भोपाल गैस त्रासदी का खौफ 30 साल बाद भी बरकरार

By: | Last Updated: Monday, 1 December 2014 5:04 PM

बेंगलुरू: भोपाल गैस त्रासदी के तीन दशक बाद भी इस तरह की अनेक घटनाएं आज भी देश में घट रही हैं, जिससे उस त्रासदी से पैदा हुई दहशत ताजा हो जाती है.

 

ऐसी तीन घटनाएं इसी साल जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताजपोशी के कुछ ही दिनों बाद हुई हैं. भिलाई इस्पात संयंत्र में गैस विस्फोट से छह की मौत हो गई और 30 घायल हुए, आंध्र प्रदेश के नगरम गांव में एक गैस पाइपलाइन विस्फोट में 17 की मौत हो गई और केरल के कोल्लम में एक सरकारी संयंत्र में गैस रिसाव के कारण 130 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

 

कुछ ही दिन पहले 19 नवंबर को एक तेल कुएं में हुए विस्फोट से गुजरात के संथोल गांव में दहशत फैल गई.

 

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के मुताबिक देश भर में 1,861 दुर्घटना संभावित इकाइयां चल रही हैं.

 

असंगठित क्षेत्र में भी ऐसी इकाइयों की संख्या गिनती नहीं की जा सकती है, जो खतरनाक पदार्थो से संबंधित कारोबार करती हैं. एनडीएमस के मुताबिक 1999 से 2009 के बीच 130 प्रमुख रसायनिक दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं. गत चार साल में इस तरह की 20 घटनाएं दर्ज की गई हैं.

 

भोपाल हादसे में बचे प्रभावितों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले संभावना ट्रस्ट के सतीनाथ षड़ंगी ने कहा कि इन हादसों से सुरक्षा व्यवस्था की प्रणालीगत खामियों का पता चलता है.

 

षड़ंगी ने कहा, “(कानूनों का) असर काफी कम है, क्योंकि उन्हें ठीक तरह से लागू नहीं किया जा रहा है.”

 

इस बीच कई बड़े कदम उठाए गए हैं, लेकिन भोपाल गैस त्रासदी के प्रभावितों को अब भी न्याय नहीं मिल पाया है.

 

भोपाल हादसा देश के लिए एक चेतावनी थी. लेकिन क्या भारत अब भी इस तरह के हादसों से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क हुआ है?

 

एक गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) टॉक्सिकवाच एलायंस के गोपाल कृष्णा ने कहा कि 2020 तक देश में 33 हजार किलोमीटर गैस पाइपलाइन बिछी होगी. इसका कुछ हिस्सा सघन बस्तियों से होकर भी गुजरेगा. इनमें सख्त सुरक्षा मानक अपनाने की जरूरत होगी.

 

एनडीएमए के मुताबिक देश में परमाणु हादसे का भी खतरा है. बेंगलुरू के एक प्रतिष्ठित भूकंपशास्त्री विनोद गौड़ ने कहा कि महाराष्ट्र के जैतापुर में प्रस्तावित दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र भूगर्भीय फाल्ट से सिर्फ 10 किलोमीटर की दूरी पर है, जहां 6.5 तीव्रता का भूकंप आ सकता है.

 

षड़ंगी ने कहा, “यह मानने का पर्याप्त कारण है कि आज 1984 की अपेक्षा भोपाल गैस हादसे जैसा हादसा होने की संभावना अधिक है.”

 

आज कई गुना अधिक खतरनाक सामग्रियों का या तो आयात हो रहा है या उत्पादन हो रहा है.

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