स्कूलों में संस्कृत या शास्त्रीय भाषा अनिवार्य करने की शिफारिश

By: | Last Updated: Thursday, 9 July 2015 3:43 AM
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फाइल फोटो

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े एक संगठन ने शिक्षा नीति में बदलाव की पेशकश की है, संगठन की मानें तो संस्कृत या दूसरे शास्त्रीय भाषा जैसे अरबी, फारसी, लैटिन और ग्रीक को कम से कम चार साल के लिए स्कूली शिक्षा में अनिवार्य बनाया जाए.

 

‘भारतीय शिक्षण मंडल’ की ओर से जारी किए गए बदलाव की पेशकश में शुरुआती शिक्षा के पहले आठ सालों में मातृभाषा पहली भाषा होगी जबकि हिन्दी, संस्कृत या दूसरी राष्ट्रीय भाषाएं या अंग्रेजी को दूसरी भाषा के रूप में चुना जा सकेगा.

 

संगठन ने इसके लिए जनता के सुझाव भी मांगे हैं. संगठन का ये भी मानना है कि नीति में ऐसी छूट होनी चाहिए जिसमें अगर कोई छात्र अंग्रेजी नहीं पढ़ना चाहता तो उसे ऐसा करने की छूट होनी चाहिए.

 

हालांकि संगठन के मसौदे के अनुसार, अगले चार वर्षों की शिक्षा के दौरान ‘‘विद्यार्थी को हिन्दी या अंग्रेजी भाषा पढ़े बगैर अपनी शिक्षा पूरी करने का विकल्प मिलना चाहिए, लेकिन उसके लिए संस्कृत या किसी अन्य शास्त्रीय भाषा का ज्ञान होना अनिवार्य होगा.’’

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