जम्मू कश्मीर में पुराने फॉर्मूले पर ही बीजेपी -पीडीपी की बनेगी सरकार!

By: | Last Updated: Friday, 25 March 2016 8:07 PM
BJP agrees to coalition with PDP!

नई दिल्ली:  जम्मू कश्मीर में सरकार बनाने को सस्पेंस के बादल छंट गए हैं. जम्मू कश्मीर में पुराने फॉर्मूले पर ही बीजेपी -पीडीपी सरकार बनेगी. कल दोनों पार्टियों की राज्यपाल से मुलाकात होगी. जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने पर फिर पेंच फंस गया था क्योंकि बीजेपी ने कहा कि राज्यपाल से मुलाकात के पहले पीडीपी से एक बैठक जरूरी है.

जम्मू में बीजेपी विधायक दल की बैठक में सरकार बनाने के लिए पीडीपी समर्थन देने और बीजेपी की ओर से डिप्टी सीएम के तौर पर निर्मल सिंह के नाम पर मुहर लग गई. लेकिन बीजेपी ने आखिरी वक्त पर राज्यपाल के बुलावे को ये कहकर टाल दिया कि इससे पहले पीडीपी से एक बैठक जरूरी है.

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के इस कदम के पीछे पीडीपी पर गृह या वित्त मंत्रालय में से एक देने का दबाव बनाना है. सूत्रों के मुताबिक अगले दो-तीन दिनों में बीजेपी-पीडीपी की बैठक हो सकती है.

बीजेपी के पीछे हटने से पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को भी राज्यपाल से मुलाकात को टालना पड़ा. दरअसल बिना बीजेपी के समर्थन पत्र के महबूबा सरकार बनाने का दावा पेश नहीं कर सकती है.

 

महबूबा मुफ्ती को कल विधायक दल का नेता चुना गया था. सात जनवरी को महबूबा के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद से जम्मू कश्मीर में सरकार का संकट था. वैसे महबूबा का मुख्यमंत्री बनना तय है.

महबूबा का सियासी सफर

महबूबा मुफ्ती सीएम बनीं तो वो जम्मू कश्मीर की पहली महिला सीएम होंगी. महबूबा अपनी पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी PDP की अध्यक्ष है और अपने आक्रामक तेवरों के लिए जानी जाती हैं. पिछले साल जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए बीजेपी के साथ गठबंधन में महबूबा की अहम भूमिका मानी जाती है. अब नए हालातों में महबूबा मुफ्ती के सामने चुनौती बड़ी है. बीजेपी से गठबंधन से नाराज अपने साथियों को साथ लेकर चलने से लेकर आतंकवाद व अलगाववाद पर काबू पाना होगा. लेकिन इन सबके बीच बीजेपी से गठजोड़ के बाद आम कश्मीरियों में गिरी पार्टी की साख को फिर से बहाल करते हुए नेशनल कांफ्रेंस से अपने सियासी किले को बचाना महबूबा मुफ्ती के लिए सबसे अहम है.

महबूबा ने अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत एक ऐसे दौर में की जब जम्मू कश्मीर में अलगाववादियों का दखल बहुत ज्यादा था. 1989 में आतंकवादियों ने उनकी बहन और मुफ्ती मोहम्मद सईद की छोटी बेटी रुबैया सईद का अपहरण कर लिया था. तब मुफ्ती मोहम्मद सईद वी पी सिंह की सरकार में गृहमंत्री थे. उस वक्त रुबैया की रिहाई के लिए सरकार ने 5 आतंकवादियों को छोड़ दिया था, तबसे ही मुफ्ती मोहम्मद सईद की इस बात के लिए आलोचना होती रही कि चूंकि वो मंत्री थे इसलिए उन्होने अपनी बेटी के लिए देश के हित के साथ समझौता किया.

राजनीतिक परिवार में पैदा होने के बावजूद महबूबा कई सालों तक राजनीति से दूर रही. 1996 में कांग्रेस के टिकट पर बीजबेहाड़ा से पहला विधानसभा चुनाव जीतकर महबूबा जल्द ही विपक्ष की नेता बन गईं. 1999 में पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के कांग्रेस से मतभेद होने पर महबूबा ने अलग पार्टी बनाने में बड़ी भूमिका निभाई. तभी जम्मू कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का गठन हुआ और महबूबा इसकी उपाध्यक्ष बनीं. 2004 में महबूबा मुफ्ती ने अनंतनाग से पहला लोकसभा चुनाव जीता. 2009 में महबूबा ने बतौर अध्यक्ष पीडीपी की कमान संभाल ली. 2014 में वो दूसरी बार अनंतनाग से ही सांसद बनीं.

लेकिन 2014 विधानसभा चुनावों में महबूबा मुफ्ती 28 सीटों पर ही अपनी पार्टी को जिता पाईं. पीडीपी ने बीजेपी के समर्थन से सरकार बनाई और अब मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद महबूबा भी बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने की तरफ हैं.

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