बिहार चुनाव: महुआ में कैसा है लालू के लाल का हाल ?

By: | Last Updated: Friday, 23 October 2015 4:41 PM
bihar election 2015: lalu’s son

नई दिल्ली: वैशाली जिले की महुआ सीट से लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप चुनाव लड़ रहे हैं. असल जिंदगी में तेज प्रताप लालू के बड़े बेटे हैं. लेकिन सियासी जिंदगी में छोटे. ऐसा इसलिए क्योंकि चुनावी हलफनामे में तेज प्रताप की उम्र 25 साल है जबकि छोटे बेटे तेजस्वी की उम्र 26 साल. नामांकन के वक्त इस पर बड़ा विवाद हो चुका है.

 

महुआ सीट से पहले लालू का कोई सीधा वास्ता नहीं था क्योंकि पहले महुआ सुरक्षित सीट थी. 2010 में सामान्य सीट होने के बाद जेडीयू के रवींद्र यादव यहां से जीतकर विधायक बने. इस बार रवींद्र यादव एनडीए में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के उम्मीदवार हैं.

 

वैसे तो सीधा मुकाबला इन दोनों उम्मीदवारों के बीच है. लेकिन आरजेडी के बागी जगेश्वर राय पप्पू यादव की पार्टी से मैदान में उतरकर चुनाव को त्रिकोणीय बनाने की हर मुमिकन कोशिश कर रहे हैं. 2010 के चुनाव में जगेश्वर राय लालू की पार्टी के उम्मीदवार थे. तब रवींद्र राय के हाथों बुरी तरह हार गए थे. जगेश्वर इस बार भी लालू की पार्टी से टिकट चाह रहे थे. लेकिन लालू को तो अपने बेटे को चुनाव लड़ाना था सो जगेश्वर का पत्ता साफ हो गया. लालू जब महुआ में टिकट बंटवारे से पहले सभा करने पहुंचे थे तो जगेश्वर समर्थकों ने हंगामा भी किया था.

 

2010 के विधानसभा चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने लालू के परिवार का होश खराब कर रखा है. यही वजह है कि राबड़ी देवी महुआ से बाहर निकल ही नहीं पा रही हैं. महुआ से बेटे को जिताने के लिए लालू ने अपने तमाम घोड़े खोल रखे हैं. बेटे को विधायक का चुनाव जितवाने के लिए ही लालू ने जो रणनीति बनाई है उसी के तहत विधान परिषद के सदस्य राजेंद्र राय की बहू एज्या को मोहिउद्दीननगर से टिकट दिया. जबकि पिछले साल ही उपचुनाव में ये सीट आरजेडी के अजय बुलगानीन ने जीती थी. राजेंद्र राय को यादव वोटरों को गोलबंद करने की जिम्मेदारी दी गई है.

 

इसी महुआ क्षेत्र के रहने वाले शिवचंद्र राम को पड़ोसी राजापाकड़ सीट से लालू ने टिकट दिया है. शिवचंद्र राम 2005 में यहां से विधायक रह चुके हैं. शिवचंद्र राम पर पुराने वोटरों को गोलबंद करने के साथ ही दलित वोटरों को तेज प्रताप के पक्ष में करने का जिम्मा मिला है. इतना ही नहीं उजियारपुर से आलोक मेहता और पातेपुर से प्रेमा चौधरी को इसी शर्त पर टिकट मिला कि वो तेज प्रताप के लिए जीत की रणनीति तैयार करेंगे. पूर्व सांसद आलोक मेहता यहीं के रहने वाले हैं. और आलोक को कोइरी वोट एकजुट करने की जिम्मेदारी मिली हुई है.

 

इन तमाम सियासी समीकरणों को साधने का रिस्क लेकर ही लालू ने तेज प्रताप को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है. राबड़ी और मीसा भारती के लगातार कैंप करने की वजह से यादव वोटरों की गोलबंदी धीरे धीरे तेज प्रताप के पक्ष में होती दिख रही है. जगेश्वर राय के साथ जो लोग शुरुआती दिनों में झंडा बुलंद कर रहे थे, अब वो मीसा और राबड़ी के साथ कैंपेन में दिख रहे हैं. यादव वोटरों में संदेश देने की कोशिश हो रही है कि तेज प्रताप का चुनाव यादवों के सम्मान का सवाल है.

 

रवींद्र राय को लेकर एनडीए का वोट एकजुट है. यादव वोट तीन खेमे में बंटा हुआ है. कोइरी वोट इनके साथ खड़ा है. कुर्मी साथ नहीं है. सवर्ण वोट भी जुड़ा हुआ है. रवींद्र राय के समर्थकों को पुराने चुनाव नतीजों पर भरोसा है. और उसी भरोसे के दम पर रवींद्र राय की जीत का दावा कर रहे हैं. लेकिन बीते 5 साल का हिसाब रवींद्र राय को परेशान कर रहा है.

 

2010 के चुनाव में रवींद्र राय को 46 हजार वोट मिले थे. जबकि आरजेडी के जगेश्वर राय महज 24 हजार वोट ला पाए थे. अन्य उम्मीदवारों को कुल 30-32 हजार वोट मिल गए थे. 2010 की तुलना में इस बार निर्दलीय और छोटी पार्टियों के कम उम्मीदवार हैं. इसका फायदा किसे मिलेगा ये अभी कहा नहीं जा सकता.

 

महुआ सीट हाजीपुर लोकसभा में पड़ता है. रामविलास पासवान यहां से सांसद हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव के नतीजे के देखें तो पासवान को 68 हजार, कांग्रेस के संजीव प्रसाद टोनी को 40 हजार, जेडीयू के उम्मीदवार रामसुंदर दास को 16 हजार वोट मिले थे. पासवान के खिलाफ पड़े वोटों को जोड़ दें तो भी आंकड़ा आगे नहीं बढ़ रहा. ये तेज प्रताप के लिए चिंता की बात हो सकती है. महुआ में 28 अक्टूबर को तीसरे दौर में वोटिंग है.

 

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