बिहार चुनाव स्पेशल: भावी विधायकों से बिहार बन गया है पटना

By: | Last Updated: Monday, 14 September 2015 7:58 AM
bihar election special

नई दिल्ली: पूरा बिहार चुनावी गर्मी से तप रहा है. चौक चौराहों पर यही चर्चा है कि कौन टिकट लेकर आएगा और कौन जीतेगा? समर्थक मानते हैं टिकट लेकर आने का मतलब है जीत का पहला दरवाजा तोड़ना. अभी किसी भी बड़ी पार्टी ने टिकटों का एलान नहीं किया है.

 

पहले दौर का चुनाव 12 अक्टूबर को है. 10 जिलों की 49 सीटों पर इस दिन वोटिंग होगी. इन सीटों पर नामांकन का काम परसों से शुरू हो जाएगा. टिकट के लिए इन दिनों पटना में नेताओं का मेला लगा है. पूरे बिहार के नेता पटना में जमे हुए हैं.

 

लोकतंत्र के इस महापर्व में जोर लगाने के लिए हर नेता अपने अपने क्षेत्र से आठ दस समर्थकों को लेकर पटना में कैंप किये हुए हैं. किसी के पास अपनी गाड़ी है तो कोई किराये की गाड़ी से पटना आया है. पेट्रोल पानी की तरह बहाया जा रहा है. कभी इस नेता के घर जा रहे हैं तो कभी उस नेता के घर. मुलाकात हुई तो ठीक नहीं तो लॉबिंग के लिए फिर नया ठिकाना. कई जगहों पर पत्रकारों के जरिये भी दावेदार लॉबिंग कराने में जुटे हैं.

 

जो दावेदार पास के जिलों से आए हैं वो भी डर की वजह से पटना नहीं छोड़ रहे. डर इस बात का है कि कहीं वो घंटे-दो घंटे के लिए हाजीपुर, जहानाबाद, आरा की तरफ गए और उसकी सीट के दूसरे दावेदार ने कुछ खेल कर दिया तो पांच साल की मेहनत पर पानी फिर जाएगा. जेडीयू, बीजेपी, आरजेडी, एलजेपी, कांग्रेस जैसी पार्टियों के दफ्तर में भारी भीड़ लगी है.

पार्टी ने भी अपनी ओर से भावी विधायकों के खाने पीने का इंतजाम कर रखा है. सुबह होते ही टिकटार्थी नहा धोकर दफ्तर पहुंच जा रहे हैं. इस उम्मीद के साथ कि क्या पता कब आलाकमान का बुलावा आ जाए. बायोडाटा जमा करने के बाद भी हर कोई यहां इस जुगाड़ में है कि उसकी मुलाकात बड़े नेता से हो जाए तो मौके पर चौका मार लेंगे. लेकिन पार्टियों के नेता भी इन सब खेल के माहिर खिलाड़ी हैं. लिहाजा दावेदारों से बात करने का जोखिम इस मौके पर नहीं उठा रहे.

 

बाकायदा तमाम दावेदारों को दावा जताने के लिए कायदे कानून बताये जा रहे हैं. बीजेपी में तो नहीं लेकिन जेडीयू और आरजेडी के जो सीटिंग विधायक हैं उनकी सीट पर भी सस्पेंस बना हुआ है. सूत्र बता रहे रहे हैं कि जेडीयू की तीन दर्जन सीटिंग सीटों पर आरजेडी ने दावा जता रखा है. इसलिए सबसे ज्यादा टिकट की बेचैनी नीतीश की पार्टी में ही है. इस बार खास बात ये भी है कि नौजवान दावेदारों की संख्या ज्यादा है. नीतीश के घर पर रात रात भर कोर ग्रुप की बैठक हो रही है.

 

सीटों के नाम और दावेदारों की लिस्ट को फाइनल किया जा रहा है. हर बार टिकट नहीं मिलने से नाराज कुछ नेताओं के समर्थक हंगामा और तोड़फोड़ करते हैं. इस बार भी इसकी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. यही वजह है कि टिकट के जो मजबूत दावेदार होते हैं वो अपने क्षेत्र से शारिरिक रूप से मजबूत समर्थकों को लेकर पटना पहुंचते हैं.

 

पटना में इन दिनों होटल और लॉज वालों की भी चांदी है. कुछ दावेदार तो जिले के मौजूदा विधायक के यहां अपना जुगाड़ सेट कर चुके हैं. लेकिन ज्यादातर दावेदारों ने होटल में कमरा बुक करा रखा है. दिन का खाना पार्टी दफ्तर में हो रहा है. रात का खाना किसी ढाबे में या किसी रिश्तेदार या जान पहचान वाले के यहां हो गया.

 

अररिया, किशनगंज, सहरसा, सुपौल, भागलपुर, बांका, जमुई जैसे इलाकों से जो टिकट के दावेदार पटना आए हैं वो हफ्ते-दस दिन से ही कमरा बुक कराकर डेरा डाले हुए हैं. एक अनुमान के मुताबिक मौजूदा विधायकों को छोड़कर 243 सीटों के लिए बड़ी पार्टियों में ही करीब दस हजार से ज्यादा दावेदार हैं. इस हिसाब से अगर हर दावेदार पांच लोगों के साथ पटना में मौजूद हैं तो आंकड़ा पचास हजार के आसपास का होता है.

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