बिहार चुनाव: महुआ के महाभारत में अर्जुन साबित होंगे तेज प्रताप ?

By: | Last Updated: Saturday, 10 October 2015 11:42 AM
Bihar Elections 2015_Mahua_

महुआ: हलफनामे में दाखिल अपनी उम्र को लेकर उपजे विवाद के शांत होने के बाद आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव अब अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत को नए रंग देने में जुट गए हैं.

 

तेज प्रताप यादव के लिए कुरुक्षेत्र का मैदान है वैशाली जिले का महुआ विधानसभा क्षेत्र- लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव में दिलचस्पी रखनेवाले समूचे देश की जनता के मन में ये सवाल है कि महुआ के महाभारत में क्या तेजप्रताप यादव अर्जुन साबित हो पाएंगे या फिर इस जंग में जीत किसी और की होगी . इस सवाल का जवाब टटोलने के लिए आइए महुआ के मौजूदा राजनीतिक माहौल, सामाजिक समीकरण और उम्मीदवारों की सियासी ताकत पर पैनी निगाह डालते हैं .

 

आरजेडी उम्मीदवार तेज प्रताप यादव का मुकाबला करने के लिए खड़े हैं जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के उम्मीदवार रवींद्र राय . रवींद्र राय महुआ के मौजूदा विधायक हैं.  बिहार में राज्यसभा के सदस्यों के चुनाव के दौरान पार्टी के फैसलों से खफा होकर रवींद्र राय पार्टी के खिलाफ लगातार बयानबाजी करने लगे थे- जिसकी वजह से 8 जून, 2014 को उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया था- हालांकि तब रवींद्र राय ने नीतीश कुमार पर तानाशाह होने और यादव विरोधी होने के आरोप लगाए थे . बाद में रवींद्र राय जीतन राम मांझी की नाव में सवार हो गए थे. अब एनडीए ने रवींद्र राय को जीत दिलाने में पूरी ताकत झोंकना शुरू दिया है क्योंकि अगर महुआ सीट एनडीए के खाते में चली जाती है तो ये लालू यादव पर एनडीए का बड़ा प्रहार साबित होगा .

 

तेज प्रताप यादव और रवींद्र राय जैसे दो मजबूत उम्मीदवारों के अलावा क्षेत्र में पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी से मोर्चा संभाले हुए हैं जोगेश्वर राय. जोगेश्वर राय साल 2010 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी के उम्मीदवार थे और तब के जेडीयू उम्मीदवार रवींद्र राय ने उन्हें 21,925 वोटों से शिकस्त दी थी . जोगेश्वर राय को अभी कुछ महीनों पहले ही आरजेडी से निलंबित कर दिया गया था- वजह थी कि वो महुआ सीट से ही चुनाव लड़ने पर आमादा थे और पार्टी के लिए आंखों की किरकिरी साबित हो रहे थे- जिन्हें पार्टी ने निकाल फेंकना ही बेहतर समझा .

 

क्षेत्र में दिखेगा तेज प्रताप का प्रताप ?

 

महुआ के स्थानीय आरजेडी कार्यकर्ता जोर-शोर से चुनाव में तो जुटे ही हुए हैं- तेज प्रताप यादव के एक गैर राजनीतिक संगठन डीएसएस यानी धर्मनिरपेक्ष स्वयंसेवक संघ के सदस्य भी रात-दिन एक किए हुए हैं . डीएसएस का गठन तेज प्रताप ने आरएसएस के मुकाबले के लिए तैयार किया था. इसके पीछे तेज प्रताप का तर्क ये है कि आरएसएस के राष्ट्र विरोधी विचारधारा का मुकाबला करने में ये संगठन भविष्य में अहम भूमिका निभाएगा . फिलहाल डीएसएस के कार्यकर्ता महुआ के राजनीतिक मुकाबले में तन-मन से जुटे हुए हैं.

 

स्थानीय लोगों की माने तो महुआ के चुनावी मैदान में सिर्फ तेज प्रताप नहीं लड़ रहे हैं- बल्कि यहां तो आरजेडी के वजूद की लड़ाई है. महुआ विधानसभा सीट पर तेज प्रताप की जीत या हार से तय होगा कि आनेवाले समय में आरजेडी का वर्चस्व बिहार में मजबूत होगा या फिर पार्टी लोकप्रियता के पायदान पर फिसलती चली जाएगी . आरजेडी इस हकीकत से भली-भांति वाकिफ है इसलिए वो महुआ सीट पर जीत को पक्की करने में अपनी तरफ से कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही .

 

रण में डटे हुए हैं रवींद्र राय !

 

अपने जनसंपर्क अभियान में एनडीए के घटक दल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के उम्मीदवार रवींद्र राय लगातार नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे हैं . रवींद्र राय का कहना है कि जीते हुए उम्मीदवार का टिकट काटना किसी भी लिहाज से सही नहीं है- रवींद्र राय की नजर में नीतीश तानाशाह हैं और लोकतंत्र में उनकी तानाशाही को चुनौती देने के लिए ही वो मैदान में डटे हुए हैं . रवींद्र राय अपने चुनाव प्रचार के दौरान ये भी कह रहे हैं कि जब नीतीश कुमार ने बीजेपी से नाता तोड़ा तो उन्होंने किसी भी विधायक से नहीं पूछा .

 

एक बार पहले भी वो नीतीश कुमार पर विधायकों के फोन टेप करने का आरोप लगा चुके हैं . उस समय बागी हो चुके रवींद्र राय ने कहा था कि बिहार के विधायकों की प्राइवेसी खत्म हो रही है और इसके लिए उन्होंने गृहमंत्री से अपील करने की धमकी भी दी थी, मगर बाद में वो खुद ही अपने आरोप से पीछे हट गए थे . लेकिन अब चुनावी समर में कूदने के बाद रवींद्र राय की सबसे बड़ी परेशानी ये है कि उनके कार्यकर्ता जो जेडीयू की वजह से उनके साथ जुड़े थे- वो दो गुटों में बंट गए हैं .

 

एक गुट तो उनका साथ निभाने की बात कह रहा है लेकिन दूसरा गुट इस आर-पार की लड़ाई में महागठबंधन धर्म निभाने पर डटा हुआ है. चुनावी आरोपों-प्रत्यारोपों के दौर में रवींद्र राय के विरोधी उन पर निजी हमले भी कर रहे हैं . विरोधियों का आरोप है कि रवींद्र राय हिंसक प्रवृत्ति के हैं और उनकी पत्नी बबीता ने उन पर हत्या की कोशिश और मारपीट के भी केस दर्ज कराए हैं- हालांकि इसके जवाब में रवींद्र राय का कहना है कि ये विरोधियों की साजिश है, उनकी पत्नी को किसी राजनीतिक दल ने टिकट का लालच दिया था- जिसकी वजह से उसने ऐसे कदम उठाए .

 

फिलहाल रवींद्र राय की एक ही ताकत है एनडीए का पूरा सहयोग और नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मिलने का भरोसा . महुआ के अधिकांश लोगों की शिकायत ये है कि क्षेत्र के विकास के लिए रवींद्र राय के पास बेहतरीन मौके थे- लेकिन उन्होंने उसे गंवा दिया . हालांकि रवींद्र राय अपने कार्यकाल के दौरान कुछ कामों को पूरा किए जाने की बात कहते हैं और उनका ये भी कहना है कि अगर उन्हें मौका मिलता है तो वो अधूरे कार्यों को पूरा कराने की कोशिश करेंगे .

 

जोगेश्वर राय का बनेगा योग ?

 

पिछले विधानसभा चुनाव में आरजेडी के उम्मीदवार के तौर पर हार का सामना कर चुके जोगेश्वर राय को उम्मीद है कि जनता इस बार पप्पू यादव यानी जन अधिकार पार्टी के नेतृत्व में भरोसा करेगी . अपने स्थानीय सभाओं में पप्पू यादव ने लालू यादव पर आरोप लगाया कि लालू यादव परिवार की खुशी से आगे नहीं बढ़ पाते और नीतीश कुमार सत्ता से ज्यादा कुछ सोच नहीं पाते .

 

अपने उम्मीदवार जोगेश्वर राय के लिए पप्पू यादव लालू यादव पर यादवों और मुसलमानों के अपमान का आरोप लगाकर यादव और मुसलमान वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करते दिखते हैं- ये अलग बात है कि ज्यादातर यादव और मुसलमान समुदाय के लोग उनकी इस राय से इत्तेफाक नहीं रखते . ऐसे में जोगेश्वर राय के लिए अपने दम पर महुआ से वोट बटोरना अपने आप में बड़ी चुनौती है . जहां तक बाकी दलित, महादलित और अगड़ी जातियों का सवाल है तो इन पर हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा कब्जा जमाए हुए हैं . वहीं अति पिछड़ी जातियों का वोट आरजेडी और हम में बंटता नजर आ रहा है.

 

महुआ सीट का इतिहास-

 

साल 1990 और 1995- दोनों विधानसभा चुनावों में जनता दल के उम्मीदवार मुंशीलाल पासवान की जीत हुई थी . फिर साल 2000 में आरजेडी से दशईं चौधरी जीते . इसके बाद अगले विधानसभा यानी साल 2005 मे हुए फरवरी और अक्टूबर के दोनों चुनावों मे आरजेडी के शिवचंद राम की जीत हुई थी . साल 2010 में आरजेडी ने शिवचंद राम का टिकट काटकर जोगेश्वर राय को उम्मीदवार बनाया था लेकिन जोगेश्वर राय जेडीयू के उम्मीदवार रवींद्र राय से हार गए थे .

 

क्या कहता है महुआ का सामाजिक समीकरण ?

 

महुआ में कुल 2 लाख 8 हजार मतदाता हैं- पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2010 में इस सीट पर 56 फीसदी वोटिंग हुई थी . जानकारों के मुताबिक महुआ विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा संख्या यादवों की है. इस सीट पर करीब 60 हजार मतदाता यादव समुदाय से हैं. वहीं दूसरी बड़ी आबादी कोइरी-कुर्मी समुदाय के लोगों की है, जो 20 हजार के करीब है. इसके बाद अन्य पिछड़ी जातियां और अगड़ी जातियों की कमो-बेश एक जैसी संख्या है .

 

जातिगत समीकरण के लिहाज से अगर देखें तो महुआ में महागठबंधन की जीत की पूरी संभावना नजर आ रही है . हालांकि आरजेडी के खिलाफ खड़ी पार्टियों ने भी यादव समुदाय के प्रतिनिधियों पर ही दांव खेला है. हम और जन अधिकार पार्टी दोनों ही यादव वोट में सेंध लगाने की बात कह रहे हैं. अब जनता पर किस उम्मीदवार का कितना जोर चलता है ये तो 8 नवंबर को ही पता चलेगा .

 

महुआ में आखिर मुद्दा क्या है ?

 

महुआ में सबसे बड़ा मुद्दा है किसानों का- महुआ में किसानों ने नई तकनीक के जरिए धान की फसल लगाई थी- जिनमें बालियां ही नहीं निकलीं . पूरी तरह फसल बर्बाद होने के बावजूद किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिला. किसानों का कहना है कि जो उनके हित की बात करेगा- वही महुआ पर राज करेगा . इलाके में वाटर सप्लाई को लेकर भी लोग परेशान है- लोगों के मुताबिक कई बार योजनाएं बनी- काम भी शुरू हुआ पर कभी अंजाम तक नहीं पहुंच पाया . कई इलाकों में सड़क बेहद जर्जर हालत में है- जिनकी जल्द मरम्मत किए जाने की आवश्यकता है. स्थानीय लोग सड़क के मुद्दे को भी जोर-शोर से उठा रहे हैं . स्थानीय लोग वोट मांग रहे उम्मीदवारों से मांग कर रहे हैं कि कोआरी-इमादपुर रोड को जल्द दुरुस्त किया जाए .

 

यूं तो पूरे राज्य के युवाओं के लिए बेरोजगारी अहम समस्या है- लेकिन डिजिटल इंडिया के इस दौर में भी महुआ के युवाओं को कुछ सूझ नहीं रहा कि वो आखिर रोजी-रोटी की खातिर करें तो क्या करें. युवाओं का कहना है स्थानीय स्तर पर फैक्ट्री या कोई कंपनी स्थापित किए जाने की जरूरत है ताकि उन्हें रोजगार मिल सके या फिर उनकी तकनीकी शिक्षा के लिए ही स्थानीय स्तर पर कोई व्यवस्था हो ताकि वो दूसरे शहरों में जाकर भी दो पैसे कमाकर अपने परिवार का पेट भर सके .

 

महंगाई डायन खाय जात है !

 

रही बात महुआ क्षेत्र की महिलाओं की तो उनकी एक ही चिंता है- महंगाई डायन . महुआ क्षेत्र की महिलाओं का कहना है कि महंगाई ने उनके रसोई पर जबरदस्त असर डाला है. महिलाओं का कहना है कि नेताओं को चाहिए कि कालाबाजारी रोके और महंगाई कम करने के उपाय करे या फिर सरकार ही कम कीमत पर रसोई का सामान मुहैया कराए . वहीं कुछ जागरुक महिलाएं व्यावसायिक प्रशिक्षण का भी मुद्दा उठाती हैं कि उनके लिए सिलाई-कढ़ाई जैसी तकनीकी ट्रेनिंग की व्यवस्था की जाए ताकि वो अपने पैरों पर खड़ी हो सकें .

 

विकास के मुहाने पर कहां खड़ा है महुआ ?

 

महुआ विधानसभा में कुल 9 हाई स्कूल, 247 प्राइमरी और मिडिल स्कूल है- उच्च शिक्षा के लिए 2 कॉलेज है . वहीं 2 कस्तूरबा बालिका आवासीय विद्यालय और 25 लोक शिक्षा केंद्र की व्यवस्था की गई है- जिसके जरिए क्षेत्र के लोग प्राथमिक स्तर पर पढाई की सुविधा हासिल कर पा रहे हैं . लेकिन स्कूलों में जरूरत के हिसाब से शिक्षकों की भर्ती नहीं की गई है- जिससे प्राइमरी और मिडिल स्कूल की शिक्षा व्यवस्था पूरी रफ्तार से आगे नहीं बढ़ पा रही है.

 

स्वास्थ्य के लिहाज से देखें तो फिलहाल महुआ विधानसभा में 1 रेफरल अस्पताल, 3 पीएचसी और 36 स्वास्थ्य केंद्र मौजूद हैं- लेकिन आबादी और क्षेत्र के आकार के लिहाज से ये काफी नहीं है . खासतौर से इस क्षेत्र में तीन बड़े अस्पतालों की तत्काल जरूरत है. यहां सड़क और पुल के मामले में कुछ तरक्की जरूर हुई है. महुआ विधानसभा क्षेत्र में कई पुल बनाए गए हैं तो कई पुलों का निर्माण अभी अधर में है- जिन्हें अगले साल जून से पहले पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है . क्षेत्र के कुछ किसानों को खेती की आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग भी दिलाई गई थी- मगर वो कारगर साबित नहीं हुई- क्योंकि नई तकनीक के आधार पर खेती करने के बावजूद इलाके में धान की फसल बर्बाद हो गई. अब किसान कह रहे हैं कि ऐसी ट्रेनिंग भला किस काम की !

 

महुआ में मनेगा महुआ महोत्सव ?

 

वैशाली जिले की महुआ सीट पर तीसरे चरण में यानी 28 अक्टूबर को मतदान होगा और नतीजे 8 नवंबर को आएंगे मगर मौजूदा स्थानीय राजनीतिक समीकरण, सामाजिक समीकरण, उम्मीदवारों के निजी जनाधार का विश्लेषण करने के बाद तो यही लगता है कि महुआ के महाभारत में तेज प्रताप अर्जुन साबित होंगे और अपनी पार्टी की साख को कायम रखने में कामयाब होंगे .

 

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी खुद तेजप्रताप के प्रचार में जोर-शोर से जुटी हुई हैं- वहीं आरजेडी कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर तेजप्रताप यादव की जीत होती है तो यूपी के सैफई महोत्सव की तर्ज पर महुआ में भी महुआ महोत्सव मनाया जाएगा. लेकिन तेज प्रताप यादव की जीत की राह इतनी आसान भी नहीं है- हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के उम्मीदवार रवींद्र राय भी ताल ठोंककर उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं- अगर वो अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में सफल हुए तो वो भी एक बार फिर जीत का स्वाद चख सकते हैं. रही बात जोगेश्वर राय की तो इनके लिए मुकाबले में आना ही इनकी सफलता मानी जाएगी.

 

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