कौन जीतेगा मुजफ्फरपुर का महासंग्राम ?

By: | Last Updated: Monday, 17 August 2015 5:35 PM
bihar election 2015

नई दिल्ली: मुजफ्फरपुर उत्तर बिहार की राजधानी कही जाती है. राजनीतिक रूप से ये जिला हर पार्टी के लिए अहम है. जिले में विधानसभा की 11 सीटें हैं. 2010 के चुनाव में जेडीयू को 6, बीजेपी को 4 और आरजेडी को 1 सीट मिली थी. जेडीयू के बागियों की वजह से जिले का पूरा राजनीतिक समीकरण बदल गया है. जेडीयू के टिकट पर जीते 4 विधायक लालू से दोस्ती के खिलाफ नीतीश का साथ छोड़ चुके हैं. मीनापुर, सकरा, कांटी और साहेबगंज से जीते विधायक बागी हैं. मीनापुर और सकरा के विधायक दिनेश प्रसाद और सुरेश चंचल का बीजेपी से लड़ना तय है. मीनापुर से दिनेश प्रसाद की जगह उनके बेटे बीजेपी के उम्मीदवार हो सकते हैं. कांटी और साहेबगंज वाले विधायक हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के साथ हैं. लेकिन रामविलास पासवान इन दोनों नेताओं के एनडीए में आने के खिलाफ हैं. पासवान का विरोध रंग लाया तो फिर दोनों का लड़ना मुश्किल होगा. मीनापुर से वैसे आरएलएसपी के विनोद कुशवाहा और एलजेपी के अवधेश पासवान भी दावेदार हैं. जेडीयू की बाकी जीती हुई दो सीटों में कुढ़नी से मनोज कुशवाहा की उम्मीदवारी तय है. बोचहां के विधायक और मंत्री रमई राम अंतिम समय में पाला बदल सकते हैं. पाला बदलने में रमई का इतिहास दागदार है. पासवान और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के लिए बोचहां और कुढ़नी की सीट बीजेपी सहयोगियों के लिए छोड़ सकती है.

 

बीजेपी की जीती हुई चार सीटों में से गायघाट को छोड़कर बाकी तीनों पर मौजूदा विधायकों को टिकट मिलने की उम्मीद है. गायघाट की विधायक वीणा सिंह के पति दिनेश सिंह जेडीयू के टिकट पर विधान परिषद का चुनाव जीते हैं. जेडीयू के खाते में सीट के जाने पर वीणा सिंह उम्मीदवार हो सकती हैं. अगर महागठबंधन में सीट आरजेडी के पास रही तो महेश्वर यादव फिर उम्मीदवार होंगे . ऐसी स्थिति में वीणा सिंह बीजेपी की पसंद होंगी.

 

बरूराज सीट अभी आरजेडी के कब्जे में है. मौजूदा विधायक ब्रज किशोर सिंह बीजेपी के टिकट पर लड़ सकते हैं. ऐसे में पूर्व विधायक शशि कुमार राय के परिवार से कोई उम्मीदवार आरेजेडी या जेडीयू का उम्मीदवार हो सकता है. मोतीपुर के सामाजिक कार्यकर्ता श्रीकांत चौधरी की मानें तो बरूराज सीट पर नीतीश कुमार प्रभावहीन हैं. ब्रज किशोर सिंह या उनके बेटे को बीजेपी टिकट मिलता है तो फिर पूरा समीकरण बदल जाएगा. जिसका फायदा बीजेपी को होगा. शशि राय के मूर्ति अनावरण कार्यक्रम एक तरीके से उतना सफल नहीं रहा जितना होने चाहिए था. श्रीकांत चौधरी इसे जिले का मूड मान रहे हैं.

 

मुजफ्फरपुर शहर से सुरेश शर्मा का बीजेपी से लड़ना तय है. महागठबंधन में सीट आरजेडी के पास जाने पर प्रदेश प्रवक्ता मोहम्मद शमी इकबाल, विवेक कुमार मजबूत दावेदार हैं. शमी इकबाल कांटी से भी उम्मीदवारी की तलाश में हैं. कायस्थ वोटों की ज्यादा संख्या की वजह से कांग्रेस की भी इस सीट पर दावेदारी मानी जाती है. कांग्रेस को सीट मिली तो फिर प्रदेश कांग्रेस के सचिव अरविंद कुमार मुकुल लड़ सकते हैं. लोकसभा में ये सीट लड़ने के लिए लालू ने कांग्रेस को दी थी. जेडीयू के दावेदारों की संख्या सबसे ज्यादा है. पूर्व विधायक विजेंद्र चौधरी, जिला अध्यक्ष गणेश भारती, नगर अध्यक्ष शब्बीर अहमद पप्पू भी टिकट की आस लिए पटना में डेरा डाल रहे हैं. जेडीयू में ज्यादा दावेदार होने की वजह से सीट किसी सहयोगी को मिलने की उम्मीद है. ऐसा हुआ तो नगर में भितरघात की भारी आशंका है.

 

बाढ़ग्रस्त औराई सीट जेडीयू के खाते में जाना तय है. पूर्व सांसद अर्जुन राय यहां से विधायक रह चुके हैं. अर्जुन राय पत्नी की उम्मीदवारी के लिए प्रयास कर रहे हैं. लेकिन पार्टी पत्नी की बजाए अर्जुन राय को टिकट देगी. बीजेपी से मौजूदा विधायक राम सूरत राय का भी लड़ना तय है. ऐसे में पूर्व मंत्री गणेश यादव क्या करेंगे ये देखने वाली बात है. जिस तरीके से पप्पू यादव की पार्टी औराई में सक्रिय हो गई है उससे तो यही लग रहा है कि यहां से जन अधिकार पार्टी अपना उम्मीदवार उतारने वाली है. जन अधिकार पार्टी से संजय चौधरी को टिकट मिलना तय है. संजय चौधरी पहले समता पार्टी में बड़े पदों पर रह चुके हैं. संजय की पत्नी भी कई सालों से ब्लॉक प्रमुख हैं. यादव उम्मीदवारों के बीच एक ब्रह्मर्षि के होने का फायदा भी संजय को मिल सकता है.

 

कुढ़नी से मनोज कुशवाहा जेडीयू के उम्मीदवार होंगे. ऐसे में आरजेडी और कांग्रेस के दावेदार दूसरी पार्टी का रुख कर सकते हैं. कुढ़नी सीट महागठबंधन में किसे मिलेगी इसको लेकर अभी सस्पेंस है. सकरा में सुरेश चंचल के मुकाबले महागठबंधन शीतल राम, श्याम कल्याण, विलट पासवान में से किसी पर दांव लगा सकती है. साहेबगंज से राजू सिंह एनडीए का टिकट पा गए तो फिर महागठबंधन पिछड़ी जाति का उम्मीदवार उतारेगा. चंद्रिका साहू से लेकर पूर्व मंत्री रामविचार राय तक यहां हाथ पांव मार रहे हैं.

 

मीनापुर में दिनेश प्रसाद के मुकाबले आरजेडी से राजीव यादव या मिथलेश यादव आरजेडी के उम्मीदवार हो सकते हैं. वैसे कांग्रेस भी दावा करेगी. पूर्व मंत्री हिंद केशरी यादव अभी यहां सक्रिय हैं.

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