाकाम बताया था. पंजाब में इस वक्त बीजेपी और अकाली दल की सरकार है. केजरीवाल के इस हमले क जवाब भी अकाली दल ने दिया था. बीजेपी और अकाली दल ने कहा था कि केजरीवाल हिंसा पर राजनीति कर रहे हैं और इसके जरिए वो पंजाब की राजनीति में अपनी पार्टी के लिए जमीन तलाश रहे हैं.

 

केजरीवाल की मंशा पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि 2014 में लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद वो पहली बार पंजाब आए. करीब डेढ़ साल बाद केजरीवाल का पंजाब आना बता रहा है कि केजरीवाल की नजर 2017 में होने वाले चुनाव पर है. आम आदमी पाटी ने विधानसभा चुनाव से पहले अपनी राज्य इकाई का पुनर्गठन करना भी शुरू कर दिया है.

 

‘आप’ के लिए पंजाब क्यों अहम?

 

आम आदमी पार्टी ने पिछले लोकसभा चुनाव में सिर्फ चार सीटें जीती थीं और ये चारों सीटें पंजाब से ही थीं. पटियाला से धर्मवीर गांधी, फतेबगढ़ साबिह से हरिंदर सिंह, संगरूर से भगवंत मान और फरीदकोट से प्रो. साधु सिंह जीते थे.

 

आम आदमी पार्टी ने अपने दो लोकसभा सांसदों धर्मवीर गांधी और हरिंदर सिंह को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया. इन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप था और बाकी बचे दो सांसदों में न सिर्फ भगवंत मान शामिल हैं बल्कि पंजाब में पार्टी का सबसे बड़ा चहरा ही भगवंत मान हैं. हालांकि लोकसभा चुनाव में पंजाब में मिले अच्छे नतीजों की वजह से ही आम आदमी पार्टी को विधानसभा चुनाव में यहां से काफी उम्मीदें हैं और वो सारे राजनीतिक दावं-पेच अपना रही है.

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