नीतीश: इंजीनियर से 'सुशासन बाबू' तक का सफर

By: | Last Updated: Sunday, 22 February 2015 3:29 PM

पटना: नीतीश कुमार ने रविवार को चौथी बार बिहार के मुख्यमंत्री का पद संभाल लिया. इंजीनियर नीतीश ने पिछले कार्यकाल के दौरान राज्य में न्याय के साथ सुशासन स्थापित करने का भरसक प्रयास किया. इस कारण उनके चाहने वालों ने उन्हें ‘सुशासन बाबू’ नाम दिया.

 

इससे पहले वह तीन मार्च, 2000 से 10 मार्च, 2000 और 24 नवंबर, 2005 से 24 नवंबर, 2010 तथा 26 नवंबर, 2010 से 17 मई, 2014 तक बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

 

पिछले साल लोकसभा चुनाव में जनता दल (युनाइटेड) को वांछित सफलता न मिलने के कारण मई 2014 में नीतीश ने नैतिक दायित्व अपने ऊपर लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन आठ महीन बाद पार्टी की मांग पर उन्होंने सत्ता का दायित्व फिर से अपने कंधों पर उठाने का फैसला लिया.

 

विरोधियों ने उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनने से रोकने का पूरा प्रयास किया. इसमें केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की भूमिका भी आंकी गई. मगर संख्या बल के आधार पर नीतीश इस झंझावात से निकलने में कामयाब रहे.

 

चेहरे पर मुस्कान, सधी जुबान और चाल में गजब का आत्मविश्वास नीतीश की पहचान है. बिहार से लालू प्रसाद के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की सरकार को हटाकर सत्ता पर काबिज होना आसान नहीं था, लेकिन नीतीश ने सधी हुई राजनीति के बल पर इस काम को अंजाम दिया.

 

एक मार्च, 1951 को पटना के बख्तियारपुर में स्वतंत्रता सेनानी कविराज रामलखन सिंह और परमेश्वरी देवी के घर जन्मे नीतीश जैसे-जैसे बड़े होते गए, राजनीति की ओर उनका झुकाव बढ़ता गया. बिहार अभियांत्रिकी महाविद्यालय से विद्युत अभियांत्रिकी में स्नातक नीतीश 1974 में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़े और इसी वर्ष आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (मीसा) के तहत गिरफ्तार भी हुए.

 

वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान उन्होंने समता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. नीतीश ने 1985 में पहली बार बिहार विधानसभा की सीढ़ियों पर बतौर विधायक कदम रखा. 1987 में वह युवा लोकदल के अध्यक्ष बने तथा 1989 में उन्हें बिहार में जनता दल का सचिव चुना गया.

 

इसी क्रम में वर्ष 1989 में ही नीतीश नौवीं लोकसभा के सदस्य भी चुने गए. अब तक नीतीश की पहचान एक राष्ट्रीय राजनेता के रूप में स्थापित हो चुकी थी. वर्ष 1990 में पहली बार उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में बतौर कृषि राज्यमंत्री शामिल किया गया.

 

वर्ष 1991 में वह फिर एक बार लोकसभा के लिए चुने गए और उन्हें जनता दल का राष्ट्रीय सचिव तथा संसद में जनता दल का उपनेता बनाया गया.

 

बिहार के बाढ़ संसदीय क्षेत्र का नीतीश ने वर्ष 1989 और वर्ष 2000 में प्रतिनिधित्व किया. वर्ष 1998-1999 में कुछ समय के लिए नीतीश को रेल एवं भूतल परिवहन मंत्री का दायित्व भी सौंपा गया, परंतु अगस्त 1999 में हुई एक रेल दुर्घटना के बाद उन्होंने रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया.

 

तीन मार्च, 2000 को नीतीश पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने, लेकिन मात्र सात दिनों के अंदर ही उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा.

 

इसके बाद एक बार फिर नीतीश को केंद्रीय कृषि मंत्री बनाया गया. मई 2001 से 2004 तक उन्होंने अटल बिहारी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में रेल मंत्री का दायित्व संभाला. रेलमंत्री के तौर पर नीतीश द्वारा लिए गए फैसलों को लोग आज भी याद करते हैं.

 

नीतीश 24 नवंबर, 2005 को दूसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री बने. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के 15 वर्ष के शासनकाल को उखाड़ फेंकना यूं तो आसान नहीं था, लेकिन बिहार के मतदाताओं को नीतीश में सुशासन की नई लहर की उम्मीद दिखी और जनता ने नीतीश को सत्ता सौंपने का जनादेश दिया.

 

इस दौरान नीतीश ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, कर्मठ फैसलों और बेदाग नेतृत्व से बिहार को विकास के पथ पर आगे ले जाने की कोशिश की.

 

पिछले विधानसभा चुनाव में बिहार के मतदाताओं ने एक बार फिर नीतीश के पक्ष में जनादेश दिया और 26 नवंबर, 2010 को नीतीश ने तीसरी बार बिहार की सत्ता संभाली.

 

राज्य में छह महीने बाद विधानसभा चुनाव होना है. पार्टी के बागी नेता जीतन राम मांझी और गठबंधन तोड़ने के बाद से खार खाई बीजेपी के पैंतरों से निपटते हुए चुनाव बाद ‘धर्मनिरपेक्ष गठबंधन’ को सत्ता में लाना मुख्यमंत्री नीतीश के सामने बड़ी चुनौती है.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: BIHAR_NITISH KUMAR_engineer_CM
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: Bihar CM engineer JDU Nitish Kumar
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017