डांट के बाद तीन घंटे में पलटे मनोज तिवारी, कहा- किरन बेदी हमारी नेता हैं

By: | Last Updated: Monday, 19 January 2015 10:38 AM
BJP pulls up Manoj Tiwari for anti-Bedi remarks

नई दिल्ली: दिल्ली में चुनाव से ऐन पहले किरन बेदी के पार्टी में आने को लेकर बीजेपी के बड़े नेताओं में जो किचकिच है, उसमें अब नया मोड़ आ गया है. किरन बेदी के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले बीजेपी सांसद मनोज तिवारी अपने बयान से पलट गए हैं.

किरन बेदी पर दिल्ली बीजेपी में कोहराम 

 

मनोज तिवारी ने सोमवार की सुबह कहा था कि किरन बेदी का बीजेपी में आना अच्छी बात है, लेकिन उन्होंने बतौर कार्यकर्ता ज्वाइन किया है. उन्हें सीएम का उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है. मनोज तिवारी ने बेदी को अपना नेता मानने से भी इनकार किया था. लेकिन बताया जा रहा है कि बीजेपी के एक बड़े नेता ने तिवारी की फटकार लगाई है जिसके बाद उनके बोल बदल गए हैं.

 

अब मनोज तिवारी कह रहे हैं, “पार्टी का जो फैसला होगा मुझे मंजूर होगा. मेरे बयान को ग़लत तरीके से पेश किया गया.”

 

आपको बता दें कि मनोज तिवारी से पहले दिल्ली में बीजेपी के दिग्गज जगदीश मुखी भी किरन बेदी को लेकर अपनी दबी-छुपी नाराजगी जाहिर की थी. लेकिन मनोज तिवारी ने तो किरन बेदी के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया था. मनोज तिवारी कल किरन की चाय पार्टी में भी नहीं गए थे.

 

ग़ौरतलब है कि किरन बेदी ने रविवार को दिल्ली से बीजेपी के सांसदों की एक बैठक बुलाई थी जिसमें मनोज तिवारी और उदित राज नहीं पहुंचे थे जबकि दो मिनट देरी से पहुंचे हर्ष वर्धन की किरन बेदी की मुलाकात नहीं पाई थी.

 

किरन पर क्या है हर्षवर्धन की राय

कल किरन बेदी के घर चाय से चूके केंद्रीय मंत्री हर्ष वर्धन से जब पूछा गया कि क्या किरन बेदी दिल्ली में बीजेपी का चेहरा है तो फिर हर्ष वर्धन ने कहा कि, ”पार्टी में हर कोई चेहरा है और चेहरे से ज्यादा हमारे लिए नीति सिद्धांत और कार्यकर्ता जरूरी है.”

 

क्या मचा है बवाल

 

दिल्ली में तीन दिन पहले बीजेपी में आई किरऩ बेदी को पार्टी ऐसे पेश कर रहीं है जैसे वही सीएम की उम्मीदवार बनने जा रही हैं. अभी साफ नहीं है कि किरऩ बेदी को सीएम उम्मीदवार बनाने पर कब फैसला सुनाया जाएगा लेकिन इसे लेकर बीजेपी के बड़े नेताओं में घमासान बचा हुआ है.

 

आपको बता दें कि दिल्ली में 7 फरवरी को वोटिंग होगी तो 10 फरवरी को वोटों की गिनती होगी. साल 2013 में दिल्ली में हुए विधानसभा  चुनाव में बीजेपी को 32,आप को 28, कांग्रेस को आठ और अन्य के खाते में दो सीटें गई थीं. उस समय कांग्रेस के समर्थन से आप ने सरकार ने बनाई थी जो 49 दिनों तक चली और फिर दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया.

 

कौन हैं किरन बेदी

पंजाब के अमृतसर में जन्मी किरन बेदी को दिल्ली के अखाड़े में उतारकर बीजेपी ने केजरीवाल के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है.  9 जून 1949 को जन्मी किरन बेदी देश की पहली महिला आईपीएस हैं. 1972 में उन्होंने पुलिस सेवा ज्वाइन की थी.

 

क्रेन बेदी के नाम से मशहूर रहीं किरन बेदी ने पार्किंग का उल्लंघन करने पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की गाड़ी को भी उठवा लिया था और जुर्माना भी लगाया था.

साल 1972 से लेकर 2007 तक. पूरे 35 साल तक किरन बेदी पुलिस महकमे में अपनी सेवा देती रहीं. 2007 में किरन बेदी ने रिटायरमेंट ले लिया था. अब किरन ने राजनीति में दूसरी पारी शुरू की हैं.

 

चार साल पहले  2011 में जब दिल्ली के जंतर-मंतर से जनलोकपाल को लेकर आंदोलन खड़ा हुआ था तब अन्ना हज़ारे के मंच पर किरन बेदी नजर आती थीं. उस वक्त अन्ना के एक तरफ अरविंद केजरीवाल नजर आया करते थे और दूसरी तरफ किरन बेदी.

 

हालांकि राजनीति के सवाल पर ही उन्होंने केजरीवाल का साथ छोड़ दिया था. अब बीजेपी में शामिल होकर उन्होंने दिल्ली के तामम सियासी समीकरण उलट पुलट दिये हैं.

 

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