बिहार चुनाव- क्या है मोदी की ताकत और कमजोरी?

By: | Last Updated: Sunday, 11 October 2015 3:09 PM

पटनाः 10 जिलों की 49 सीटों पर कल पहले दौर की वोटिंग है. इस दौर में कुल 529 उम्मीदवार मैदान में हैं . लेकिन असली लड़ाई मोदी बनाम लालू-नीतीश की है. कल के चुनाव से पहले हम आपको बताने जा रहे हैं कि बिहार चुनाव के इन तीन धुरंधर नेताओं की ताकत और कमजोरी क्या है ? और इस चुनाव में किसकी ताकत काम आएगी और कौन अपनी कमजोरी की वजह से मात खाएगा ?

 

नरेंद्र मोदी की ताकत

लोकसभा चुनाव में जीत का परचम लहराने के बाद मोदी के लिए ये सबसे बड़ा चुनाव है . बिहार में एनडीए के किसी भी नेता की तुलना में नरेंद्र मोदी सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं . रैलियों में मोदी को देखने और सुनने के लिए उमड़ रही लोगों की भीड़ इसका उदाहरण है . लोकसभा चुनाव में एनडीए को 40 में से 31 सीटों पर जीत मिली थी .

 

पासवान, मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को साथ लेकर मोदी ने जातीय समीकरण को भी साधने में कामयाबी हासिल की है . चुनाव से पहले पीएम ने सवा लाख करोड़ के पैकेज का एलान करके वोटरों को लुभाने की कोशिश की है . आज ही पीएम ने आरक्षण के सवाल पर भी मुंबई जाकर चुप्पी तोड़ी है . लालू बिहार में लगातार आरक्षण खत्म करने वाले मोहन भागवत के बयान को मुद्दा बनाकर बीजेपी पर हमले कर रहे थे . अब पीएम ने पोलिंग से ठीक पहले उसकी भरपाई की है .

 

नरेंद्र मोदी की कमजोरी

नीतीश का साथ छोड़ने के बाद बीजेपी पहला विधानसभा चुनाव लड़ रही है . लालू और नीतीश के साथ आने से जातीय और राजनीतिक समीकरण भी बदल गया है . बिहार में किसी नेता को पार्टी ने मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है . डीएनए वाला बयान मुद्दा बना हुआ है . इसके बाद आरक्षण खत्म करने वाले मोहन भागवत के बयान को लेकर भी लालू नीतीश घेर रहे है . बैंक खाते में 15 लाख देने के वादे को जुमला बताना भी बीजेपी को महंगा पड़ सकता है .

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Web Title: bihar election modi’s power and weakness
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