क्या बीजेपी डर रही है?

By: | Last Updated: Tuesday, 4 November 2014 11:10 AM

नई दिल्ली : दिल्ली में चुनाव का रास्ता साफ हो गया है . केंद्रीय कैबिनेट ने विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव पास कर दिया है . अब राष्ट्रपति कैबिनेट के फैसले को मंजूरी देंगे उसके बाद चुनाव आयोग चुनाव की तारीखों का एलान करेगा. इससे पहले उपराज्यपाल ने राष्ट्रपति से विधानसभा भंग करने की सिफारिश की थी .

 

बीजेपी के तमाम नेता एक सुर में कह रहे हैं कि पार्टी दिल्ली का चुनाव मोदी के चेहरे को आगे रखकर मैदान में उतरेगी . मतलब साफ है कि दिल्ली के दंगल में बीजेपी किसी को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाकर मैदान में नहीं उतरने जा रही .

 

दिल्ली विधानसभा भंग, अब चुनाव की बारी 

दिल्ली से बीजेपी अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा है कि सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा. हमारी पार्टी का फैसला है.

 

बीजेपी भले ही मोदी के चेहरे को आगे करके चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है . लेकिन आम आदमी पार्टी का कहना है कि दिल्ली में मोदी कोई फैक्टर नहीं है . आम आदमी पार्टी ने बीजेपी से पहले अपनी ओर से ही केजरीवाल से मुकाबले के लिए जगदीश मुखी का नाम उछाल दिया है . 

 

आम आदमी पार्टी के इस बयान पर जगदीश मुखी ने कहा है कि उनका नाम लेना आम आदमी पार्टी की मजबूरी है . आम आदमी पार्टी बीजेपी को इतिहास की याद दिला रही है और पूछ रही है कि 1993 में मदन लाल खुराना, 1998 में सुषमा स्वराज, 2003 में फिर से मदन लाल खुराना, 2008 में वीके मल्होत्रा और 2013 में हर्ष वर्धन को सीएम प्रोजेक्ट किया तो फिर 2014 में किसी का नाम क्यों नहीं?  बीजेपी नाम का एलान करने से क्यों भाग रही है ?

 

वैसे एक हकीकत ये भी है कि लोकसभा चुनाव में मिली भारी जीत के बाद बीजेपी किसी भी राज्य में नेता प्रोजेक्ट करके चुनाव नहीं लड़ रही . मोदी के नाम पर ही चुनाव लड़के पार्टी ने महाराष्ट्र और हरियाणा में सरकार बनाई . शायद इसिलिए बीजेपी मोदी लहर पर सवार होकर दिल्ली जीतने की रणनीति बना रही है .

 

कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला कह रहे हैं कि लग नहीं रहा कि जीतेंगे इसलिए नहीं प्रोजेक्ट कर रहे. दिल्ली पर कब्जे के लिए आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल का चेहरा आगे किया है . सक्रिय राजनीति से शीला दीक्षित के दूर होने के बाद कांग्रेस के पास कोई चेहरा नहीं है . बीजेपी के पास हर्ष वर्धन के रूप में एक चेहरा था भी तो वह अब केंद्र में मंत्री बन चुके हैं . ऐसे में दिल्ली में बीजेपी पहली बार बिना किसी एक चेहरे को आगे करके चुनाव लड़ने जा रही है . सवाल ये है कि बीजेपी डर रही है या फिर वाकई पार्टी को मोदी लहर के भरोसे जीत की उम्मीद है . 

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