बिहार चुनाव- सभी अध्यक्षों के लिए आसान नहीं है जीत की राह

By: | Last Updated: Wednesday, 2 September 2015 8:09 AM

नई दिल्ली : दो-चार दिन में बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का एलान हो जाएगा. महागठबंधन में सीटों का बंटवारा हो गया है लेकिन उम्मीदवार अभी तय नहीं हैं. एनडीए में तो सीटों का बंटवारा भी नहीं हुआ है. दोनों गठबंधनों में कुल 8 पार्टियां शामिल हैं. महागठबंधन में आरजेडी, जेडीयू, कांग्रेस और एसपी है. एनडीए में बीजेपी, एलजेपी, हम और आरएलएसपी है. इन 8 पार्टियों में से 4 पार्टियों के प्रदेश अध्यक्ष भी चुनावी मैदान में ताल ठोकने उतरेंगे.

 

जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह राज्यसभा सांसद हैं और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी विधान परिषद के सदस्य. इसलिए चुनावी अखाड़े से दोनों दूर रहेंगे. आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे सीतामढ़ी जिले की परिहार सीट से और एसपी के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र सिंह यादव कैमूर जिले की किसी सीट से भाग्य आजमा सकते हैं. पूर्वे 2010 में बीजेपी के हाथों हार गए थे. परिहार से मौजूदा बीजेपी विधायक एक केस में सजा पा चुके हैं. लिहाजा उनका चुनाव लड़ना संभव नहीं है. बीजेपी के पास परिहार की सीट रहती है तो फिर गैर यादव नेता में पार्टी वैद्यनाथ प्रसाद पर दांव लगा सकती है. ऐसे में वैश्य वर्सेस वैश्य होने पर पूर्वे के लिए परेशानी बढ़ सकती है.

 

2005 में बीएसपी के टिकट पर चुनाव जीत चुके रामचंद्र यादव अब समाजवादी पार्टी में हैं. 2005 में रामचंद्र भभुआ सीट से जीते थे. 2010 में एसपी के टिकट पर चैनपुर से लड़े और पांचवें नंबर पर रहे थे. तब बीजेपी जीती थी और बीएसपी दूसरे नंबर पर रही थी. आरजेडी उम्मीदवार तब चौथे नंबर पर रहे थे. उस चुनाव में आरजेडी, कांग्रेस और एसपी को मिले तमाम वोट जोड़ दें तो भी बीजेपी उम्मीदवार को मिले वोट से कम होता है. इस बार भी बीएसपी अपना उम्मीदवार उतारेगी. ऐसे में रामचंद्र यादव के लिए ये सीट निकालना आसान नहीं रहने वाला.

 

एनडीए की बात करें तो बीजेपी के अध्यक्ष मंगल पांडे विधान परिषद के सदस्य हैं और आरएलएसपी के अध्यक्ष अरुण कुमार जहानाबाद से सांसद. इसलिए ये दोनों चुनाव नहीं लड़ेंगे. एलजेपी के अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस पिछली बार लालू गठबंधन में एलजेपी से उम्मीदवार थे. खगड़िया जिले की अलौली सीट से तब जेडीयू को जीत मिली थी. उस चुनाव में पारस सहित हारे हुए तमाम उम्मीदवारों के वोट एक तरफ कर दें और जीते हुए रामचंद्र सदा के वोट को एक तरफ, तो सिर्फ एक फीसदी ज्यादा वोट हारे हुए उम्मीदवारों को मिले थे. यानी 49.5 फीसदी वोट जेडीयू के उम्मीदवार को और हारे हुए उम्मीदवारों को 50.5 फीसदी वोट मिले थे. इस बार समीकरण भले ही बदल चुका है लेकिन पारस के लिए हार-जीत के इस अंतर को पाटना आसान नहीं रहने वाला.

 

हम के प्रदेश अध्यक्ष शकुनी चौधरी के साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी भी चुनावी अखाड़े में उतरेंगे. शकुनी चौधरी मुंगेर की तारापुर सीट से चुनाव लड़ेंगे. शकुनी इस सीट से लगातार कई बार जीत चुके हैं. लेकिन पिछले चुनाव में जेडीयू के हाथों मात खा गये थे. तब जेडीयू की जीती नीता चौधरी को करीब 44 हजार और आरजेडी से लड़े शकुनी चौधरी को 30 हजार वोट मिले थे. उस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को 18 हजार वोट मिले थे. कांग्रेस का वोट जोड़ने के बाद इस बार अगर समीकरण को उलटकर देखें तो फिर जेडीयू का पलड़ा ही भारी दिख रहा है.

 

हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी जहानाबाद जिले की मखदुमपुर सुरक्षित सीट से विधायक बने थे. इस बार अगर वही से लड़ते हैं तो फिर चुनावी चक्रव्यूह उनके खिलाफ बड़ा तगड़ा होगा. पिछली बार मांझी को 42 फीसदी वोट मिले थे. तब आरजेडी को 37 फीसदी वोट मिला था. मांझी लगातार जीतते रहने वाले विधायक हैं. इस बार समीकरण बदल चुके हैं.

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Web Title: Bihar Election: Will all party president loose election?
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