टूट गया 25 साल पुराना रिश्ता, बीजेपी बोली-सीएम की कुर्सी के लिए अड़ी रही शिवसेना

By: | Last Updated: Thursday, 25 September 2014 5:00 PM
BJP announces end of 25-year-old alliance with Shiv Sena

नई दिल्ली : बीजेपी और शिवसेना के बीच 25 साल पुराना गठबंधन टूटा. दोनों पार्टियां अलग-अलग लड़ेंगी विधानसभा चुनाव.

 

बीजेपी औऱ शिवसेना ने आज गठबंधन पर सस्पेंस खत्म कर ही दिया. पिछले एक हफ्ते से सीटों के बंटवारे को लेकर रोज नए नए फॉर्मूले सामने आ रहे थे लेकिन बात नहीं बनी. बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अलग चुनाव लड़ने का एलान किया.

 

शिवसेना और बीजेपी 1989 में एक साथ आए थे. शिवसेना और बीजेपी का गठबंधन सीटों के बंटवारे को लेकर टूटा. बीजेपी जितनी सीटें मांग रही थी, शिवसेना उतनी सीटें देने को तैयार नहीं थी.

 

बीजेपी-शिवसेना का 25 साल पुराना गठबंधन टूटा, मोदी मंत्रिमंडल में शिवसेना के मंत्री के जाने पर फैसला जल्द

 

पिछले एक हफ्ते से बीजेपी और शिवसेना के नेताओं के बीच सीट बंटवारें को लेकर कई बैठकें हुईं. आज भी कई घंटे बातचीत चली, शिवसेना का कहना है कि वो 148 सीटों पर भी लड़ने को तैयार हो गई थी, लेकिन बीजेपी नेताओं ने इस पर ध्यान नहीं दिया.

 

शिवसेना की ओर से दिए गए आखिरी फॉर्मूले में – शिवसेना खुद 151 सीटों पर बीजेपी -127 सीटों पर और अन्य दलों को 10 सीटें देने की बात थी. लेकिन बीजेपी को ये फॉर्मूला मंजूर नहीं बीजेपी चाहती थी कि शिवसेना 147 सीटों पर लड़े, बीजेपी को 127 सीटें और अन्य दलों को 14 सीटें मिलें .

 

2009 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना 169 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसने 44 सीटों पर जीत हासिल की थी . बीजेपी 119 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसने 46 सीटों पर जीत हासिल की थी .

 

चुनाव के लिए पर्चे भरने की आखिरी तारीख परसों हैं और 15 अक्टूबर को होने है. नतीजे 19 अक्टूबर को आएंगे.

 

पिछले महीने कराए गए एबीपी न्यूज-नीलसन के ओपिनियन पोल के मुताबिक शिवसेना-बीजेपी के अलग अलग चुनाव लड़ने पर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी.

 

इस महीने की शुरुआत में कराए गए एबीपी न्यूज- नीलसन के ओपिनियन पोल में हमने लोगों से पूछा था कि अगर बीजेपी और शिवसेना समेत सभी पार्टियां अलग अलग चुनाव लड़े तो फिर किसे वोट देंगे. ओपिनियन पोल के मुताबिक ऐसी स्थिति में बीजेपी को 103 सीट, शिवसेना को 64, एनसीपी को 40 और कांग्रेस को 49 सीटें, एमएनएस को 11 और अन्य दलों को 21 सीटें मिल सकती हैं.

 

 

जब ये सर्वे कराया गया था तब दोनों पार्टियां साथ थी. अगर आज की ताजा स्थिति के आधार पर कोई ओपिनियल पोल होता है तो आंकड़े बदल भी सकते हैं.

 

एबीपी न्यूज़ संवाददाता उमेश कुमावत का कहना है कि दोनों पार्टियों के बीच असल झगड़ा सीएम के पद को लेकर था. फार्मूला ये तय हुआ कि जिसकी ज्यादा सीटें होंगी उसका सीएम होगा. इसलिए शिवसेना 151 सीटों से कम पर तैयार नहीं थी और बीजेपी को 130 से कम सीटें कम मंजूर नहीं था.

 

याद रहे कि बीजेपी उन 78 सीटों पर शिवसेना से विचार करने की मांग कर रही थी जिन सीटों पर शिवसेना और बीजेपी कभी नहीं जीती. गठबंधन खाते की 56 सीटें ऐसी हैं जिसपर शिवसेना कभी नहीं जीती. बीजेपी उन सीटों में कुछ पर अपनी दावेदारी की मांग कर रही थी.

 

क्या हरा पाएंगे एनसीपी-कांग्रेस को?

 

महाराष्ट्र में शिवसेना-बीजेपी की राहें अलग हो जाने के बाद एक सवाल अहम है कि क्या शिवसेना और बीजेपी अलग-अलग लड़कर एनसीपी और कांग्रेस को हरा पाएगी.  एबीपी न्यूज़ संवाददाता उमेश कुमावत का कहना है कि शिवसेना और बीजेपी के लिए अब रास्ते मुश्किल दौर में हैं.

 

महाराष्ट्र राजनीति के एक्सपर्ट अशोक वानखेड़े का कहना है कि इस गठबंधन के टूटने के बाद ज्यादा नुकसान बीजेपी को हो सकता है.  वानखेड़े का कहना है कि बहुत हद तक एमएनसी के रुख से तय होगा कि महाराष्ट्र की राजनीति किस करवट जाएगी.

 

अनंत गीते का भविष्य क्या होगा?

 

शिवसेना कोटे से अनंत गीते मोदी कैबिनेट में मंत्री हैं. जैसे ही बीजेपी ने गठबंधन टूटने का एलान किया. भारी उद्योग मंत्री अनंत गीते मुंबई के लिए रवाना हो गए. खबरें हैं कि बहुत ही जल्द अनंत गीते की किस्मत का फैसला हो जाएगा कि वो मोदी कैबिनेट के सदस्य बने रहेंगे या नहीं.

 

शिवसेना नेता आनंदराव अडसूल का कहना है कि अनंत गीते कैबिनेट में रहेंगे या नहीं, इसका फैसला उद्धव ठाकरे करेंगे.

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